कर्ज में डूबे देश के पांच बड़े राज्यों में दो लाख करोड़ रुपये के भारी कर्ज के साथ पश्चिम बंगाल की स्थिति सबसे खराब है. भारतीय सांख्यिकी संस्थान से जुड़े एक जाने माने अर्थशास्त्री ने यह बात कही है.
अर्थशास्त्री अभिरूप सरकार ने कहा, ‘सबसे अधिक कर्ज वाले पांच बडे राज्यों उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और गुजरात में पश्चिम बंगाल का राजस्व घाटा सबसे ऊंचा है.’ उन्होंने बताया कि वर्ष 2009-10 में पश्चिम बंगाल का राजस्व घाटा 17,940 करोड रुपये रहा, जबकि महाराष्ट्र का घाटा इस दौरान 7,123 करोड़ रुपये ही था.
उन्होंने कहा, ‘यह स्थिति पिछले कई सालों से बनी हुई है.’ सरकार का कहना है कि ज्यादा कर्ज वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश भी शामिल है लेकिन राजस्व उगाही के मामले में उत्तर प्रदेश अधिशेष की स्थिति में है. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में कर वसूली की स्थिति काफी खराब है. वैट प्रणाली से भी राज्य में राजस्व वसूली में तेजी नहीं आ पाई. {mospagebreak}
सरकार कहते हैं कि पश्चिम बंगाल में कर वसूली में भ्रष्टाचार का बोलबाला है. ‘वसूल किये गये कर के लिये कोई आधिकारिक रसीद नहीं दी जाती है, मेरा विश्वास है कि धन को पार्टी फंड में हस्तांतरित कर दिया जाता है.’ उन्होंने कहा कि यह बड़ी राशि है.
उन्होंने कहा कि राज्य में पिछले कई सालों से व्यापार और उद्योग में लगातार गिरावट का रुख बना है. इसका असर राजस्व वसूली पर भी पड़ा है. सरकार ने कहा पश्चिम बंगाल में पूंजी खाते में व्यय काफी कम होता है, इसके परिणामस्वरूप राज्य में परिसंपत्तियों का सृजन भी काफी कम होता है.
उन्होंने कहा, ‘राज्य में जितनी वसूली होती है उसका बड़ा हिस्सा वेतन, ब्याज भुगतान और सब्सिडी के तहत उपयोग में चला जाता है.’ उन्होंने कहा कि स्थिति इस कदर खराब हो गई है कि राज्य के वित्त मंत्री डा. असीम दासगुप्ता को वैट की दरों में सीधे एक प्रतिशत की वृद्धि कर उसे 13.5 प्रतिशत तक करना पड़ा. उन्होंने गैर योजना खर्च में भी 10 प्रतिशत तक कटौती की घोषणा कर दी. {mospagebreak}
भारतीय सांख्यिकी संस्थान के एक अन्य पूर्व अर्थशास्त्री दीपांकर दासगुप्ता ने कहा कि पश्चिम बंगाल में स्थिति बहुत नाजुक है. राज्य सरकार को अपने घाटे को दूर करने के लिये केन्द्र के पास ‘भीख’ मांगने के लिये जाना पड़ेगा.
दासगुप्ता ने कहा, ‘राज्य में कोष का रखरखाव बहुत खराब तरीके से किया गया है.’ राज्य में ऋण जाल में फंसने जैसी स्थिति है. जितनी वापसी हो रही है उससे ज्यादा उधार लिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का राजस्व व्यय उसकी राजस्व प्राप्ति से काफी अधिक है. इसका पूरा इस्तेमाल राज्य में परिसंपत्तियों के निर्माण के बजाय केवल वेतन भुगतान में किया जा रहा है.