खलनायक से गांधीगीरी और फिर पुलिसगीरी तक का सफर तय करने वाले संजय दत्त आज से एक नई चुनौती का सामना करने जा रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट के फरमान के मुताबिक आज उन्हें मुंबई की विशेष टाडा अदालत में सरेंडर करना है. कानून की पेचीदा गलियों से गुजरने के बाद संजय दत्त के पास अब एक ही रास्ता बचा है और वो है जेल का रास्ता.
मोहलत के दिनों की गिनती पूरी हो चुकी है. अब तो महज चंद घंटे बचे हैं. फिल्म स्टार संजय दत्त को आज शाम ढलने से पहले सरेंडर करना होगा. सबसे बड़ी अदालत का फ़रमान आने के बाद ही संजय दत्त ने जाहिर कर दिया था, कि कानून का आदेश वे सिर माथे पर रखते हैं.
मुंबई मे 1993 में हुए सीरियल बम धमाकों के केस में 21 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने संजय दत्त को आर्म्स ऐक्ट के तहत पांच साल की सजा सुनाई थी. संजय की जिंदगी के 18 महीने पहले ही जेल में बीत चुके हैं. लिहाजा कोर्ट ने बचे हुए साढ़े तीन साल यानी 42 महीने की कैद के आदेश दिए.
सरेंडर के लिए 4 हफ्ते की मोहलत मिली. फिल्मों के काम निपटाने के नाम पर 4 हफ्ते की मोहलत और मिली. कुछ और राहत पाने की आखिरी कोशिश भी हुई लेकिन कोर्ट ने उसे कबूल नहीं किया.
मंगलवार को जब सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म पुलिसगीरी के प्रोड्यूसर की याचिका ख़ारिज कर दी तभी साफ हो गया कि 16 मई से संजय दत्त को जेल की रोटी ही खानी पड़ेगी. संजय दत्त आज टाडा कोर्ट में आत्मसमर्पण करेंगे, उसके बाद अदालत तय करेगी कि उन्हें किस जेल में भेजा जाए.