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बेनामी चिट्ठी में संजय दत्त को जान से मारने की धमकी!

बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त को लेकर मुंबई की आर्थर रोड जेल को एक खत मिला है. इस खत में संजय दत्त को धमकी दी गई है. जेल प्रशासन ने इस खत के बाद उनकी सुरक्षा की पुख्ता गारंटी देने का वादा किया है.

संजय दत्त संजय दत्त

बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त को लेकर मुंबई की आर्थर रोड जेल को एक खत मिला है. इस खत में संजय दत्त को धमकी दी गई है. जेल प्रशासन ने इस खत के बाद उनकी सुरक्षा की पुख्ता गारंटी देने का वादा किया है.

गौर करने वाली बात है कि संजय दत्त ने मंगलवार को अपनी जान को खतरा बताया था और टाडा कार्ट में याचिका दायर करके सीधा पुणे के यरवडा जेल में सरेंडर करने की मांग की थी. हालांकि उन्होंने बुधवार अपनी याचिका वापस ले ली.

अब संजय दत्त जेल की जगह टाडा कोर्ट में सरेंडेर करेंगे. संजू बाबा को गुरुवार शाम 4 बजे तक सरेंडर करना है. वहीं, धमकी भरी चिट्ठी मिलने के बाद सवाल यही है कि आखिर संजय दत्त को कौन मारना चाहता है?

याचिका जिसमें संजय दत्त ने जाने के खतरे की बात कही थी...
संजय दत्त को अदालत में सरेंडर करने से डर लग रहा है. उनके वकीलों ने टाडा कोर्ट में एक याचिका दायर कर दो दलीलें दी थी.

दलील नंबर 1- संजय दत्त को कट्टरपंथी ताकतों से अपनी जान पर खतरा महसूस हो रहा है.
दलील नंबर 2- वो नहीं चाहते कि कोर्ट से जेल ले जाने तक मीडिया के कैमरे उनका पीछा करते रहें और कोई हादसा हो जाए.

पिछली बार जब संजू बाबा जब गिरफ्तार हुए थे तो मीडिया उनके पीछे लग गई थी. इस वजह से उन्हें 120 किलोमीटर की रफ्तार से गाड़ी भगानी पड़ी थी.

गौरतलब है कि 1993 मुंबई ब्लास्ट को लेकर 21 मार्च को आर्म्स एक्ट (गैरकानूनी रूप से हथियार रखने के लिए) के तहत संजय दत्त की सजा बरकरार रखने का फैसला सुनाया था. न्यायालय ने दत्त को 5 साल कैद की सजा सुनाई थी. वह पहले 18 महीने जेल की सजा काट चुके हैं और अब उन्हें जेल में साढ़े तीन साल की और सजा काटनी है.

इस फैसले के बाद इस बॉलीवुड अभिनेता ने अपनी फिल्मों की शूटिंग खत्म करने के बाद आत्मसमर्पण करने का अनुरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें समर्पण करने के लिए 4 हफ्तों की मोहलत दी थी. सरेंडर के लिए मोहलत मिलने के बाद संजय दत्त ने सु्प्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की जिसे खारिज कर दिया गया.

क्या है मामला?
संजय दत्त को गैरकानूनी तरीके से नौ एमएम की पिस्तौल और एके 56 राइफल रखने के जुर्म में टाडा अदालत ने दोषी ठहराया था. ये हथियार उन्हीं विस्फोटक सामग्री और हथियारों की खेप का हिस्सा थे, जिनका इस्तेमाल मुंबई बम धमाकों में किया गया था. इन धमाकों में 257 व्यक्ति मारे गये थे और 700 से ज्यादा जख्मी हो गए थे. मुंबई की टाडा अदालत ने 6 साल की सजा सुनाई थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने इसे घटाकर 5 साल कर दिया था.

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