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राजस्थान कांग्रेस में फिर सियासी संकट के बादल, पायलट गुट के विधायक हेमाराम चौधरी का इस्तीफा

राजस्‍थान में पिछले साल आए आए सियासी संकट के दौरान वह पायलट खेमे में शामिल थे. कुछ महीने पहले हेमाराम ने सूबे की गहलोत सरकार के कामकाज के तरीकों पर भी सवाल उठाए थे.

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राजस्थान कांग्रेस में फिर सियासी संकट के आसार नजर आ रहे हैं. (फाइल फोटो)
राजस्थान कांग्रेस में फिर सियासी संकट के आसार नजर आ रहे हैं. (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पायलट गुट के विधायक हेमाराम चौधरी का इस्तीफा
  • रमेश मीणा ने भी दी थी इस्तीफा देने की धमकी
  • गहलोत सरकार के कामकाज से नाराज़ चल रहे थे हेमाराम

राजस्थान कांग्रेस में एक बार फिर सियासी संकट के आसार नजर आ रहे हैं. पायलट गुट के विधायक और पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी ने विधायक पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. बताया जा रहा है कि हेमाराम चौधरी गहलोत सरकार के कामकाज से नाराज़ चल रहे थे जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया. हेमाराम गुड़ामालानी से विधायक हैं.

राजस्‍थान में पिछले साल आए सियासी संकट के दौरान वह पायलट खेमे में शामिल थे. कुछ महीने पहले हेमाराम ने सूबे की गहलोत सरकार के कामकाज के तरीकों पर भी सवाल उठाए थे. अपनी ही सरकार के खिलाफ बगावती तेवर अख्तियार करने को लेकर वह सुर्खियों में थे.

सचिन पायलट का साथ देने के बाद से ही ऐसे आरोप लग रहे थे कि उनके साथ ज्यादती हो रही है और परेशान किया जा रहा है. लंबे समय तक परेशानी झेलने के बाद और सचिन पायलट की तरफ़ से कोई क़दम नहीं उठाए जाने के बाद हेमाराम चौधरी ने विधायक पद से इस्तीफ़ा दे दिया.

हरीश चौधरी के बढ़ते दख़ल से भी परेशान थे हेमाराम चौधरी

चौधरी ने अपना इस्तीफ़ा रजिस्टर्ड डाक से विधानसभा अध्यक्ष को भेजा है. आजतक से बातचीत करते हुए उन्होंने अपने इस्तीफ़े की पुष्टि की मगर कोई भी बात करने से इंकार कर दिया. उन्होंने कहा कि वक़्त आने पर सब कुछ कहूंगा. माना जा रहा है कि सचिन पायलट लंबे समय से उन्हें मना रहे थे मगर चौधरी नहीं माने.अपने इलाक़े में बाड़मेर के बायतू से आनेवाले गहलोत सरकार के राजस्व मंत्री हरीश चौधरी के बढ़ते दख़ल से भी वह परेशान थे.

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राजस्थान में फिर जुलाई जैसे हालात!
कहा जा रहा है कि बहुत जल्द ही राजस्थान में एक बार फिर से पिछली बार की जुलाई वाले हालात होने जा रहे हैं क्योंकि सचिन पायलट कोर्ट के बहुत सारे विधायक अब बग़ावत के मूड में है. आलाकमान के साथ हुए समझौते में उन्हें आज तक कुछ नहीं मिला है. सचिन पायलट के मान सम्मान के लिए जो कमेटी गठित की गई थी वहां भी अहमद पटेल के मृत्यु के बाद कामकाज बंद है. अब पायलट बोर्ड के विधायकों का सब्र टूटने लगा है. सचिन पायलट के ख़ामोश हो जाने से भी पायलट के विधायक पायलट से खफ़ा हैं.

बढ़ रही विधायकों की नाराजगी
राजस्थान की अशोक गलहोत सरकार के खिलाफ पार्टी विधायकों की नाराजगी बढ़ती जा रही है. इससे पहले भी कांग्रेस के आठ विधायकों ने अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ असंतोष व्यक्त करते हुए अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला था. हाल ही में राजस्थान विधानसभा में 50 विधायकों को बिना माइक वाली सीट दिए जाने का मुद्दा गर्माया था.

इससे पहले इस मुद्दे पर विधानसभा अध्यक्ष सी पी जोशी तथा कांग्रेस विधायक रमेश मीणा के बीच बहस हुई थी. रमेश मीणा ने विधानसभा के बाहर कहा था कि मैं अपनी समस्याओं के बारे में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मिलूंगा. राहुल गांधी से मिलने का समय भी मांगा है. लेकिन अगर वहां भी हमारी समस्याओं का समाधान नहीं होता है तो मैं इस्तीफा देने से भी पीछे नहीं हटूंगा.

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बता दें कि हेमाराम चौधरी के अलावा पूर्व मंत्री रमेश मीणा, विधायक वेद प्रकाश सोलंकी, मुरारी लाल मीणा  और पूर्व मंत्री विश्वेन्द्र सिंह राजस्थान सरकार के कामकाज पर अपना संतोष जाहिर कर चुके हैं.

 

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