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अब जाटों, राजपूतों और बेरोजगारों ने दी PM मोदी की सभा में हंगामा करने की धमकी

गुर्जरों के बाद अब जाटों, राजपूतों और बेरोजगारों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में हंगामा करने की धमकी दी है. इसको लेकर सुरक्षा एजेंसियां चौकन्ना हो गई हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

जयपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सात जुलाई को होने वाली लाभार्थी सभा सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बनी हुई है. राज्य में चुनावी माहौल है और ऐसे में जितने भी असंतुष्ट समुदाय हैं, सभी के सभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में हंगामा करने की धमकी दे रहे हैं. सबसे पहले गुर्जरों ने एक फीसदी आरक्षण की अधिसूचना दोबारा जारी करने की मांग को लेकर पीएम मोदी की सभा में हंगामा करने की धमकी दी थी, उसके बाद सरकार ने तत्काल गुर्जरों की बात मान ली थी.

इसके बाद से लगातार अलग-अलग समुदाय के लोग प्रधानमंत्री की सभा में हंगामा करने की धमकी दे रहे हैं. धौलपुर और भरतपुर के जाटों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जयपुर सभा में हंगामा करने की धमकी दी है. राजस्थान जाट संघर्ष समिति के नेम सिंह फौजदार ने भरतपुर में ऐलान किया कि अगर धौलपुर-भरतपुर के जाटों को आरक्षण की घोषणा नहीं होती है, तो प्रधानमंत्री की सभा में हंगामा किया जाएगा.

इतना ही नहीं, इसके बाद वसुंधरा राजे से नाराज चल रहे राजपूतों ने भी पीएम मोदी की सभा का विरोध करने का ऐलान किया है. राजपूत सभा के अध्यक्ष गिर्राज सिंह लोटवाड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके ऐलान किया कि चतुर सिंह कांड और आनंदपाल एनकाउंटर दोनों में सही जांच नहीं होने की वजह से राजपूत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जयपुर में होने वाली सभा का विरोध करेंगे. फिलहाल राजपूतों की धमकी को सरकार बेहद गंभीरता से ले रही है.

दूसरी ओर इसके तुरंत बाद चार हजार से ज्यादा बेरोजगारों ने अजमेर में राज्य लोक सेवा आयोग के दफ्तर पहुंचकर धरना देना शुरू कर दिया. इन लोगों ने ऐलान किया कि अगर सरकारी नौकरियों के लिए भर्तियां जल्द नहीं निकाली गईं, तो सात जुलाई को वो पीएम मोदी की सभा में पहुंचकर हंगामा मचाएंगे. मालूम हो कि इससे पहले झुंझुनू की प्रधानमंत्री मोदी की सभा में हंगामा होने की वजह से मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की बहुत किरकिरी हुई थी.

इस बार प्रशासन पूरी तरह से नजर रख रहा है कि कहीं कोई BJP विरोधी या सरकार से असंतुष्ट सभा में न पहुंच जाए. एक-एक अधिकारी और नेता को जिम्मेदारी दी गई है कि हर व्यक्ति की स्क्रीनिंग करके सभा के अंदर ले जाया जाए. साथ ही ये भी कहा गया है कि अपने इलाके के लोगों के बीच विधायक, मंत्री और सांसद बैठक करेंगे, ताकि किसी भी तरह के विरोध को रोका जा सके.

स्थानीय स्तर पर निर्देश दिए जा रहे हैं कि कोई भी लाभार्थी काला कपड़ा पहनकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा में नहीं आएगा. इस धमकी की वजह से राज्य की सुरक्षा एजेंसियां भी चौकन्ना हैं. खुफिया विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि जितने भी असंतुष्ट समुदाय हैं, उन सब पर कड़ी नजर रखी जाए.

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