scorecardresearch
 

जयपुर: मदरसे के एक कमरे में चल रहा अस्पताल, दो करोड़ में तैयार PHC भवन को खा रहा दीमक

मदरसे के अंदर चल रहे इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अंदर 15-15 हजार की आबादी वाले दो गांवों के उप स्वास्थ्य केंद्र भी आते हैं. सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक यहां 12 स्टाफ हैं. कमरे के अंदर बैठने की जगह नहीं होने की वजह से सात लोग डेपुटेशन पर यहां से चले गए. 

X
भगवान भरोसे स्वास्थ्य व्यवस्था (फोटो- आजतक)
भगवान भरोसे स्वास्थ्य व्यवस्था (फोटो- आजतक)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • जयपुर से सटे गांव में स्वास्थ्य व्यवस्था राम भरोसे
  • ढाई साल से ज्यादा समय से बंद है अस्पताल
  • एक कमरे में तीस हजार की आबादी का चल रहा अस्पताल

राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं को कैसे दीमक बर्बाद कर रहा है, इसकी बानगी जयपुर के तालाब गांव में देखने को मिली. जहां पर दो करोड़ की लागत से बना अस्पताल पिछले ढाई साल से ज्यादा समय से बंद है. जबकि मदरसे के एक कमरे में तीस हजार की आबादी का पूरा अस्पताल चल रहा है. जयपुर जिले के इस ताला गांव की आबादी लगभग 15000 है. 

मदरसे के अंदर चल रहे इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अंदर 15-15 हजार की आबादी वाले दो गांवों के उप स्वास्थ्य केंद्र भी आते हैं. सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक यहां 12 स्टाफ हैं. कमरे के अंदर बैठने की जगह नहीं होने की वजह से सात लोग डेपुटेशन पर यहां से चले गए. 

एक डॉक्टर भी आए थे वो 3 मार्च को यहां से चले गए. दो लोग वैक्सीनेशन ड्यूटी पर गए हैं और पीछे रह गया है यूनानी डॉक्टर और एक नर्सिंग कर्मी. मदरसे वालों ने बिजली की सप्लाई काट दी है. दो सालों से पंखा नहीं चला है. दोनों कहते हैं, सरकार की ड्यूटी कर रहे हैं. इसी तरह से काम चला रहे हैं. नर्सिंगकर्मी और यूनानी डॉक्टर कह रहे हैं कि मिलकर हम लोग मरीजों को खिला देते हैं.

पीएचसी का मतलब प्राथमिक अस्पताल होता है. 2012 में यहां पर PHC बनी थी और अक्टूबर 2018 में एक शानदार बिल्डिंग भी बनकर तैयार हुई.  इस अस्पताल में सब कुछ है सिवाय डॉक्टर, मरीज और दवाइयों के. ढाई सालों में चौखट टूटने लगी हैं और सीढ़ियों पर दीमक लग गए हैं. एक कमरे के अस्पताल में वैक्सीन लगाने की जगह नहीं थी, इसलिए इसका ताला खोला गया है. अस्पताल कब चालू होगा किसी को पता नहीं. 

और पढ़ें- कोविड मरीजों को दी गई Monoclonal Antibody दवा, 8 दिन बाद चौंकाने वाले रहे नतीजे

जयपुर के सीएमएचएओ नरोत्तम शर्मा कहते हैं कि हैंडओवर का प्रॉसेस अभी चल रहा है. ठेकेदार की गलतियां थीं और कुछ गांव की राजनीति थी. जिसकी वजह से ये अस्पताल शुरू नहीं हो पाया. मगर हमलोग इसे जल्द शुरू कराने की कोशिश कर रहे हैं.

गांव के लोग कहते हैं कि कहने को 2012 से ही गांव में पूरा अस्पताल चल रहा है मगर स्वास्थ्य सुधार के नाम पर गांव वालों को आज तक कुछ भी नसीब नहीं हुआ. कोरोना की दूसरी लहर भी आकर निकलने वाली है मगर सरकार नहीं जागी. जब जयपुर से सटे गांव में स्वास्थ्य उपकेंद्र की यह हालत है तो दूर दराज के इलाकों में क्या स्थिति होगी? 

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें