scorecardresearch
 

राजस्थान HC से आसाराम को झटका, रेप पीडि़ता पेश करेगी अपने नाबालिग होने का सबूत

राजस्थान हाईकोर्ट ने सोमवार को आसाराम की दो याचिकाओं को खारिज करते हुए निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा जिसमें अभियोजन को कथित रूप से छेड़छाड़ की शिकार लड़की के अपराध के वक्त नाबालिग होने संबंधी दस्तावेज अदालत में पेश करने की अनुमति दी गई थी.

X
आसाराम (फाइल फोटो)
आसाराम (फाइल फोटो)

राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. सोमवार को उनकी दो याचिकाओं को खारिज करते हुए निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा जिसमें अभियोजन को कथित रूप से छेड़छाड़ की शिकार लड़की के अपराध के वक्त नाबालिग होने संबंधी दस्तावेज अदालत में पेश करने की अनुमति दी गई थी.

जस्टिस विजय बिश्नोई ने दोनों याचिकाओं पर निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए अभियोजन को अदालत में दस्तावेज पेश करने की अनुमति दी.

अगस्त 2013 में आसाराम के मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा स्थित आश्रम में रहने वाली 16 साल की लड़की ने आसाराम पर आरोप लगाया था कि उन्होंने उसके इलाज के नाम पर जोधपुर के एक फार्महाउस में उसका यौन उत्पीड़न किया था.

आसाराम के एक वार्डन ने लड़की के माता पिता को उसकी समस्याएं खत्म करने के लिए उसे आश्रम ले जाने की कथित रूप से सलाह दी थी.

पीड़ित के वकील पीसी सोलंकी ने कहा, 'चार्जशीट दायर करने वाली अधिकारी मुक्ता पारीक ने जांच के दौरान छिंदवाड़ा आश्रम में पीड़ित के गुरुकुल से सातवीं, आठवीं, नौवीं और ग्यारहवीं कक्षाओं के दस्तावेज और मार्क्सशीट अदालत के सामने रखना चाहती हैं क्योंकि इन्हें पहले नहीं पेश किया गया.'

सोलंकी ने कहा, 'हमने अदालत में ये दस्तावेज पेश करने के लिए निचली अदालत की अनुमति मांगी थी क्योंकि ये हमारे लिये यह साबित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं कि अपराध के समय लड़की नाबालिग थी.' सोलंकी ने कहा कि आसाराम ने दो अलग अलग आपराधिक याचिकाएं दायर करके हाईकोर्ट में निचली अदालत के इस फैसले को चुनौती दी थी.

- इनपुट भाषा

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें