कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रीय राजनीति में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कद खासा बढ़ा दिया है. जनार्दन द्विवेदी की जगह उनको संगठन महासचिव की अहम जिम्मेदारी दी गई, लेकिन गहलोत के समर्थकों को इस बात को लेकर निराशा हुई कि 2019 के लिहाज से गहलोत को दिल्ली में केंद्रीय संगठन में जगह मिल गई, लेकिन अब वो राजस्थान सीएम की कुर्सी से दूर हो गए.
इस मुद्दे पर कांग्रेस मुख्यालय में अशोक गहलोत ने दो टूक कहा कि मीडिया में कुछ भ्रमित करने वाली खबरें आईं हैं. कोई कभी मुझे गुजरात भेजता है तो कोई राज्यसभा भेजता है और अब दिल्ली भेज दिया गया है. उन्होंने कहा कि मैं राजस्थान के गांवों, चौपालों, ढाणियों जहां भी जाता हूं, वहां मुझे जनता का भरपूर प्यार और आशीर्वाद मिल रहा है. जनता का इतना प्यार पाकर मैं राजस्थान की प्यारी भाषा में वहां की जनता से यही कहकर आया हूं कि 'मैं थारसूं दूर नहीं' यानी मैं आपसे दूर नहीं. अशोक गहलोत ने कहा कि आखिरी सांस तक मेरा राजस्थान की जनता की सेवा करने का संकल्प है. 40 साल से मुझे राजस्थान की जनता का प्यार मिला है, उससे मैं अभिभूत हूं. वैसे भी दिल्ली राजस्थान से दूर नहीं हूं, इसलिए राजस्थान को लेकर भ्रम नहीं फैलाया जाए.
राजस्थान में भले ही राहुल गांधी ने किसी को सीएम उम्मीदवार घोषित नहीं करने का ऐलान किया हो, लेकिन पहले गुजरात का प्रभारी, फिर संगठन महासचिव की बड़ी जिम्मेदारी मिलने के बाद कयास लगाये गए कि इससे सचिन पायलट का रास्ता साफ हो गया है. इन सब खबरों को भ्रामक बताते हुए खुद अशोक गहलोत ने बताया कि राहुल गांधी ने कहा है कि हर राज्य में नेता एकजुट होकर काम करें. सचिन पायलट का नाम लिए बगैर गहलोत ने कहा कि सीनियर्स और जूनियर्स की लाइन खिंची हुई है.
उन्होंने कहा कि जूनियर्स को चाहिए कि वो सीनियर्स द्वारा पहले से खिंची लंबी लकीर से बड़ी लकीर खींचें. इससे पार्टी को भी फायदा होगा और उनको भी. लेकिन पहले से खिंची लाइन काटने की कोशिश होगी तो पार्टी को भी नुकसान होगा और खुद उनका भी. कुल मिलाकर अशोक गहलोत ने ताजा बयान देकर अपने समर्थकों के साथ ही सियासी गलियारों को सीधा संदेश दिया है कि वो सीएम की गद्दी की दौड़ में बने रहना चाहते हैं और किसी कीमत पर पीछे हटने वाले नहीं हैं.