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SGPC फाउंडेशन की प्रदर्शनी से हटी नेहरू की पेंटिंग, कांग्रेस ने बताया ओछी राजनीति

पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि एसजीपीसी राजनीतिक संस्था बन गई है और शिरोमणि अकाली दल के इशारों पर काम कर रही है.

पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील जाखड़ (फाइल फोटोः ट्विटर) पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील जाखड़ (फाइल फोटोः ट्विटर)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कांग्रेस ने अकाली दल के इशारे पर काम करने का लगाया आरोप
  • तस्वीरें हटाकर इतिहास छिपाने की हुई कोशिशः सुनील जाखड़
  • एसजीपीसी की सफाई- सिख भावनाओं को देख हटाईं पेंटिंग्स 

सिखों की सर्वोच्च संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी यानी एसजीपीसी की स्थापना के 100 साल पूरे हो गए हैं. एसजीपीसी की स्थापना के 100 साल पूरे होने पर पंजाब के अमृतसर में स्वर्ण मंदिर और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के दफ्तर में कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. एसजीपीसी और सिख इतिहास को लेकर आयोजित की गई एक पेंटिंग प्रदर्शनी से पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की तीन पेंटिंग्स हटाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है.

कांग्रेस ने इसे ओछी राजनीति बताया है. पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि एसजीपीसी राजनीतिक संस्था बन गई है और शिरोमणि अकाली दल के इशारों पर काम कर रही है. उन्होंने ओछी राजनीति के तहत नेहरू की तस्वीरें हटाकर इतिहास छिपाने की कोशिश का आरोप लगाया. जाखड़ ने कहा कि इस इतिहास को कोई नहीं मिटा सकता कि नेहरू का शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और सिख धर्म के साथ काफी जुड़ाव रहा है.

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वहीं, इस पूरे मामले पर अकाली दल ने अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा कि एसजीपीसी के कार्यक्रमों में किस तरह की तस्वीरें लगाई जानी हैं या नहीं, ये खुद एसजीपीसी को ही तय करना होता है. इसमें किसी तरह का कोई राजनीतिक दखल नहीं है और हो सकता है कि किसी कारण से नेहरू की तस्वीर हटाई गई हो. वहीं, आम आदमी पार्टी के विधायक अमन अरोड़ा ने भी इसे राजनीति करार देते हुए इस तरह की राजनीति से बचने की नसीहत दी. अरोड़ा ने कहा कि ये इतिहास में दर्ज है कि नेहरू एसजीपीसी की ओर से अंग्रेज सरकार के खिलाफ गठित मोर्चे में शामिल हुए थे और उनकी गिरफ्तारी भी हुई थी. एसजीपीसी इन पेंटिंग्स को हटाकर इतिहास को नहीं छिपा सकता.

एसजीपीसी ने दी सफाई

नेहरू की पेंटिंग्स हटाए जाने को लेकर जब विवाद हुआ, एसजीपीसी ने भी इस पूरे मामले पर सफाई दी है. एसजीपीसी के अध्यक्ष गोविंद सिंह लोंगोवाल ने कहा कि नेहरू की तस्वीरों को लेकर सिख समुदाय में रोष था. रोष इसलिए, क्योंकि नेहरू की बेटी इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री रहते अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाया था. सेना से हमला करवाया था और दिल्ली में 1984 में हुए सिख कत्लेआम में भी गांधी परिवार का ही हाथ था. इसीलिए सिख भावनाओं को देखते हुए नेहरू से जुड़ी इन पेंटिंग्स को हटा दिया गया.

क्या है पूरा मामला

एसजीपीसी ने अपनी स्थापना के 100 साल पूरे होने पर 32 कलाकारों से एसजीपीसी और सिख इतिहास को दर्शाती हुई पेंटिंग्स बनवाई थीं. इन पेंटिंग्स की प्रदर्शनी स्वर्ण मंदिर के मंजी साहिब दीवान हॉल में लगाई गई थी. इन्हीं पेंटिंग्स में से पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू से संबंधित तीन पेंटिंग्स भी थीं. इनमें से एक तस्वीर में वो एसजीपीसी की ओर से एक मोर्चे में शामिल होते दिखाई दे रहे हैं. नेहरू को इस दौरान गिरफ्तार होते दिखाया गया था. इसके अलावा सिख नेता तेजा सिंह के साथ पंडित नेहरू, महात्मा गांधी, सरदार पटेल और सुभाष चंद्र बोस की पेंटिंग भी थी. लेकिन प्रदर्शनी के शुरुआती कुछ दिनों तक इन पेंटिंग्स को दिखाया गया और बाद में अचानक एसजीपीसी ने नेहरू से संबंधित पेंटिंग्स बगैर कोई कारण बताए हटा दी थीं.

 

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