पंजाब में विधानसभा चुनाव से करीब एक साल पहले आम आदमी पार्टी (AAP) द्वारा मोगा में आयोजित रैली सत्तारूढ़ दल के लिए राजनीतिक ‘वार्म-अप’ मानी जा रही थी, लेकिन यह विवादों में फंस गई है. विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि AAP ने इसे राजनीतिक रैली की बजाय एक आधिकारिक सरकारी कार्यक्रम का रूप देकर नियमों का उल्लंघन किया है.
मोगा जिले के किल्ली चाहलां गांव में सोमवार को AAP ने 'युद्ध नशेयां विरुद्ध' (नशे के खिलाफ युद्ध) नाम से एक विशाल रैली आयोजित की, जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान समेत अन्य बड़े नेता मौजूद थे. विवाद की जड़ बनी पंजाब के चीफ सेक्रेटरी केएपी सिन्हा और डीजीपी गौरव यादव की इस रैली में मौजूदगी. विपक्षी दलों ने आम आदमी पार्टी पर नौकरशाही का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया.
पंजाब बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक राजनीतिक रैली में शीर्ष नौकरशाहों की उपस्थिति सेवा नियमों का उल्लंघन है. उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि देश की 'स्टील फ्रेम' कही जाने वाली नौकरशाही क्या अब राजनीतिक दबाव में झुक रही है. बीजेपी ने आरोप लगाया कि यह रैली चुनावी स्टंट थी और इसमें सरकारी धन व संसाधनों का दुरुपयोग किया गया.
"Watching the Chief Secretary & DGP at Aam Aadmi Party's rally today, one wonders if India's 'steel frame' bureaucrats are now bending to political whims . Isn’t this a flagrant breach of All India Service Rules ?@AmitShah@BhagwantMann
— Sunil Jakhar (@sunilkjakhar) February 16, 2026
शिरोमणि अकाली दल (SAD) के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने भी आरोप लगाया कि सरकार ने नशा विरोधी अभियान की आड़ में राजनीतिक कार्यक्रम कराया. उन्होंने दावा किया कि लोगों को लाने-ले जाने, मंच और अन्य व्यवस्थाओं का खर्च सरकारी खजाने से किया गया. शिअद का कहना है कि दिल्ली के AAP नेताओं की मौजूदगी यह दर्शाती है कि यह 2027 विधानसभा चुनाव की अनौपचारिक शुरुआत थी.
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने आम आदमी पार्टी के अभियान पर कटाक्ष करते हुए इसे 'युद्ध नशेयां विरुद्ध' से 'युद्ध झाड़ू विरुद्ध' बताया. उन्होंने कहा कि रैलियों और यात्राओं से नशे की समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि यह पैसा नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्रों पर खर्च किया जाना चाहिए था. वहीं आम आदमी पार्टी की पंजाब इकाई के महासचिव बलतेज पन्नू ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह एक आधिकारिक कार्यक्रम था, जिसमें गांवों की सुरक्षा समितियों (VDC) को नशे के खिलाफ शपथ दिलाई गई. उन्होंने आरोप लगाया कि जो दल आज सवाल उठा रहे हैं, वही पहले सरकारी वाहनों का इस्तेमाल नशा तस्करी के लिए होने देते थे.