पाकिस्तान में धर्म परिवर्तन और निकाह के मामले में सरबजीत कौर का प्रकरण एक बार फिर कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है. भारतीय नागरिक कर्नल सिंह ने लाहौर हाईकोर्ट में नई याचिका दायर कर अपनी पत्नी सरबजीत कौर की पाकिस्तान में हुई कथित शादी को रद्द करने की मांग की है. याचिका 24 फरवरी 2026 को अधिवक्ता अली चंगेजी संधू के माध्यम से दाखिल की गई. इसमें कहा गया है कि सरबजीत कौर अब भी भारतीय कानून के तहत कर्नल सिंह की विधिवत पत्नी हैं, क्योंकि दोनों के बीच अब तक तलाक नहीं हुआ है. याचिका में दावा किया गया है कि बिना पहली शादी को कानूनी रूप से समाप्त किए पाकिस्तान के नागरिक नासिर हुसैन से निकाह किया गया, जो अवैध है.
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी है कि पाकिस्तान की संवैधानिक अदालतों, विशेषकर Federal Shariat Court ने गैर मुस्लिम विवाहित महिला के इस्लाम स्वीकार कर मुस्लिम पुरुष से विवाह के संबंध में स्पष्ट सिद्धांत तय किए हैं. इन सिद्धांतों के तहत महिला को अपने देश के कानून के अनुसार न्यायिक तलाक लेना आवश्यक है. साथ ही उसे अपने गैर मुस्लिम पति को दो गवाहों की मौजूदगी में इस्लाम स्वीकार करने का औपचारिक निमंत्रण देना होता है. यदि पति इनकार करे तो 90 दिन की प्रतीक्षा अवधि के बाद ही विवाह विच्छेद माना जा सकता है. याचिका में कहा गया है कि इन प्रक्रियाओं का पालन इस मामले में नहीं किया गया.
पहली शादी खत्म किए बिना निकाह का आरोप
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि पहली शादी के रहते किसी प्रकार का सहवास इस्लामी कानून के तहत जुर्म की श्रेणी में आ सकता है. अदालत से नासिर हुसैन के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई है. कर्नल सिंह ने सरबजीत कौर को डिपोर्ट करने की भी मांग की है. उनका कहना है कि इस मामले में इस्लामी कानूनी सिद्धांतों, फॉरेनर्स एक्ट 1946 और तीर्थ वीजा की शर्तों का उल्लंघन हुआ है. साथ ही नासिर हुसैन पर दुष्कर्म का मामला दर्ज करने की मांग भी की गई है, यह कहते हुए कि उन्होंने जानबूझकर पहले से विवाहित महिला से निकाह किया.
याचिका में जबरन धर्म परिवर्तन और आर्थिक प्रलोभन के आरोप भी लगाए गए हैं. कुछ दस्तावेजी साक्ष्य संलग्न किए जाने की बात कही गई है, जिनमें यह दावा है कि नासिर हुसैन ने कथित रूप से सरबजीत कौर की निजी तस्वीरें और वीडियो उनके रिश्तेदारों को भेजने की बात स्वीकार की है. याचिकाकर्ता ने अदालत से सरबजीत कौर को निर्णय तक महिला शेल्टर होम में रखने, उनके पति और बेटों से संवाद की सुविधा देने और कॉल रिकॉर्डिंग की वॉयस फॉरेंसिक जांच कराने का अनुरोध किया है. मामला फिलहाल लाहौर हाई कोर्ट में विचाराधीन है.
जबरन धर्म परिवर्तन और अवैध निकाह का दावा
इस पूरे प्रकरण की पृष्ठभूमि भी काफी चर्चा में रही है. 4 नवंबर को सरबजीत कौर 2 हजार से अधिक सिख श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ गुरु नानक देव प्रकाश पर्व के अवसर पर पाकिस्तान गई थीं. यह यात्रा Shiromani Gurdwara Parbandhak Committee के प्रबंधन में हुई थी. 13 नवंबर को जत्था भारत लौट आया, लेकिन सरबजीत कौर वापस नहीं आईं. पाकिस्तानी आव्रजन अधिकारियों ने भारतीय अधिकारियों को सूचित किया कि उन्होंने एग्जिट क्लियरेंस नहीं लिया. इस पर प्रारंभिक पुलिस रिपोर्ट भी भेजी गई.
बाद में जानकारी सामने आई कि नवंबर के पहले सप्ताह में उन्होंने इस्लाम कबूल कर अपना नाम नूर फातिमा रख लिया और पाकिस्तानी नागरिक नासिर हुसैन से निकाह कर लिया. दोनों ने आठ साल पुराने सोशल मीडिया संबंध का हवाला दिया. इस दौरान उन पर भारतीय जासूस होने के आरोप भी लगे, हालांकि अदालत ने दंपति को परेशान न करने का निर्देश दिया था. बाद में पंजाब पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और सरबजीत कौर को लाहौर के सरकारी शेल्टर होम में रखा गया.
डिपोर्टेशन और आपराधिक कार्रवाई की मांग
जनवरी 2026 में एक अन्य याचिका में दोनों के खिलाफ आव्रजन कानून उल्लंघन के आरोप में एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई. इस याचिका में पाकिस्तान की दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं 22 ए और 22 बी का हवाला देते हुए एफआईए से जांच की मांग की गई. सत्र अदालत ने इस पर एफआईए से रिपोर्ट तलब की है. 13 फरवरी को सरबजीत कौर शेल्टर होम से निकलकर नासिर हुसैन के घर चली गईं. उन्होंने कहा कि उनका संबंध आठ साल पुराना है और वह पाकिस्तान में ही जीवन बिताना चाहती हैं, जबकि पहले एक वायरल ऑडियो में उन्होंने भारत लौटने की इच्छा जताई थी. अब भारतीय पति की नई याचिका ने इस मामले को और जटिल बना दिया है.