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'सबूतों के साथ 15 जनवरी को मिलते हैं', बोले CM भगवंत मान, अकाल तख्त से अपनी पेशी LIVE दिखाने की गुजारिश की

अकाल तख्त में पेशी से पहले सीएम भगवंत मान का लाइव प्रसारण का आग्रह सियासी और धार्मिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है. दशवंध, गुरु की गोलक और लापता स्वरूपों को लेकर पहले से गरमाए माहौल में 15 जनवरी की पेशी अहम मानी जा रही है, जिस पर सिख संगत और राजनीति दोनों की नजरें टिकी हैं.

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CM मान 15 जनवरी को अपना पक्ष रखेंगे (फाइल फोटो- PTI)
CM मान 15 जनवरी को अपना पक्ष रखेंगे (फाइल फोटो- PTI)

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गुरुवार को अकाल तख्त के जत्थेदार से अनुरोध किया कि 15 जनवरी को अकाल तख्त सचिवालय के समक्ष उनकी प्रस्तावित पेशी का सीधा प्रसारण (LIVE) करने की अनुमति दी जाए.

एक्स पर साझा एक पोस्ट में CM मान ने कहा कि उन्हें दुनिया भर से संदेश मिल रहे हैं कि जब वह 15 जनवरी को ‘संगत’ (सिख समुदाय) की ओर से अपना पक्ष रखें, तो उसे सभी टेलीविजन चैनलों पर लाइव दिखाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि संगत की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए वह अकाल तख्त के जत्थेदार से आग्रह कर रहे हैं कि उनके स्पष्टीकरण का सीधा प्रसारण किया जाए, ताकि संगत हर विवरण से अवगत रह सके.

मान ने पोस्ट में कहा, '15 जनवरी को मिलते हैं—सबूतों के साथ.'

अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज्ज ने सोमवार को मान को 15 जनवरी को तख्त सचिवालय के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए तलब किया था, ताकि वह अपनी कथित सिख-विरोधी टिप्पणियों पर स्पष्टीकरण दे सकें.

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इस बीच, एक आधिकारिक बयान में मुख्यमंत्री ने कहा कि वह सभी तथ्यों के साथ अकाल तख्त के समक्ष निश्चित रूप से पेश होंगे. उन्होंने कहा, 'मैं वहां मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक विनम्र और धर्मनिष्ठ सिख के रूप में उपस्थित होऊंगा.'

मान ने यह भी कहा कि उसी दिन देश के राष्ट्रपति गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर का दौरा करेंगे, इसके बावजूद वह अकाल तख्त साहिब के समक्ष अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करेंगे. उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके लिए अकाल तख्त सब कुछ से ऊपर है.

ज्ञानी गरगज्ज ने मान को ‘गुरु की गोलक’ (गुरुद्वारे की दान पेटी) पर कथित टिप्पणी करने और सिख गुरुओं तथा शहीद आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीरों के साथ 'आपत्तिजनक गतिविधियों' में शामिल होने के आरोप में तलब किया था. जत्थेदार ने कहा था कि जानबूझकर सिख-विरोधी मानसिकता व्यक्त करते हुए मान ने सिख गुरुओं के ‘दशवंध’ के सिद्धांत के विरुद्ध बार-बार आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं, जिससे सिखों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची. दशवंध सिखों की वह परंपरा है, जिसमें धार्मिक कर्तव्य के रूप में अपनी आय का 10 प्रतिशत दान किया जाता है.

गरगज्ज ने यह भी स्पष्ट किया था कि चूंकि मुख्यमंत्री एक ‘पतित’ हैं और सिख परंपरा के अनुसार उन्हें अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश नहीं किया जा सकता, इसलिए उन्हें 15 जनवरी को अकाल तख्त सचिवालय के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के लिए तलब किया गया है.

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मान को यह समन गुरु ग्रंथ साहिब की 328 गुम हुई ‘स्वरूपों’ (पवित्र प्रतियों) के मामले में एफआईआर दर्ज किए जाने को लेकर पंजाब सरकार और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के बीच जारी विवाद के बाद जारी किया गया. एसजीपीसी प्रमुख हरजिंदर सिंह धामी ने इस एफआईआर को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर तीखा हमला किया था और आरोप लगाया था कि सरकार केवल राजनीतिक लाभ के लिए सर्वोच्च गुरुद्वारा निकाय के प्रशासनिक अधिकारों में हस्तक्षेप कर रही है.

पिछले साल 29 दिसंबर को मान ने कहा था कि कई सिख संगठनों द्वारा लापता स्वरूपों की गहन जांच और उनकी बरामदगी की मांग के बाद एफआईआर दर्ज की गई थी. उन्होंने एसजीपीसी पर 328 लापता स्वरूपों को खोजने में विफल रहने और अकाल तख्त को ढाल के रूप में इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया था.

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