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Kerala Election Result : अपनी एक सीट भी नहीं बचा पाई बीजेपी, फिर भी क्या है खुश होने वाली बात?

राज्य की 140 सदस्यीय विधानसभा में 97 सीटें हासिल कर लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) सरकार बनाने जा रही है. कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) को 41 सीटें मिली हैं. राष्ट्रीय स्तर पर सबसे बड़े दल भारतीय जनता पार्टी को केरल में एक भी सीट नहीं मिली.

केरल में बीजेपी को एक भी सीट नहीं मिली (फाइल फोटो: रॉयटर्स) केरल में बीजेपी को एक भी सीट नहीं मिली (फाइल फोटो: रॉयटर्स)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • केरल में एलडीएफ को मिली है विजय
  • बीजेपी को इस बार एक सीट भी नहीं मिली

केरल में इस बार विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को निराशा मिली है. राज्य की विधानसभा में इस बार उसका कोई प्रतिनिधि नहीं होगा. वह अपनी एकमात्र सीट नेमोम भी नहीं बचा पाई. हाईप्रोफाइल कैंडिडेट ई. श्रीधरन भी चुनाव हार गए. यही नहींं, सबरीमाला इलाके वाली पोन्नि सीट पर बीजेपी तीसरे स्थान पर पहुंच गई है. 

राज्य की 140 सदस्यीय विधानसभा में 97 सीटें हासिल कर लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) सरकार बनाने जा रही है. कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) को 41 सीटें मिली हैं. राष्ट्रीय स्तर पर सबसे बड़े दल भारतीय जनता पार्टी के लिए काफी शर्मनाक है कि उसे केरल में एक भी सीट नहीं मिली. यह शर्मनाक इसलिए भी है कि केरल के तमाम छोटे-छोटे क्षेत्रीय दलों को भी एक से पांच सीटें हासिल हो गई ​हैं, लेकिन ई श्रीधरन जैसे कई दिग्गजों को उतारने वाली बीजेपी एक भी सीट नहीं जीत पाई. 

राज्य के बीजेपी नेताओं ने चुनाव से पहले बड़े-बड़े दावे किए थे. हालांकि ऑफ द रिकॉर्ड बीजेपी के नेता यह उम्मीद कर रहे थे कि पार्टी इस बार 3 से 5 सीट जीत जाएगी. लेकिन तमाम दूसरे एक्सपर्ट पहले से यह चेतावनी दे रहे थे कि बीजेपी इस बार शून्य पर सिमट सकती है. 

केरल की राजनीति पर गहरी नजर रखने वाले राज्य के वरिष्ठ पत्रकार हसनुल बन्ना ने चुनाव से पहले Aajtak.in से बातचीत में कहा था, 'राज्य में वैसे तो बहुत अच्छी स्थि‍ति हो तो बीजेपी को 3 से 5 सीटें मिल सकती है, लेकिन निचले स्तर तक की बात की जाए तो बीजेपी इस बार शून्य पर भी सिमट सकती है, क्योंकि उसकी नेमोम सीट फंसी हुई दिख रही है, जहां से उसे पिछली बार केरल के इतिहास में पहली विजय मिली थी.' 

बीजेपी के लिए क्या है खुश होने वाली बात 

केरल में बीजेपी इस बार कुल 115 सीटों पर चुनाव लड़ थी और उसने 25 सीटें एनडीए के सहयोगी दलों को दे रखी थीं. बीजेपी को जिन सीटों पर खास उम्मीद थी उनमें पलक्कड़, नेमोम, कझाकुट्टम, कोन्न‍ि, मंजेश्वर आदि शामिल थे, लेकिन उसे एक भी सीट नहीं मिली. 

हालांकि बीजेपी नेता इस बात पर खुश हो सकते हैं कि कई विधानसभाओं में उनका जनाधार लगातार बढ़ रहा है. साल 2016 के चुनाव में जहां 6 विधानसभा सीटों पर बीजेपी कैंडिडेट दूसरे स्थान पर आए थे. वहीं इस बार 9 विधानसभा सीटों पर बीजेपी कैंडिडेट दूसरे स्थान पर आए हैं.

वोट शेयर भी बढ़ा 

राज्य में भारतीय जनता पार्टी का वोट शेयर पिछले चुनावों में लगातार बढ़ता गया है. साल 2011 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 6.03 फीसदी, 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 10.85 फीसदी, साल 2016 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 10.6 फीसदी वोट मिले थे. यही नहीं, पिछले साल यानी 2020 में हुए पंचायत चुनावों में बीजेपी को करीब 17 फीसदी वोट मिले. इस बार विधानसभा चुनाव में बीजेपी को राज्य में बीजेपी को 11.30 फीसदी वोट मिले.   

एकमात्र सीट पर क्यों हार गई बीजेपी 

बीजेपी ने पिछली विधानसभा में जिस नेमोम सीट को जीतकर इतिहास रचा था. इस बार वह भी उसके हाथ से चली गई. उसकी इस हार प्रमुख वजह यह है कि इस बार यूडीएफ ने कांग्रेस के सांसद पी. मुरलीधरन के रूप में मजबूत कैंडिडेट उतारे थे​ जिन्होंने करीब 35 हजार वोट हासिल किए. बीजेपी कैंडिडेट मेघालय के पूर्व राज्यपाल के. राजशेखरन को पिछले विधायक ओ राजगोपाल के मुकाबले 15 हजार वोट कम मिले. एलडीएफ कैंडिडेट वी. शिवनकुट्टी को पिछली बार से कम वोट मिले, फिर भी वह विजयी हुए. 

ये बीजेपी के लिए सबसे ज्यादा प्रतिष्ठा वाली सीट है थी. पिछले यानी 2016 के विधानसभा चुनाव में नेमोम सीट राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी, जब भारतीय जनता पार्टी को यहां पहली बार जीत हासिल हुई. उसके स्टार कैंडिडेट और पूर्व केंद्रीय मंत्री ओ. राजगोपाल ने माकपा नेता सिवनकुट्टी और यूडीएफ कैंडिडेट पूर्व मंत्री वी सुरेंद्रन पिल्लई को हराकर सबको चौंका दिया था. यह केरल विधानसभा में बीजेपी की पहली जीत थी. 

कड़ी टक्कर देने के बावजूद हार गए श्रीधरन 

राज्य में बीजेपी के सबसे चर्चित कैंडिडेट 'मेट्र्रोमैन' ई. श्रीधरन ने अपनी पलक्कड़ सीट पर प्रतिद्वंद्वी को कड़ी टक्कर दी, इसके बावजूद वह चुनाव हार गए. वह फाइनल के एक घंटे पहले तक बढ़त बनाए हुए थे. इसी वजह से यूडीएफ के शफी पर​मबिल का इस बार जीत का मार्जिन सिर्फ 3859 वोटों का रहा, जबकि पिछली बार वह 17,483 वोटों से जीते थे. 

बीजेपी को श्रीधरन की प्रतिष्ठा और चेहरे की बदौलत यह सीट जीतने की उम्मीद थी. इस सीट पर गैर मलयाली लोगों की बड़ी संख्या है. बीजेपी को इस सीट पर खास उम्मीद इसलिए ​थी, क्योंकि पिछली बार यहां से बीजेपी कैंडिडेट दूसरे स्थान पर थे. हालांकि श्रीधरन के सामने खड़े मौजूदा विधायक 38 साल के शफी परमबिल काफी लोकप्रिय और फायरब्रांड नेता माने जाते हैं और सीपीएम के सीपी प्रमोद भी मजबूत कैंडिडेट थे, इसलिए श्रीधरन के लिए लड़ाई आसान नहीं थी. 

सबरीमाला इलाके में बीजेपी अध्यक्ष की हार 

केरल बीजेपी अध्यक्ष के सुरेंद्रन की हार भी पार्टी के लिए शर्मनाक रही है. वह सबरीमाला इलाके की सीट कोन्नि में तीसरे स्थान पर रहे. कोन्नि से जीतने वाले सीपीएम कैंडिडेट के यू जेनिश कुमार को 40 हजार से ज्यादा वोट मिले, जबकि सुरेंद्रन सिर्फ 20 हजार वोट हासिल कर पाए. यानी यह बीजेपी की प्रतीकात्मक हार भी है. यही नहीं सुरेंद्रन एक और सीट मंजेश्वर से भी लड़े थे और वहां से भी हार गए. पिछली बार मंजेश्वर सीट से कड़ी टक्कर में सुरेंद्रन सिर्फ 89 वोटों से हारे थे. इस बार उन्हें मुस्लिम लीग कैंडिडेट एकेएम अशरफ से 745 वोटों से हार मिली. 

 

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