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राज्यसभा और लोकसभा में आज खूब चला ‘शेरो-शायरी’ का दौर, जानें किसने क्या-क्या कहा

संसद में आज दोनों सदनों में शेरो-शायरी और कविताओं का दौर चला. राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने अपने विदाई भाषण का अंत शायरी से ही किया. वहीं लोकसभा में सुनीता दुग्गल और अखिलेश यादव ने भी शेरो-शायरी से अपनी बात कही. जानें और किस-किस ने क्या कहा...

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गुलाम नबी आजाद (Photo:File)
गुलाम नबी आजाद (Photo:File)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • राज्यसभा में सुनाई दिए राहत इंदौरी
  • लोकसभा में महिला सशक्तिकरण पर कविता
  • रमेश बिधूड़ी, रीता बहुगुणा ने भी कसीदे कढ़े

संसद में आज दोनों सदनों में शेरो-शायरी और कविताओं का दौर चला. राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने अपने विदाई भाषण का अंत शायरी से ही किया. वहीं लोकसभा में सुनीता दुग्गल और अखिलेश यादव ने भी शेरो-शायरी से अपनी बात कही.

एक शेर में पूरे भाषण जितनी ताकत
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने अपने विदाई समारोह पर खुद के भाषण की शुरुआत और अंत शेर से ही किया. अपने संबोधन की शुरुआत में ही उन्होंने कहा, ‘मेरा अनुभव 41 साल का है, अगर उस पर बोलने बैठा तो बहुत समय लग जाएगा. इसलिए शेरों में ही मैं अपनी बात रखूंगा. शायरों का एक गुण होता है कि जो बात हम लंबे-लंबे भाषणों में कहते हैं, वो एक-दो शेर में ही खत्म कर देते हैं.’

अपने भाषण के शुरुआत में उन्होंने शेर पढ़ा, ‘खून की मांग है इस देश की रक्षा के लिए, मेरे नजदीक की ये कुर्बानी बहुत छोटी है, दे दो.’
वहीं कश्मीर के हालातों को बयान करने के लिए उन्होंने शेर पढ़ा, ‘गुजर गया वो जो छोटा सा एक फसाना था, फूल थे, चमन था, आशियाना था, ना पूछ उजड़े नशेमन की दास्तां...’ ‘‘दिल ना उम्मीद तो नहीं, नाकाम ही तो है, लंबी है गम की शाम, शाम ही तो है’. उन्होंने कश्मीर में हालात सुधरने की उम्मीद भी जताई और एक शेर पढ़ा, ‘बदलेगा ना मेरे बाद भी मौजूं ए गुफ्तगू, मैं जा चुका होउंगा फिर भी तेरी महफिल में रहूंगा’.

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राहत इंदौरी भी सुनाई दिए
गुलाम नबी आजाद के साथ राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर के चार और सांसदों की विदाई हुई. इन्हीं में से एक पीडीपी के नेता नाजिर अहमद लवाय ने अपने विदाई भाषण की शुरुआत में ‘सारे जहां से अच्छा’ गीत की ‘परबत वो सबसे ऊंचा, हमसाया आसमां का, वो संतरी हमारा, वो पासबां हमारा’ पंक्तियों को पढ़ा. वहीं राहत इंदौरी का एक शेर ‘ये जो दस्तक है दिल के दरवाजे पर, अंदर कौन है आप तो अंदर हैं, बाहर कौन है’ पढ़ा.

‘तू खुद की खोज में निकल’
लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान बीजेपी सांसद सुनीता दुग्गल ने सरकार के महिला सशक्तिकरण के प्रयासों पर अपनी बात रखी. इस संदर्भ में उन्होंने तनवीर गाजी की यै पंक्तियां पढ़ीं, ’जो तुझ से लिपटी बेड़ियाँ समझ न इनको वस्त्र तू  ये बेड़ियां पिघाल के बना ले इनको शस्त्र तू बना ले इनको शस्त्र तू तू खुद की खोज में निकल'.

वहीं गरीबी हटाओ के कांग्रेस के नारे पर तंज कसते हुए उन्होंने एक और शेर पढ़ा , ‘सोचने से कहां मिलते हैं, तम्मनाओं के शहर, चलने की जिद भी जरुरी है मंजिल पाने के लिए’.

अपने भाषण के अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में एक शेर पढ़ा, ‘हर रोज गिरकर भी मुक्कमल खड़े हैं, ऐ जिंदगी देख मेरे हौसले तुझसे कितने बड़े हैं’.

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अखिलेश भी नहीं रहे पीछे
सुनीता दुग्गल के बाद लोकसभा में सपा नेता अखिलेश यादव बोलने के लिए खड़े हुए, उन्होंने सुनीता दुग्गल के शेर में ही अपनी दो लाइनें, ‘जब तक पिछला कर्तव्य लोग समझ पाए, एक तमाशा और खड़ा कर देता हूं’ जोड़ दी.

बिधूड़ी, रीता बहुगुणा ने भी कसीदे कढ़े
बीजेपी सांसद रमेश बिधूड़ी ने दुष्यंत कुमार की ‘हो गई है पीर पर्बत सी’ का रुपांतरण करके प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ में कसीदे कढ़े. वहीं रीता बहुगुणा जोशी ने नरेंद्र मोदी की तारीफ में कहा, ‘ राहें जुनून ए शौके में, बढ़ने तो दे कोई, मंजिल जगह-जगह ना बना दूं....’.

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