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पार्टी का घमासान संसद में कमजोर न कर दे आवाज, डैमेज कंट्रोल मोड में गांधी परिवार

कांग्रेस में मचे घमासन के बीच 14 सितंबर से संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने वाला है. ऐसी स्थिति में कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व यह नहीं चाहता कि पार्टी की एकता को खतरा हो या संसद में उनकी आवाज कमजोर पड़े. ऐसे में में माना जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान की ओर से डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू हो गई है.

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कपिल सिब्बल और गुलाम नबी आजाद कपिल सिब्बल और गुलाम नबी आजाद
स्टोरी हाइलाइट्स
  • गुलाम नबी आजाद राज्यसभा में विपक्ष के नेता हैं
  • आनंद शर्मा सदन में कांग्रेस की आवाज माने जाते हैं
  • कांग्रेस हाईकमान नाराज नेताओं को मनाने में जुटा

कोरोना संकट के बीच संसद का सत्र 14 सितंबर से शुरू होकर 1 अक्टूबर तक चलने की संभावना है. ऐसे में कांग्रेस के अंदर मची उथल-पुथल से पार्टी की आवाज सदन में कमजोर पड़ सकती है. यही वजह है कि कांग्रेस हाईकमान ने पार्टी के असंतुष्ट नेताओं को साधना शुरू कर दिया है ताकि पार्टी की एकता को बहाल किया जा सके और संसद में मोदी सरकार को दमदार तरीके से घेरा जा सके. 

कांग्रेस पार्टी आलाकमान ने असंतुष्ट गुट के नेता गुलाम नबी आजाद से मंगलवार को बात की. सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि सोनिया गांधी ने सोमवार को कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक के बाद गुलाब नबी आजाद के साथ टेलीफोन पर बातचीत की थी. पार्टी से जुड़े एक बडे़ नेता ने बताया कि असंतुष्ट गुट के विवादित पत्र लिखने के समय को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करने वाले राहुल गांधी ने भी गुलाम नबी आजाद को फोन किया था.

दरअसल, सोनिया गांधी को कांग्रेस नेतृत्व के बदलाव को लेकर कांग्रेस के 23 दिग्गज नेताओं की ओर से चिट्ठी लिखी गई थी, जिसे लेकर सोमवार को कार्यसमिति की बैठक में काफी आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए थे. यह चिट्टी कांग्रेस के ऐसे नेताओं द्वारा लिखी गई है, जो संसद के दोनों सदनों में पार्टी की आवाज माने जाते हैं. गुलाम नबी आजाद राज्यसभा में विपक्ष के नेता के साथ संसद में कांग्रेस की और से दमदार तरीके से सरकार को घेरने के लिए जाने जाते हैं.

गुलाम नबी आजाद ही नहीं बल्कि पत्र लिखने वाले नेताओं में आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा भी शामिल हैं, जो राज्यसभा सदस्य भी हैं. आनंद शर्मा और कपिल सिब्बल भी सदन में मोदी सरकार के खिलाफ काफी मजबूती से अपनी बात रखने के लिए जाने जाते हैं. वहीं, उच्चसदन की तरह लोकसभा में कांग्रेस की ओर से मोदी सरकार को घेरना का काम मनीष तिवारी और शशि थरूर जैसे नेता करते हैं. इन दोनों नेताओं का नाम भी सोनिया गांधी को पत्र लिखने वालों में शामिल है. 

कार्यसमिति की बैठक के दौरान कांग्रेस के कई सदस्यों ने चिट्ठी लिखने वाले नेताओं को बीजेपी के साथ मिलकर साजिश कर पार्टी को कमजोर करने के आरोप लगाया था. गुलाम नबी आजाद इन आरोपों से दुखी हैं और उन्होंने तब भी इसे बेबुनियाद बताते हुए इस्तीफे की पेशकश की थी. चिट्ठी लिखने वाले कपिल सिब्बल से लेकर आनंद शर्मा सहित दूसरे नेताओं ने भी इन आरोपों का खंडन किया था. 

कांग्रेस में मचे घमासन के बीच 14 सितंबर से संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है. ऐसी स्थिति में कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व यह नहीं चाहता कि पार्टी की एकता को खतरा हो या संसद में उनकी आवाज कमजोर पड़े. ऐसे में में माना जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान की ओर से डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू हो गई है. सोनिया और राहुल गांधी की ओर से गुलाम नबी आजाद को फोन करने को वरिष्ठ नेताओं और असंतुष्ट गुट को सुलह का संदेश भेजने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. 

 

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