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ST का दर्जा, क्या हिमाचल-कर्नाटक-छत्तीसगढ़ जैसे चुनावी राज्यों में बीजेपी को दिला पाएगा सफलता?

मोदी सरकार ने बुधवार को छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में कई जातियों को अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. बीजेपी को आगामी चुनाव में लाभ मिल सकता है. कर्नाटक में कुरुबा और हिमाचल में हट्टी समुदाय लंबे समय से एसटी श्रेणी में शामिल होने की मांग कर रहे थे.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में गोंड-कुरुबा-हट्टी जैसी जातियों को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है. कैबिनेट ने छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में कई जातियों को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. मोदी सरकार का यह कदम बीजेपी के लिए चुनावी राज्यों में मास्टर स्ट्रोक साबित हो सकता है, क्योंकि कर्नाटक और हिमाचल में यह मांग लंबे समय से की जा रही थी. 

देश के पांच राज्यों की 15 जातियों को केंद्र की मोदी सरकार ने अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल करने की मंजूरी दी गई है. इसी के साथ देश में अनुसूचित जनजातियों की संख्या 705 से बढ़कर 720 हो गई है. केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा और अनुराग ठाकुर ने कैबिनेट की बैठक के बाद मीडिया को बताया कि इस फैसले से हिमाचल प्रदेश के सिरमौर के ट्रांस-गिरी एरिया में बसे हट्टी समाज के लोगों को फायदा होगा. 

हिमाचल की तरह छत्तीसगढ़ में भारिया-धनगढ़ जैसे 12 समुदाय और तमिलनाडु की पहाड़ियों में रहने वाले वंचित समुदायों में से एक नारिकुरावन लाभांवित होंगे. ऐसे ही कर्नाटक की कुरुबा जैसी अतिपिछड़ी जाति को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मंजूरी दी है. यूपी के 13 जिलों में गोंड जाति की 5 उपजातियों- धुरिया, नायक, ओझा, पठारी और राजगोंड को भी अनुसूचित जनजाति में शामिल किया गया. 

मोदी सरकार ने यह फैसला ऐसे समय लिया है जब हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल काफी गर्म है. कर्नाटक और छत्तीसगढ़ में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में बीजेपी ने चुनावी राज्यों में अपने सियासी समीकरण को साधने के लिए बड़ा दांव चला है. कर्नाटक में कुरुबा और हिमाचल में हट्टी समाज काफी अहम हैं और लंबे समय से एससी श्रेणी में शामिल होने की डिमांड कर रहे थे. 

हिमाचल में बीजेपी का मास्टर स्ट्रोक

हिमाचल के सिरमौर जिले के ट्रांस-गिरी क्षेत्र के हट्टी समुदाय के लोग काफी समय से यह मांग कर रहे थे कि उन्हें अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया जाए. मोदी सरकार ने यह फैसला लिया है कि हट्टी समुदाय को एससी का दर्ज दिया जाए. सरकार के इस कदम से हिमाचल के सिरमौर जिले में हट्टी समुदाय के डेढ़ लाख से लोगों को लाभ मिलेगा. हट्टी वह समुदाय है, जो छोटे शहरों के बाजारों में फसल, सब्जियां, मांस और ऊन बेचकर अपना जीवन यापन करते हैं. हट्टी समुदाय के तहत भट्ट जैसी जातियां आती हैं. 

हट्टी समुदाय को जनजाति का दर्जा मिलने का बड़ा असर हिमाचल की सियासत पर भी पड़ सकता है. सिरमौर जिले के चार विधानसभा क्षेत्रों में शिलाई, पांवटा, साहिब, रेणुका और पच्छाद पर सियासी असर पड़ना तय माना जा रहा है. इसके अलावा राज्य की राजधानी शिमला सहित पांच अन्य विधानसभा सीटों नाहन, सोलन, शिमला, शिमला ग्रामीण और चौपाल में भी हट्टी समुदाय के लोग चुनावी जीत-हार में बड़ी भूमिका निभाते रहे हैं. सीएम जयराम ठाकुर इसे बीजेपी की उपलब्धि के तौर पर पेश कर रहे हैं. 

कर्नाटक में बीजेपी मिलेगा सियासी लाभ

मोदी सरकार ने कर्नाटक के कडू कुरुबा के पर्याय के रूप में बेट्टा-कुरुबा अतिपिछड़ी जाति को अनुसूचित जाति का दर्जा दिया. कुरुबा समुदाय कर्नाटक में चौथी सबसे बड़ा जाती समूह मानी जाती है. ये परंपरागत रुप से चरवाहे, भेड़/बकरी और पशूपालन का कार्य करते थे. कुरुबा समुदाय काफी लंबे समय से एसटी श्रेणी में शामिल होने की डिमांड कर रहा था, जिसे मोदी सरकार ने अब कैबिनेट से मंजूरी दी है. 

कर्नाटक में कुरुबा समुदाय की आबादी करीब 9.3 फीसदी है. राज्य में लिंगायत, वोक्कालिगा और मुसलमानों के बाद चौथी सबसे बड़ी जाति कुरुबा है. कर्नाटक में कांग्रेस के कोर वोटबैंक माने जाते हैं. कांग्रेस नेता व पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया इसी समुदाय से आते हैं. कुरुबा को एसटी कोटे में शामिल करने के फैसले को मोदी सरकार का बड़ा दांव माना जा रहा है. ये पूरे कर्नाटक में फैले हुए हैं. राजनीतिक तौर पर इन्हें बहुत ताकतवार तो कभी नहीं माना गया है, लेकिन सिद्धारमैया के चलते इनकी ताकत बढ़ी है. 

छत्तीसगढ़ में बीजेपी-कांग्रेस में क्रेडिट की होड़

मोदी सरकार ने छत्तीसगढ़ की 12 जाति समुदायों को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की स्वीकृति दे दी है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 11 फरवरी 2021 को प्रधानमंत्री मोदी को पत्र भेजकर छत्तीसगढ़ की इन विभिन्न जातियों को एसटी श्रेणी में शामिल करने का आग्रह किया था. इस तरह से मोदी सरकार ने भारियाभूमिया के तहत आने वाली भूईंया, भूईयां,भूयां नाम में बिना बदलाव किए भरिया के रूप में भारिया का सुधार किया गया है. पांडो के साथ पंडो, पण्डो, पन्डो धनवार के पर्याय के रूप में धनुहार और धनुवार है. इसके अलावा गदबा, गोंड के साथ गोंड़, कोंध के साथ कोंद, कोडाकू के साथ कोड़ाक. ऐसे ही नगेसिया, नागासिया के पर्याय के रूप में किसान. धांगड़ सावर, सवरा के पर्याय के रूप में सौंरा, संवरा और बिंझिया को शामिल किया गया है. 

छत्तीसगढ़ में ये तमाम जातियां अतिपिछड़े समुदाय में शामिल थी, जिनकी आबादी करीब 4 फीसदी है. विधानसभा चुनाव से पहले एसटी की श्रेणी में शामिल कर 12 जातियों को साधने का बड़ा दांव चला है. बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही क्रेडिट लेने की जुगत में है. बीजेपी इसे मोदी सरकार को श्रेय दे रही है तो कांग्रेस भूपेश बघेल को क्रेडिट दे रही है. ऐसे में देखना है कि इसका सियासी लाभ किसे मिलता है? 

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