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'कुल्हड़ की चाय पिया करो, देश की मिट्टी चूमने का अवसर मिलेगा...' चर्चा में झारखंड की पोस्ट ग्रेजुएट चायवाली

ग्रेजुएट चायवाली के बाद अब झारखंड के देवघर में पोस्ट ग्रेजुएट चायवाली का स्टाल शुरू हुआ है. इस स्टाल को चलाने वाली राधा का कहना है कि नौकरी जाने के बाद परेशानी आ गई थी कि अब क्या किया जाए. इसके बाद हौसला चुटाकर चाय का स्टाल लगाना शुरू कर दिया.

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पोस्ट ग्रेजुएट चायवाली राधा यादव.
पोस्ट ग्रेजुएट चायवाली राधा यादव.

एमबीए चायवाला, ग्रेजुएट चायवाली के बाद अब पोस्ट ग्रेजुएट चायवाली आ गई है. बाबा बैद्यनाथ की नगरी झारखंड के देवघर में पोस्ट ग्रेजुएट चायवाली के नाम से एक कॉलेज के सामने लगा टी स्टाल चर्चा में है. इस टी स्टाल के राधा यादव नाम की लड़की चला रही है. राधा का कहना है कि पहले नौकरी करती थी, लेकिन जॉब चली गई तो सोचा कि चाय का काम ही शुरू कर दूं.

रामा देवी बाजला महिला कॉलेज के सामने चाय की दुकान लगाने वाली राधा महीने में करीब 50 हजार रुपए का कर रही हैं. देवघर से 5 किलोमीटर दूर स्थित देवघर प्रखंड के कोठिया गांव की रहने वाली पोस्ट ग्रेजुएट राधा यादव 5 बहन और 1 भाई में सबसे बड़ी हैं. सभी भाई बहन पढ़ाई कर रहे हैं.

'कुल्हड़ की चाय पिया करो, देश की मिट्टी चूमने का अवसर मिलेगा...' पोस्ट ग्रेजुएट चायवाली
चाय की दुकान चलाने वाली राधा यादव.

घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए पहले राधा ने एक निजी संस्थान में काम शुरू किया. इसके बाद कोरोना काल में नौकरी चली चली गई. ऐसी परिस्थिति में राधा ने चाय की दुकान खोलने का फैसला किया. लेकिन शुरू में राधा असहज थी. फिर हौसला जुटाकर बाजला महिला कॉलेज के सामने चाय की दुकान खोल दी.

'कुल्हड़ की चाय पिया करो, देश की मिट्टी चूमने का अवसर मिलेगा...' पोस्ट ग्रेजुएट चायवाली

राधा का कहना है कि कॉलेज के सामने चाय की दुकान लगाएंगे तो कॉलेज की लड़कियां भी चाय पिएंगी. दुकान का नाम पोस्ट ग्रेजुएट चाय वाली रखा है. दुकान की टैगलाइन है 'कुल्हड़ की चाय पिया करो, इससे देश की मिट्टी चूमने का अवसर मिलेगा'. राधा ने बताया कि हर दिन 1500 से 1600 रुपए की चाय की बिक्री हो जाती है.

राधा के परिवार वालों में सिर्फ राधा की मां जानती हैं कि राधा चाय की दुकान लगा रही हैं. राधा चाय बेचकर अच्छी खासी इनकम कर अपना घर चला रही हैं. अपने भाई बहन को पढ़ा रही हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि राधा ने जो काम किया है, वो काबिले तारीफ है, क्योंकि कुछ लोग सोचते हैं कि ग्रेजुएट करके ये काम कैसे करेंगे.

रिपोर्टः शैलेंद्र मिश्रा

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