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संसद में उठा मथुरा के मंदिरों का मुद्दा, सरकार ने दिया ये जवाब

आज संसद में भी मथुरा और वृंदाव का मुद्दा उठाया गया. करौली-धौलपुर (राजस्थान) से बीजेपी सांसद डॉ. मनोज राजोरिया ने सवाल किया था कि सरकार काशी-मथुरा के मंदिरों के संरक्षण और विकास पर क्या कर रही है? उन्होंने यह भी पूछा कि मथुरा के स्मारकों और स्थलों के संरक्षण पर कितनी राशि व्यय की गई है और विकास के लिए सरकार क्या योजनाएं चला रही है.

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संसद में उठाया गया मथुरा के मंदिरों का मुद्दा संसद में उठाया गया मथुरा के मंदिरों का मुद्दा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • विकास का काम प्रसाद स्कीम के तहत किया जा रहा है
  • टूरिस्ट सर्किट पर 10.38 करोड़ रुपये खर्च

इस महीने की शुरुआत में ही केशव प्रसाद मौर्य ने ट्वीट कर कहा था- 'अयोध्या और काशी में भव्य मंदिर निर्माण जारी है और मथुरा की तैयारी है'. केशव प्रसाद मौर्य के बयान से साफ हो गया था कि बीजेपी एक बार फिर अयोध्या-मथुरा-काशी के एजेंडे पर ही चुनाव लड़ना चाहती है. तभी से मथुरा का मुद्दा चुनावों के लिहाज से काफी अहम है. मथुरा को लेकर एक के बाद एक नई बातें सामने आ रही हैं.

संसद में उठा मथुरा का मुद्दा

आज संसद में भी मथुरा और वृंदावन का मुद्दा उठाया गया. करौली-धौलपुर (राजस्थान) से बीजेपी सांसद डॉ. मनोज राजोरिया ने सवाल किया था कि भारत के मंदिरों पर पूर्व में विदेशी आक्रांताएं हुईं. काशी और मथुरा के मंदिरों को भी मिटाने की कोशिश की गई थी. ऐसे में सरकार काशी-मथुरा के मंदिरों के संरक्षण और विकास पर क्या कर रही है? उन्होंने यह भी पूछा कि मथुरा के स्मारकों और स्थलों के संरक्षण पर कितनी राशी व्यय की गई है और विकास के लिए सरकार क्या योजनाएं चला रही है.

विदेश और संस्कृति राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी का कहना है कि मथुरा-वृंदावन में विकास का काम प्रसाद स्कीम के तहत किया जा रहा है. मथुरा-व मथुरा-वृंदावन के टूरिस्ट सर्किट पर 10.38 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेंटर पर 9.36 करोड़ रुपये खर्चा किए गए हैं. गोवर्धन के लिए, मथुरा पर 21.87 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. वहीं, वाराणसी के लिए 6.32 करोड़ रुपये और क्रूज़ के लिए 8.57 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे सभी तीर्थ स्थानों पर विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है. 

बता दें कि ‘तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक विरासत संवर्द्धन अभियान’ (प्रसाद) योजना एक केंद्रीय योजना है जो देश भर में तीर्थ स्थलों की पहचान करने और विकसित करने पर केंद्रित है. पर्यटन मंत्रालय के तहत भारत सरकार ने 2014-15 में प्रसाद स्कीन की शुरुआत की थी. 

मथुरा इसलिए भी अहम है क्योंकि मथुरा का ममला भी अयोध्या से काफी मिलता जुलता है. फर्क़ सिर्फ इतना है कि अयोध्या राम जन्मभूमि है और मथुरा श्री कृष्ण जन्मभूमि. दावा किया जाता है कि मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद जिस जमीन के ऊपर बनाई गई है, उसके नीचे ही कृष्ण जन्मभूमि है. मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर तोड़कर यहां मस्जिद का निर्माण कराया था. 

हेमा मालिनी ने भी की मंदिर निर्माण की मांग

कल ही इंदौर में एक कार्यक्रम में, मथुरा की सांसद हेमा मालिनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मथुरा को भी भव्य तीर्थस्थल के रूप में विकसित करने की मांग कर दी. उन्होंने कहा कि अयोध्या और काशी के बाद मथुरा का उत्थान जरूरी है. मथुरा प्रेम और स्नेह का प्रतीक है, यहां भी भगवान कृष्ण के भव्य मंदिर का निर्माण होना चाहिए. 

योगी आदित्यनाथ लड़ सकते हैं मथुरा से चुनाव

मथुरा को लेकर उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार खासी उत्साहित है. कल ही यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ भी मथुरा पहुंचे थे. कयास लगाए जा रहे हैं कि योगी आदित्यनाथ मथुरा से चुनाव लड़ेंगे. हालांकि जब उनसे यह सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, 'यहां से चुनाव लड़ने का मेरा कोई कार्यक्रम नहीं है. पार्टी जहां से मुझे कहेगी, वहां से हम चुनाव लड़ेंगे.'

क्या है मथुरा श्रीकृष्ण जन्मस्थान का मामला

बता दें कि मथुरा श्री कृष्ण विराजमान वाद मथुरा कोर्ट में 25 सितंबर 2020 को दाखिल हुआ था. यह कुल 13.37 एकड़ भूमि के मालिकाना हक का विवाद है, जिसमें से 10.9 एकड भूमि श्रीकृष्ण जन्मस्थान के पास है, जबकि 2.5 एकड़ भूमि शाही ईदगाह मस्जिद के पास है. याचिका दाखिल होने के बाद अदालत ने 4 संस्थाओं को नोटिस दिया, जिनमें श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान, श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट, शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी और उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल बोर्ड शामिल हैं.

इस मामले में अब तक कुल 6 वाद दायर किए जा चुके हैं, जो जिला जज के न्यायालय में विचाराधीन हैं. वाद में श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर बने पहले मन्दिर से अंतिम मंदिर के बनने का इतिहास बताया गया है. साथ ही कहा गया है कि सन 1618 में राजा वीर सिंह देव बुंदेला ने 33 लाख से श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर प्रथम मन्दिर बनवाया था. वाद में यह भी कहा गया है कि औरंगजेब द्वारा मन्दिर को तोड़कर जन्मस्थान की भूमि पर शाही मस्जिद ईदगाह का निर्माण कराया गया था.


 

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