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पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर बोले धर्मेंद्र प्रधान- वित्त मंत्री ने सही कहा, धर्म संकट का विषय

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ये सच है कि राज्य और केंद्र पेट्रोलियम पदार्थों पर टैक्स लगाते हैं. वित्त मंत्री ने सही कहा है कि यह धर्म संकट का विषय है. पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में हमने इस बार 34 प्रतिशत ज्यादा खर्च किया है.

पेट्रोल के बढ़ते दामों को लेकर धर्मेंद्र प्रधान ने दी सफाई (फाइल फोटो) पेट्रोल के बढ़ते दामों को लेकर धर्मेंद्र प्रधान ने दी सफाई (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर बोले धर्मेंद्र प्रधान
  • कोरोना की वजह से देश के सामने चुनौती
  • अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही अनदेखी

पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान पर हैं. कई शहरों में पेट्रोल का भाव 100 रुपये प्रति लीटर से अधिक जा पहुंचा है. इस बीच केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आजतक से बात करते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों से रेट नहीं बढ़ा है. चुनाव के समय रेट क्यों नहीं बढ़ता है? इस सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इसके दो कारण हैं. कोरोना के कारण देश की अर्थव्यवस्था ठप्प हो गई. इस वजह से डिमांड और सप्लाई में बड़ा अंतर आ गया है. उत्पादन करने वाले देश उपभोग करने वाले देश के हितों का ख्याल नहीं रखते हैं. इसकी हमलोगों ने खुलकर आलोचना की है. उनकी अर्थनीति को ठीक करने के लिए कच्चे तेल की कीमत 60-65 डॉलर की ओर ले जाना चाहते हैं. ये हमें मंजूर नहीं है. 

दूसरे कारण की चर्चा करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ये सच है कि राज्य और केंद्र पेट्रोलियम पदार्थों पर टैक्स लगाते हैं. वित्त मंत्री ने सही कहा है कि यह धर्म संकट का विषय है. पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में हमने इस बार 34 प्रतिशत ज्यादा खर्च किया है. क्योंकि लोगों को रोजगार आदि देने की चुनौती सामने है. यह भारत देश ही है जो लोगों को मुफ्त में कोरोना का टीका दे रहा है. यह पीएम मोदी की योजना है. कृषि क्षेत्र हो, शिक्षा क्षेत्र हो, हर घर में नल में पानी योजना की शुरुआत भी हमारी सरकार ने शुरू किया है. विकास के काम के लिए संसाधन की आवश्यकता होती है. इसमें कोई संदेह नहीं है. बाकी ममता बनर्जी गैस के दाम को लेकर बेवजह हो हल्ला मचा रही हैं. 

उन्होंने कहा कि जनवरी 2020 और जनवरी 2021 की तुलना करें तो बंगाल में 12 प्रतिशत की एलपीजी की ग्रोथ हुई है. 2014 में बंगाल में एक करोड़ से कम लोगों के पास एलपीजी कनेक्शन हुआ करता था. आज यह आंकड़ा बढ़कर दो करोड़ 40 लाख हो गया है. यह पीएम मोदी की विचारधारा है, सबका साथ सबका विकास. हमने किसी जाति या धर्म देखकर विकास नहीं किया है. गरीबों के लिए किया है. व्यवस्था सबके लिए होती है. जो थोड़ी बहुत महंगाई है वो अंतर्राष्ट्रीय मामला है, कोरोना की चपेट में दुनिया आई थी. भारत तेजी से रिवाइव कर रहा है. दुनिया भारत के इस मॉडल की प्रशंसा कर रही है. हम चीजों को संभाल लेंगे. 

वहीं एलपीजी सब्सिडी को लेकर उन्होंने कहा कि यह आज भी दूर दराज के लोगों को मिल रही है. इसकी व्यवस्था आज भी लागू है. इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती के सवाल पर कहा था कि वह देश के उपभोक्ताओं की जरूरत को समझती हैं, लेकिन इस मामले में सरकार के सामने 'धर्मसंकट की हालत' है. उन्होंने कहा कि कई ऐसे संकेत मिल रहे हैं जिनसे यह बात पुख्ता होती है कि अर्थव्यवस्था में सुधार हो रहा है.  

उन्होंने कहा कि इस समय अर्थव्यवस्था की हालत की बात करें तो इसके कई पहलू दिख रहे हैं. उन्होंने कहा, 'मैं कई पक्षों से बात कर रही हूं. ज्यादातर उद्योगपतियों ने कहा कि अब कारखाने पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं और वे अब विस्तार करने पर विचार कर रहे हैं.' 

वित्त मंत्री ने कहा कि अब भर्तियों में सुधार हो रहा है. आईआईटी और आईआईएम का भी कहना है कि भर्ती में तेजी आई है, नौकरियों के बाजार में सुधार हो रहा है. उन्होंने कहा कि प्रवासी मजदूर वापस काम पर लौट रहे हैं, इससे भी अर्थव्यवस्था में सुधार का संकेत मिल रहा है. उन्होंने कहा कि बैंक अब होम लोन दरों में कटौती कर रहे हैं.  

 

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