scorecardresearch
 

इतिहास गवाह है, गठबंधन की सरकारों ने लिए दमदार फैसले... नरसिम्हा राव, वाजपेयी और मनमोहन ने पेश की है मिसाल

भारत में कई ऐसे प्रधानमंत्री हुए हैं, जिन्होंने अल्पमत में रहते हुए भी देश की दशा और दिशा बदलने वाले कई बड़े फैसले लिए हैं, साथ ही अपना पांच साल का कार्यकाल भी पूरा किया है.

Advertisement
X
Indian Pms
Indian Pms

10 जून 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शपथ लेकर इतिहास रच दिया, लगातार तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बनने वाले वे देश के दूसरे नेता बन गए हैं. इससे पहले अनवरत तीन बार (1952,1957,1962) निर्वाचित होकर जवाहर लाल नेहरू प्रधानमंत्री बने थे. लेकिन इस बार की सरकार 2014 या 2019 की तरह नहीं है, इस लोकसभा चुनाव में देश की जनता ने किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं दिया है. भारतीय जनता पार्टी 240 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी जरूर है, लेकिन बहुमत के आंकड़े से 32 कदम दूर है. इसलिए इस बार सरकार सहयोगी दलों के समर्थन से बनी है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बड़े फैसले लेने के लिए जाने जाते हैं, उन्होंने 2014 से 2024 तक कई अभूतपूर्व निर्णय लिए हैं. लेकिन तब हालात अलग थे, क्योंकि जनता ने भाजपा को पूर्ण जनादेश दिया था. साल 2014 की अगर बात करें तो अकेले भाजपा को 282 सीटें आई थीं, वहीं 2019 में देश के मतदाताओं ने केंद्रीय नेतृत्व पर और भरोसा जताया, जिस वजह से बीजेपी 300 पार पहुंच गई. उस लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 303 सीटों पर जीत हासिल की थी.

2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिली 240 सीटों की वजह से इस बार सरकार का गठन, गठबंधन के सहयोग से हुआ है. जिस वजह से निरंतर एक स्वर सुनाई दे रहा है कि क्या सरकार कोई बड़ा फैसला ले पाएगी या उसे हर बार फैसला संकोच के साथ लेना होगा.

Advertisement

लेकिन एक सच ये भी है कि भारत में कई ऐसे प्रधानमंत्री हुए हैं, जिन्होंने अल्पमत में रहते हुए भी देश की दशा और दिशा बदलने वाले कई बड़े फैसले लिए हैं, साथ ही अपना पांच साल का कार्यकाल भी पूरा किया है.

पी.वी नरसिम्हा राव
साल 1991 देश में लोकसभा के चुनाव हुए, जब नतीजे आए तो कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, लेकिन उसे बहुमत नहीं मिली थी, पी.वी नरसिम्हा राव अल्पमत सरकार के प्रधानमंत्री बन गए, जिन्हें बाद में कुछ दलों का बाहर से समर्थन मिला. 1991 में भारत की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई थी और जनवरी 1991 में तो भारत के पास महज 89 करोड़ डॉलर विदेशी मुद्रा थी, जो लगभग दो सप्ताह के आयात के लिए ही पर्याप्त थी. उसके बाद पी.वी नरसिम्हा राव ने बहुत बड़ा फैसला लिया 21 जुलाई 1991 को सरकार का बजट आया, जिसमें नई आर्थिक नीतियों को लागू कर भारत की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से खोल दिया गया. यहीं से देश में उदारीकरण की शुरुआत हुई. इस ऐतिहासिक बजट को तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने पेश किया था. 

अटल बिहारी वाजपेयी
1998 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को सबसे ज्यादा 182 सीटें मिलीं थी, उसके बाद ऑल इण्डिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK), शिवसेना समेत कुछ और पार्टियां साथ आईं जिसके बाद भारतीय राजनीति के आकाश में एनडीए गठबंधन का उदय हुआ और वाजपेयी देश के दूसरी बार प्रधानमंत्री बन गए. संसद में बहुमत हासिल करने के महज कुछ दिनों बाद ही 11 मई 1998 को तमाम दबाव के बावजूद पोखरण में परमाणु परीक्षण सफलतापूर्वक कर दिया गया. हालांकि ये सरकार एआइएडीएमके (AIADMK) के समर्थन वापस लेने से एक वोट से गिर गई थी.

Advertisement

फिर साल 1999 में नए सिरे से सरकार का गठन हुआ वाजपेयी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने और उनकी सरकार ने कई बड़े निर्णय लिए. जिस जातिवार जनगणना को मंजूरी एचडी देवगौड़ा की सरकार ने दी थी, उसपर वाजपेयी सरकार ने रोक लगा दी थी, साथ ही वाजपेयी ने पुरानी पेंशन स्कीम को भी 2004 में बंद कर दिया था.

मनमोहन सिंह 2004 से 2014
2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 145 सीटों पर जीत मिली थी और संयुक्त प्रगतिशील गठबन्धन (UPA) के सहयोग से मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री की कु्र्सी पर आसीन हुए. उन्होंने भी खाद्य सुरक्षा, मनरेगा, भूमि अधिग्रहण कानून जैसे कई बड़े कदम उठाए. इसके साथ ही डॉ मनमोहन सिंह की गठबंधन सरकार ने ही साल 2008 में अमेरिका के साथ सिविल न्यूक्लियर डील पर हस्ताक्षर किया था. जो एक बड़ा और एतिहासिक फैसला था.

(रिपोर्ट: व्यंकटेश पांडेय)

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement