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बजट सत्र: प्रश्नकाल बहाल, दोनों सदनों में सवाल पूछ सकेंगे सांसद

29 जनवरी से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र में प्रश्न काल को बहाल कर दिया गया है. राज्यसभा में सुबह 9 बजे से 10 बजे तक तो लोकसभा में शाम 4 बजे से 5 बजे तक प्रश्न काल होगा. लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी जानकारी दी. 

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कोरोना वायरस संक्रमण के मद्देनजर संसद का शीतकालीन सत्र नहीं बुलाया गया था. (फाइल फोटो)
कोरोना वायरस संक्रमण के मद्देनजर संसद का शीतकालीन सत्र नहीं बुलाया गया था. (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • राज्यसभा में सुबह 9 बजे से 10 बजे तक होगा प्रश्नकाल
  • सत्र में शामिल होने से पहले संसदों से कोरोना जांच की अपील
  • संसद की कैंटीन से खत्म की गई सब्सिडी

29 जनवरी से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र में प्रश्न काल को बहाल कर दिया गया है. राज्यसभा में सुबह 9 बजे से 10 बजे तक तो लोकसभा में शाम 4 बजे से 5 बजे तक प्रश्न काल होगा. लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी जानकारी दी. ओम बिड़ला ने बताया कि कोरोना महामारी के बाद बजट सत्र 29 जनवरी से शुरू होगा. राज्यसभा सत्र की कार्यवाही सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलेगी. जबकि लोकसभा की कार्यवाही का समय शाम 4 बजे से रात के 9 बजे तक होगा.

उन्होंने बताया कि संसद की कैंटीन से फूड सब्सिडी हटा दी गई है. इसे लेकर बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (बीएसी) की बैठक में सभी सांसदों ने चर्चा की थी. सब्सिडी हटाए जाने से सालाना 17 करोड़ रुपये की बचत होगी. इसके अलावा सांसदों से सत्र में शामिल होने से पहले कोरोना की आरटी-पीसीआर जांच कराने का अनुरोध किया गया है.

गौरतलब है कि कोरोना वायरस संक्रमण के मद्देनजर संसद का शीतकालीन सत्र नहीं बुलाया गया था. केंद्र सरकार की तरफ से दलील दी गई थी कि कोरोना के बढ़ते मामले के मद्देनजर यह फैसला लिया गया. इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने काफी विरोध किया था और सरकार पर भागने का आरोप लगाया था. विपक्ष का कहना था कि सरकार किसानों के मुद्दे और अन्य विषयों पर चर्चा करने से भाग रही है.

क्या होता है प्रश्नकाल

लोकसभा की बैठक का पहला घंटा सवाल पूछने के लिए रखा जाता है जिसे प्रश्नकाल का नाम दिया गया है. राज्यसभा के लिए भी यह समय एक घंटे का ही होता है. इस दौरान सरकार के कामकाजों को लेकर सवाल किए जाते हैं. सवाल के बाद मंत्री अपनी बारी में प्रश्नों का जवाब देते हैं. कोरोना काल में दोनों सदनों की कार्यवाही में प्रश्नकाल हटा लिया गया था जिसके बाद विपक्ष ने इसपर सवाल उठाए थे. विपक्ष के नेताओं ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया था.

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प्रश्नकाल में पूछे जाने वाले सवाल तीन तरह के होते हैं. तारांकित, अतारांकित और अल्प सूचना. तारांकित सवालों के जवाब मौखिक तौर पर दिए जाते हैं. इस दौरान क्रॉस क्वेश्चन भी पूछे जा सकते हैं. आतारांकित प्रश्नों के सवाल का जवाब लिखित तौर पर संसद में पेश करना होता है. इस सवाल के लिए एक शर्त यह होती है कि सवाल कम से कम 10 दिन पहले भेजने होते हैं. जिससे की संबंधित शख्स उससे जुड़ी जानकारियां जुटा सके. अल्प सूचना एक किस्म का अर्जेंट सवाल होता है. यह दस दिन से कम के समय में भी पूछा जा सकता है. इसके मौखिक उत्तर दिए जा सकते हैं. साथ ही यह भी पूछा जा सकता है कि कम समय के नोटिस में यह सवाल क्यों उठाया गया.

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