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'जो रजाकर थे पाकिस्तान भागे, जो वफादार हैं वे मोदी से आंख मिलाकर बात कर रहे हैं,' ओवैसी

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि जो रजाकर थे वो पाकिस्तान भाग गए, जो वफादार हैं वो मोदी से आंख मिलाने की हिम्मत करते हैं. उन्होंने कहा कि एआईएमआईएम ने इसे एकता दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है. हैदराबाद के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जिन लोगों को पसीना भी नहीं आया, वे इसे मुक्ति दिवस के रूप में मनाना चाहते हैं.

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AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी. AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी.

हैदराबाद रिसायत के भारत में विलय के 75 साल पूरे होने जा रहे हैं. इस मौके पर केंद्र सरकार और विपक्ष आमने-सामने है. केंद्र सरकार ने 17 सितंबर को  'लिबरेशन डे' मनाने का फैसला किया तो तेलंगाना में सत्तारूढ़ टीआरएस ने 'नेशनल इंटीग्रेशन डे' मनाने का ऐलान किया है. अब इस विवाद में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी कूद गए हैं. उन्होंने केंद्र सरकार पर जबरदस्त हमला किया है और एकता दिवस के रूप में मनाने की अपील की है.

ओवैसी ने कहा कि जो रजाकर थे वो पाकिस्तान भाग गए, जो वफादार हैं वो मोदी से आंख मिलाने की हिम्मत करते हैं. उन्होंने कहा कि एआईएमआईएम ने इसे एकता दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है. हैदराबाद के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जिन लोगों को पसीना भी नहीं आया, वे इसे मुक्ति दिवस (Liberation day) के रूप में मनाना चाहते हैं. 

रिजवी से कोई संबंध नहीं

ओवैसी ने आगे कहा- इसे मुक्ति दिवस (Liberation day) के रूप में मनाने वाले झूठे हैं. उन्होंने कहा- मैं गोडसे की पूजा करने वालों को बताना चाहता हूं, जब हैदराबाद भारत का हिस्सा बना, तो सभी खुश थे. अपना चेकअप कराएं. उन्होंने कहा- कासिम रजवी से हमारा कोई संबंध नहीं है.

केंद्र सरकार मुक्ति दिवस मना रही है

बता दें कि हैदराबाद रियासत के भारत में विलय की 75वीं वर्षगांठ पर केंद्र सरकार सालभर कार्यक्रम आयोजित करने जा रही है. इसके साथ ही 17 सितंबर को मुक्ति दिवस के रूप में मनाए जाने का फैसला लिया गया है. वहीं, केसीआर सरकार ने 3 दिन का 'तेलंगाना नेशनल इंटीग्रेशन डे' मनाने का फैसला किया है. 

तेलंगाना सरकार ने 'नेशनल इंटीग्रेशन डे' मनाने का फैसला लिया

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के नेतृत्व में राज्य कैबिनेट ने 16, 17 और 18 सितंबर को 'नेशनल इंटीग्रेशन डे' मनाने का फैसला किया है. इस कार्यक्रम को एक बड़े उत्सव की तरह मनाया जाएगा. इस संबंध में तेलंगाना मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से बयान जारी कर कहा गया है कि तेलंगाना के समाज ने राजतंत्र से लोकतंत्र का लंबा सफर तय किया है और 17 सितंबर 2022 को इसके 75 साल पूरे होने जा रहे हैं. ऐसे में हम 17 सितंबर 2022 को 'तेलंगाना नेशनल इंटीग्रेशन डे' के तौर पर मनाने जा रहे हैं.

कौन थे रजाकर

रजाकर एक निजी सेना थी, जो हैदराबाद में निजाम के शासन को बनाए रखने और हैदराबाद स्टेट को भारत में विलय का विरोध करने के लिए तैयार की गई थी. इस सेना को कासिम रिजवी हैंडल करता था. कासिम रिजवी इत्तिहाद-ए-मुस्लिमीन नाम का संगठन चलाता था और कट्टरपंथ का रास्ता चुन रखा था. इसने 2 लाख रजाकरों की सेना बना रखी थी. रजाकरों ने गैर-मुस्लिम इलाकों में हमले शुरू कर दिए और हैदराबाद की आजादी के लिए अभियान चलाने लगे. इन सभी अत्याचारों पर निजाम उस्मान अली ने आंखें मूंद रखी थीं. आगे चलकर निजाम के रूख में और सख्ती आ गई. पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना खुलकर निजाम के साथ आ चुके थे. हैदराबाद से आ रही हिंसा की खबरों से पटेल चिंतित थे. देशभर में सरकार की इस बात के लिए आलोचना हो रही थी कि सरकार हैदराबाद से नरमी से पेश आ रही है.

 

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