ममता बनर्जी का जन्म 5 जनवरी 1955 को कोलकाता के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ.
ममता ने छात्र जीवन के शुरुआती दिनों से ही राजनीति में दिलचस्पी लेनी शुरु कर दी थी और 1970 के दशक में वो कांग्रेस की सक्रिय कार्यकर्ता बन गई.
1976 में ममता बंगाल महिला कांग्रेस की महासचिव बन गई थीं. जयप्रकाश नारायण की कार के बोनट पर कूदकर ममता सुर्खियों में आई और उसके बाद से बंगाल की राजनीति में अपना स्थान बनाती चली गईं.
कांग्रेस से अलग होकर ममता ने 1 जनवरी, 1998 को अपनी पार्टी आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का गठन किया और 1999 में एनडीए की गठबंधन सरकार में वो रेलमंत्री रहीं.
अमित मित्रा, मनीष गुप्ता, सुब्रत मुखर्जी, अब्दुल करीम चौधरी, उपेंद्र नाथ विश्वास, जावेद खान ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार में मंत्री के तौर पर शपथ ली.
शपथ ग्रहण समारोह में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी नेता तथा पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्या भी मौजूद थे.
ममता बनर्जी अपने उग्र स्वभाव के चलते काफी विवादों में भी रहीं. 1996 में उन्होंने अलीपुर में एक रैली के दौरान अपने गले में काली शॉल से खुद को फांसी लगाने की धमकी भी दी.
जुलाई 1996 में पेट्रोल की कीमतें बढ़ाने के विरोध में ममता सरकार का हिस्सा रहते हुए भी लोकसभा के पटल पर ही विरोध में ज़मीन पर बैठ गई थीं.
फरवरी, 1997 में रेल बजट पेश होने के दौरान ममता ने रेलमंत्री रामविलास पासवान पर अपनी शॉल फेंककर बंगाल की अनदेखी के विरोध में अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी थी.
11 दिसंबर 1998 को ममता ने समाजवादी पार्टी के सांसद दरोगा प्रसाद सरोज को महिला आरक्षण बिल का विरोध करने पर कॉलर पकड़कर संसद के बाहर खींच लिया था.
991 में राव सरकार में ममता मानव संसाधन विकास, खेल ओर युवा कल्याण तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री भी रहीं.
1989 में कांग्रेस विरोधी माहौल में ममता सांसद का चुनाव हार गई लेकिन 1991 के आमचुनावों में उन्होंने दक्षिण कलकत्ता सीट से जीत दर्ज की.
1984 के चुनाव में जादवपुर सीट से सोमनाथ चटर्जी को हराकर ममता बनर्जी ने सबसे युवा सांसद बनने का इतिहास रचा.
ममता को 18 साल पहले राइटर्स बिल्डिंग में सीएम दफ्तर से धक्का मारकर बाहर निकाला गया था.
आज मुख्यमंत्री बनने के बाद ममता बनर्जी ने अपनी 18 साल पुरानी एक प्रतिज्ञा को पूरी कर ली है. राइटर्स बिल्डिंग की सीढ़ियां चढ़ कर उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा पूरी कर ली है.
पश्चिम बंगाल के इतिहास में पहली बार है कि मुख्यमंत्री राजभवन से मुख्यमंत्री कार्यालय तक पैदल जाएंगे.
अपनी जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए ममता ने कहा था, 'यह बंगाल की दूसरी आज़ादी है. यह मां, माटी और मानुष की जीत है. यह लोकतंत्र की जीत है.
तृणमूल कांग्रेस की मंत्रियों की सूची में अमित मित्रा, पार्थ चटर्जी, मनीष गुप्ता, सुब्रत मुखर्जी, अब्दुल करीम चौधरी, साधन पांडेय, उपेन विश्वास, सावित्री मित्रा, मदन मित्रा और नूर आलम चौधरी शामिल हैं.
ममता के पक्ष में चुनावी लहर को इस बात से समझा जा सकता है कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे बुद्धदेव भट्टाचार्य तक अपनी सीट नहीं बचा सके.
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस-कांग्रेस गठबंधन ने 294 में से 228 विधानसभा सीटों पर कब्जा जमाया.
पिछले 34 सालों से सत्ता पर काबिज रही लेफ्ट सरकार को ममता बनर्जी ने 2011 के विधानसभा चुनावों में उखाड़ फेंका.
पश्चिम बंगाल में 34 साल बाद वामपंथी सरकार को हराकर तृणमूल कांग्रेस सत्तारूढ़ हो रही है. इसके साथ कांग्रेस का भी गठबंधन है.
शपथ ग्रहण समारोह के बाद राजभवन से लेकर राइटर्स बिल्डिंग तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मार्च करेंगी.
ममता बनर्जी ने आज शाम चार बजे कोलकाता के राइटर्स बिल्डिंग में नई कैबिनेट की पहली बैठक बुलाई है.
तृणमूल कांग्रेस के 35 विधायकों और कांग्रेस के कोटे से 7 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली.
तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने इससे पहले गुरुवार को ही रेलमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था.
इसके साथ ही ममता राज्य की 11 वीं और पहली महिला मुख्यमंत्री बन गईं.
शपथ राज्यपाल एमके नारायणन ने दिलाई. ममता ने बांग्ला में शपथ ग्रहण की.
ममता ने शुक्रवार की दोपहर दोपहर एक बजे एक मिनट पर मुख्यमंत्री के तौर पर पद और गोपनीयता की शपथ ली.
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की पश्चिम बंगाल की नई मुख्यमंत्री के तौर पर आज ताजपोशी हो गई.