बंटवारे के बाद पाकिस्तान को मिलने वाली राशि पर नेहरु और पटेल अपने सहयोगियों के साथ विमर्श करते हुए.
जिन्ना की जिद ने पाकिस्तान तो बना लिया लेकिन कुछ इतिहासकारों के अनुसार बाद में जिन्ना भी अपने निर्णय पर काफी दु:खी रहते थे.
सरदार पटेल, पंडित नेहरु, माउंटबेटेन और जिन्ना बंटवारे के बाद सत्ता के हस्तांतरण पर विचार करते हुए.
पंडित नेहरू के साथ मोहम्मद अली जिन्ना. जिन्ना के विषय में कहा जाता है कि वह कट्टर मुस्लिम नहीं थे.
कांग्रेस का एक बहुत बड़ा धड़ा पंडित नेहरु के साथ था. यही कारण है कि बंटवारे के मसले पर अधिकांश ने नेहरु का साथ दिया.
एक बैठक के दौरान महात्मा गांधी के साथ पंडित जवाहर लाल नेहरु.
युवा मोहम्मद अली जिन्ना. मोहम्मद जिन्ना की पहली शादी काफी कम उम्र में हो गई थी जिससे वो फिर कभी नहीं मिल सके. दूसरी शादी 42 वर्ष की उम्र में हुई.
पंडित जवाहर लाल नेहरु के साथ मोहम्मद अली जिन्ना. वैचारिक मतभेद इस कदर बढ़ा कि देश का बंटवारा हो गया. इस देश पर मुसलमानों ने अंग्रेजों से अधिक समय तक राज किया लेकिन उनकी स्थिति से जिन्ना नाखुश थे.
बंटवारे के समय काफी संख्या में लोग विभाजित भारत के एक तरफ से दूसरी तरफ जा रहे थे. पश्चिमी पंबाज की स्थिति तो और भी दयनीय थी. वहां से आने वाली ट्रेन भरी हुई रहती थी.
बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आए रिफ्यूजियों ने दिल्ली के पुराना किला में अपना कैंप.
बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आते शरणार्थी. भारत के विभाजन के बाद पाकिस्तान से आने वाले हिन्दुओं का सिलसिला काफी समय तक चलते रहा. यह सदी का सबसे बड़ा आदमियों का आदान प्रदान था.