हमारी संस्कृति के मंथन से हर 6 साल बाद कुंभ रूपी अमृत निकलता है. संपूर्ण मानवता का संगम कुंभ में दिखता है. कुंभ में एक बार के स्नान से आपाधापी भरी जिंदगी की थकान दूर हो जाती है और इंसान फिर से ऊर्जा से युक्त हो जाता है.
कुंभ ही वह स्थल है जहां पर नागा साधुओं के दर्शन होते हैं. भस्म में लिपटे, पूरी तरह से नग्न, ऊर्जावान नागा साधु कुंभ के सबसे बड़े आकर्षण होते हैं. मान्यता के अनुसार, आदि शंकराचार्य ने हिंदू धर्म की रक्षा के लिए साधुओं का क्रम तय किया था. नागा यानी पहाड़ों पर रहने वाले ये साधु शस्त्र और शास्त्र दोनों में ही पारंगत होते हैं.
इंडिया टुडे के ग्रुप फोटो एडिटर बंदीप सिंह नागा साधुओं के साथ कुछ दिनों तक रहे और उन्होंने वहां से जूना अखाड़ा के साधुओं की कुछ अद्भुत तस्वीरें के जरिए उनके विलक्षण व्यक्तित्व की झलक दिखाने की कोशिश की है-