1999 में हुए कारगिल युद्ध में मिली जीत को 16 साल हो गए. द्रास सेक्टर स्थित वार मेमोरियल में इस बाबत कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जहां कारगिल में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी जाएगी. सेना प्रमुख दलबीर सिंह इस मौके पर मौजूद होंगे.
शहीदों की याद में कारगिल में
कारगिल जंग पर फैक्ट्स
: पाकिस्तानी सैनिक मई 1999 में कारगिल सेक्टर में घुसपैठियों की शक्ल में घुसे और नियंत्रण रेखा पार कर हमारी कई चोटियों पर कब्जा कर लिया था. दुश्मन की इस नापाक हरकत का जवाब देने के लिए आर्मी ने 'ऑपरेशन विजय' शुरू किया, जिसमें 30,000 भारतीय सैनिक शामिल थे.
एयरफोर्स ने आर्मी को सपोर्ट करने के लिए 26 मई को 'ऑपरेशन सफेद सागर' शुरू किया, जबकि नौसेना ने कराची तक पहुंचने वाले समुद्री मार्ग से सप्लाई रोकने के लिए अपने पूर्वी इलाकों के जहाजी बेड़े को अरब सागर में ला खड़ा किया. 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने कारगिल को पाकिस्तानी सैनिकों के कब्जे से पूरी तरह मुक्त करा लिया.
कारगिल जंग पहाड़ी इलाकों में ऊंचाई पर लड़ी गई जंग के ताजा उदाहरणों में से एक है. 1969 में चीन और सोवियत संघ के बीच हुए संघर्ष के बाद परमाणु क्षमता से लैस दो देशों के बीच जमीन पर यह दूसरी सीधी जंग थी. इस लड़ाई में दोनों देशों की सेना को नुकसान हुआ था.
शुरू में पाकिस्तान ने दावा किया उसके 375 सैनिक मारे गए हैं लेकिन बाद में सामने आया कि करीब चार हजार पाकिस्तानी कारगिल जंग में मारे गए हैं. भारतीय सेना के मुताबिक 543 अफसर और जवान शहीद हुए जबकि करीब 1300 जख्मी हुए. महज एक भारतीय सैनिक को युद्धबंदी बनाया गया था.
कारगिल जंग में शहीद हुए भारतीय सैनिकों की उम्र 19 से 35 साल के बीच थी.