किरन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि स्पीकर के निर्णयों को कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती क्योंकि स्पीकर निष्पक्ष होते हैं, हालांकि वे आमतौर पर किसी पार्टी से जुड़े होते हैं. संविधान ने स्पीकर की भूमिका को विशेष रूप से स्थापित किया है, जिसमें उन्हें इस्तीफा देने की आवश्यकता नहीं होती. उन्होंने 2005 के उदाहरण का भी जिक्र किया, जब सोमनाथ चटर्जी ने उन्हें मौका दिया था. सुनें भाषण.