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बृजभूषण शरण सिंह मामले पर वकील ने कोर्ट में रखी ये दलील, 30 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण के वकील की दलील का विरोध करते हुए कहा कि लखनऊ और सोनीपत से दिल्ली आने में ज़्यादा समय नहीं लगता है. इसको भी कोर्ट को ध्यान में रखना चहिए. दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण की दलील का विरोध करते हुए कहा कि अगर ओवर साइट कमेटी ने पुलिस में शिकायत के लिए रिपोर्ट में कोई सुझाव नहीं दिया है तो इसका यह मतलब नहीं है कमेटी ने आरोपों से बरी कर दिया है.

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बृजभूषण शरण सिंह-फाइल फोटो
बृजभूषण शरण सिंह-फाइल फोटो

बृजभूषण शरण सिंह मामले पर आज सुनवाई पूरी हुई. अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी. सुनवाई के दौरान बृजभूषण के वकील ने दलील दी कि कोर्ट को चार्ज फ्रेम करते समय यह भी देखना चहिए कि शिकायतकर्ता की मंशा क्या थी. क्योंकि शिकायतकर्ता हरेक महिला पहलवान की शिकायत के पीछे कोई निजी वजह है. 

शिकायतकर्ताओं की शिकायत का समर्थन सिर्फ उनके परिवार के सदस्यों ने किया है. न कि वहां पर मौजूद कोच या किसी व्यक्ति ने. इसके अलावा शिकायतकर्ता महिला पहलवानों ने काफी देर से शिकायत दर्ज कराई. इसके अलावा शिकायतकर्ताओं ने ओवर साइट कमेटी के सामने 2016 की घटना की जगह का नाम टोकियो लिया था, जबकि FIR में मंगोलिया बताया गया. 

हलफनामे में उसी घटना का स्थान तुर्की का बताया गया. शिकायतकर्ता ने दिल्ली की घटना का ज़िक्र किया है. इसकी तारीख 16 अक्टूबर 2016 बताई गई है. उस दिन बृजभूषण दिल्ली में मौजूद ही नहीं थे. शिकायतकर्ता ने 17 अक्टूबर 2017 की दिल्ली में घटना का ज़िक्र पहली बार FIR में किया. ओवर साइट कमेटी के सामने इस घटना का कोई जिक्र नहीं किया गया था.

दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण के वकील की दलील का विरोध करते हुए कहा कि लखनऊ और सोनीपत से दिल्ली आने में ज़्यादा समय नहीं लगता है. इसको भी कोर्ट को ध्यान में रखना चहिए. महिला पहलवानों से कथित यौन शोषण के मामले में बृजभूषण शरण सिंह पर आरोप तय करने को लेकर सुनवाई के दौरान उनके वकील ने दलील रखते हुए कहा कि ओवर साइट कमेटी को पहली नजर में यौन शोषण का कोई आरोप नहीं मिला. अत: कमेटी ने ना अपनी तरफ से कोई शिकायत दर्ज और ना ही अपनी रिपोर्ट में पुलिस के पास शिकायत के लिए कोई सुझाव दिया.

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दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण की दलील का विरोध करते हुए कहा कि अगर ओवर साइट कमेटी ने पुलिस में शिकायत के लिए रिपोर्ट में कोई सुझाव नहीं दिया है तो इसका यह मतलब नहीं है कमेटी ने आरोपों से बरी कर दिया है.

बृजभूषण के वकील ने कहा कि कोर्ट ने पिछली सुनवाई में सवाल किया था कि ओवर साइट कमेटी समुचित पॉश ऐक्ट के तहत बनी थी या नहीं? ओवर साइट कमेटी की रिपोर्ट पॉश ऐक्ट में आती है या नही ? कोर्ट के इन सवालों पर हमारा जवाब है कि ओवर साइट कमेटी पॉश ऐक्ट के तहत ही बनाई गई थी. इंटरनल कंप्लेन कमेटी (ICC) ने यौन शोषण के आरोपों को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की है.

ओवर साइट कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट में बृजभूषण के ऊपर कोई आरोप नहीं लगाया है. क्योंकि ओवर साइट कमेटी को पहली नजर में भी बृजभूषण के खिलाफ कोई आरोप नहीं मिला था. जबकि नियम के मुताबिक ओवर साइट कमेटी में अगर कोई फाइंडिंग होती है तो 7 दिन के अंदर पुलिस में शिकायत करनी होती है. अगर पुलिस में शिकायत नहीं की जाती है तो इसका मतलब यह है कि कमेटी ने यह माना है कि यौन शोषण नहीं हुआ है.

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