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कौन हैं नूर अहमद नूर? जो तालिबानी शासन आने के बाद पहले अफगानी दूत बनकर पहुंचे भारत

तालिबान के सत्ता में आने के बाद भारत-अफगानिस्तान रिश्तों में एक अहम कूटनीतिक कदम सामने आया है. अफगानिस्तान ने पहली बार भारत में अपना दूत नियुक्त किया है, जिसे दोनों देशों के बीच नए संवाद और मानवीय सहयोग की दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है.

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नूर अहमद नूर ने नई दिल्ली आकर कार्यभार संभाल लिया. (File Photo)
नूर अहमद नूर ने नई दिल्ली आकर कार्यभार संभाल लिया. (File Photo)

अफगानिस्तान ने नूर अहमद नूर को नई दिल्ली स्थित अपने दूतावास में नियुक्त किया है. तालिबान के सत्ता में आने के बाद यह भारत में अफगानिस्तान की पहली औपचारिक राजनयिक नियुक्ति है. इस कदम को भारत और अफगानिस्तान के बीच मानवीय, स्वास्थ्य और कूटनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

तालिबान के अफगानिस्तान पर नियंत्रण के बाद पहली बार काबुल ने भारत में औपचारिक रूप से अपना दूत नियुक्त किया है. अफगानिस्तान ने अनुभवी राजनयिक नूर अहमद नूर को नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास में जिम्मेदारी सौंपी है. नूर अहमद नूर भारत की राजधानी पहुंच चुके हैं और उन्होंने अपना कार्यभार संभाल लिया है.

नूर अहमद नूर इससे पहले अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय में फर्स्ट पॉलिटिकल डायरेक्टर के तौर पर सेवाएं दे चुके हैं. उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब भारत और अफगानिस्तान के बीच मानवीय सहायता और स्वास्थ्य सहयोग को लेकर संवाद तेज हो रहा है.

यह नियुक्ति दोनों देशों के रिश्तों में नए सिरे से जुड़ाव का संकेत मानी जा रही है, खासतौर पर उस पृष्ठभूमि में जब अफगानिस्तान अपने पारंपरिक साझेदार पाकिस्तान से दूरी महसूस कर रहा है.

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20 दिसंबर को अफगानिस्तान के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री मौलवी नूर जलाल जलाली ने कहा था कि पाकिस्तान के साथ रिश्तों में गिरावट के चलते भारत अफगानिस्तान के लिए दवाओं और फार्मास्युटिकल जरूरतों का एक अहम वैकल्पिक साझेदार बनकर उभर रहा है.

जलाली ने भारत के साथ सहयोग को लेकर कहा था, भारत के साथ हमारे मजबूत रिश्ते हैं और हम सहयोग और साझेदारी का एक नया अध्याय शुरू करना चाहते हैं. पाकिस्तान के साथ हमारे संबंध बिगड़ चुके हैं.

यह बयान उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित विश्व स्वास्थ्य संगठन के सेकेंड ग्लोबल समिट ऑन ट्रेडिशनल मेडिसिन में भारत दौरे के दौरान दिया था. इस दौरे में भारत ने अफगानिस्तान को निरंतर मानवीय सहायता देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई थी. खासतौर पर लंबे समय तक दवाओं की आपूर्ति और स्वास्थ्य सहायता को द्विपक्षीय संबंधों का अहम स्तंभ बताया गया.

जलाली का यह दौरा विदेश मंत्रालय द्वारा उनके पहले आधिकारिक भारत दौरे का स्वागत किए जाने के बाद हुआ था. इसे बदलते क्षेत्रीय हालात के बीच भारत की अफगानिस्तान के प्रति मानवीय पहुंच का हिस्सा माना गया.

पिछले साल अक्टूबर 2025 में अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी भी तालिबान के सत्ता में आने के बाद पहली बार भारत दौरे पर आए थे. इस दौरान ANI से बातचीत में उन्होंने भारत में मिले स्वागत की सराहना की थी और यात्रा को सकारात्मक बताया था.

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इससे पहले 24 नवंबर को अफगानिस्तान के वाणिज्य और उद्योग मंत्री अलहाज नूरुद्दीन अज़ीज़ी ने घोषणा की थी कि भारत और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से चली आ रही वीजा संबंधी समस्याएं सुलझा ली गई हैं. इसके तहत अब अफगान नागरिक इलाज और व्यापार के लिए भारतीय वीजा हासिल कर सकेंगे.

अज़ीज़ी ने बताया था कि इस प्रक्रिया में नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास अहम भूमिका निभाएगा, जबकि काबुल स्थित भारतीय दूतावास भी अफगान नागरिकों के समर्थन के लिए विशेष कार्यक्रम विकसित करेगा.

इन तमाम घटनाक्रमों के बीच नूर अहमद नूर की नियुक्ति को भारत और अफगानिस्तान के बीच कूटनीतिक, मानवीय और आधिकारिक संवाद को आगे बढ़ाने की एक नई कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.

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