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अगले 6-7 महीनों में आ सकती है कोरोना की तीसरी लहर, ऐसे बचा जा सकता है इससे

देश अभी कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से जूझ रहा है. लेकिन एक्सपर्ट अब तीसरी लहर आने का अंदेशा भी जताने लगाने लगे हैं. तीसरी लहर आएगी, इस बात को अभी तक सारे एक्सपर्ट मानकर चल रहे हैं. एक्सपर्ट का मानना है कि नवंबर-दिसंबर में तीसरी लहर आ सकती है.

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तीसरी लहर से निपटने के लिए अभी से स्ट्रैटजी बनानी होगी. (फाइल फोटो-PTI) तीसरी लहर से निपटने के लिए अभी से स्ट्रैटजी बनानी होगी. (फाइल फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • नवंबर-दिसंबर में तीसरी लहर का खतरा
  • तीन फैक्टर पर निर्भर होगी तीसरी लहर

अभी कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से जूझ रहा है. लेकिन एक्सपर्ट अब तीसरी लहर आने का अंदेशा भी जताने लगाने लगे हैं. तीसरी लहर आएगी, इस बात को अभी तक सारे एक्सपर्ट मानकर चल रहे हैं, लेकिन कब तक आएगी, इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता.

केंद्र सरकार के प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर प्रोफेसर विजय राघवन ने बुधवार को कहा कि दूसरी लहर के बाद तीसरी लहर भी आएगी. प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए उन्होंने कहा, "तीसरी लहर भी आएगी. लेकिन कब आएगी और कितनी खतरनाक होगी, इसके बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता. कोरोनावायरस के वैरिएंट लगातार बदल रहे हैं, इसलिए हमें तीसरी लहर के लिए भी तैयार रहना होगा." उन्होंने ये भी कहा कि वैक्सीन प्रभावी है, लेकिन वैज्ञानिक इसको अपग्रेड करने पर भी काम कर रहे हैं.

तीसरी लहर कब तक आ सकती है? इस बारे में बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ में महामारी विशेषज्ञ डॉ. गिरिधर बाबू कहते हैं, "इसके ठंड में आने की आशंका है. नवंबर के आखिरी में या दिसंबर की शुरुआत में. इसलिए इस संक्रमण से जिन्हें सबसे ज्यादा खतरा है, उन्हें जल्द से जल्द वैक्सीनेट करने की जरूरत है." डॉ. गिरिधर कर्नाटक में नेशनल कोविड टास्क फोर्स के मेंबर और एडवाइजर भी हैं. वो कहते हैं कि अगली लहर युवा आबादी को प्रभावित कर सकती है.

हालांकि, वो ये भी कहते हैं कि "तीसरी लहर तीन फैक्टर पर निर्भर करती है. पहला तो ये कि दिसंबर तक हम कितने लोगों को वैक्सीनेट करते हैं. दूसरा हम सुपर स्प्रेडर इवेंट को कितना रोक पाते हैं और तीसरा ये कि हम कितनी जल्दी वायरस के नए वैरिएंट्स की पहचान कर पाते हैं और उसे रोक पाते हैं."

तीसरी लहर आने पर क्या हो सकता है? इसके जवाब में मैथमैटिक मॉडल एक्सपर्ट प्रोफेसर एम. विद्यासागर कहते हैं, "दूसरी लहर में ही बड़ी आबादी संक्रमित हो रही है. इनमें वो लोग भी शामिल हैं जिनका टेस्ट नहीं हो रहा है या एसिम्प्टोमैटिक हैं, लेकिन वो संक्रमित हैं. ऐसे में जो संक्रमित हो रहे हैं, उनमें कम से कम 6 महीने तक वायरस के खिलाफ इम्युनिटी रहेगी. लेकिन उसके बाद इम्युनिटी कमजोर पड़ सकती है. इसलिए हमें वैक्सीनेशन प्रोग्राम में तेजी लानी होगी. 6 महीने के भीतर हाई रिस्क पॉपुलेशन को वैक्सीनेट करना होगा, ताकि तीसरी लहर दूसरी लहर जैसी भयावह ना हो."

डॉ. बाबू कहते हैं "कई राज्यों ने दूसरी लहर पर वैज्ञानिकों की सलाह को नजरअंदाज किया. हमें अब एक प्लान बनाना होगा, ताकि हम कई लहरों को मैनेज कर सकें. साथ ही वैक्सीनेशन का भी प्लान तैयार करना होगा."

उन्होंने कहा, "हम दूसरी लहर से जैसे ही निकलते हैं, वैसे ही हमें स्थायी समाधान लागू करने होंगे. हमें मामले और मौतों की संख्या को कम करने के लिए एक एग्रेसिव स्ट्रेटजी बनाने की जरूरत है. हमें टेस्टिंग की सुविधा बढ़ानी होगी. एक मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना होगा."

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में अब तक 16.24 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगी है. वहीं, पिछले 24 घंटे में 18 से 44 साल के सिर्फ 2.30 लाख लोगों को ही वैक्सीन लग सकी है. भारत में अभी तक 11% आबादी ही ऐसी है, जिसे वैक्सीन का कम से कम एक डोज लग चुका है. ये आंकड़े बहुत कम हैं क्योंकि हमें हर दिन 40 से 50 लाख लोगों को वैक्सीनेट करना है. लेकिन वैक्सीन की कमी की वजह से ऐसा हो नहीं पा रहा है.

वहीं, दूसरी लहर के पीक को लेकर अनुमान लगाया जा रहा है कि ये 7 मई को आ सकता है. प्रोफेसर एम. विद्यासागर ने पिछले दिनों इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में बताया था कि 7 मई को देश में दूसरी लहर का पीक आ सकता है. इसके बाद नए मामलों में कमी आ सकती है. हालांकि, अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग वक्त पर पीक आएगा.

 

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