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UAPA Act: क्या है UAPA कानून, जिसके तहत हुई है JNU के पूर्व छात्र उमर खालिद की गिरफ्तारी?

'यूनाइटेड अगेंस्ट हेट ग्रुप' का कार्यकर्ता और JNU के पूर्व छात्र रहे उमर खालिद को UAPA कानून के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है. आइए समझते हैं क्या है ये कानून, कब बना और इसमें कितनी बार बदलाव हो चुके हैं...

Umar Khalid Arrested Under UAPA Act Umar Khalid Arrested Under UAPA Act

दिल्ली दंगे में कथित तौर पर भूमिका के आरोप में दिल्ली पुलिस ने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को गिरफ्तार कर लिया है. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने रविवार की रात उमर खालिद को गिरफ्तार किया. खालिद की गिरफ्तारी गैर कानूनी गतिविधि (निषेध) कानून (यूएपीए) के तहत हुई है. खालिद पर दंगा भड़काने, साजिश रचने, लोगों को उकसाने, भड़काऊ भाषण देने के गंभीर आरोप लगे हैं. 

FIR में दर्ज आरोपों के मुताबिक ट्रंप के दौरे के वक्त उमर ने लोगों को प्रदर्शन के लिए उकसाया था. दिल्ली दंगे के सिलसिले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 2 सितंबर को कुछ घंटे तक उमर से पूछताछ की थी. इससे पहले पुलिस ने दंगे से जुड़े एक अन्य मामले में उमर के खिलाफ यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया था. पुलिस ने उसका मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया था. 'यूनाइटेड अगेंस्ट हेट ग्रुप' के कार्यकर्ता और JNU के पूर्व छात्र रहे उमर खालिद को Unlawful Activities Prevention Amendment Act (UAPA) के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है.

क्या है UAPA कानून?
UAPA कानून देश की संप्रभुता और एकता को खतरे में डालने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए 1967 में बनाया गया था. तब से लेकर अब तक इसमें चार बार संशोधन किए जा चुके हैं. 2004, 2008, 2012 और 2019 में इस कानून में बदलाव किए गए. इसके तहत ऐसे किसी भी व्यक्ति या संगठन, जो देश के खिलाफ या फिर भारत की अखंडता और संप्रभुता को भंग करने का प्रयास करे उस पर कार्रवाई की जाती है.

इसके तहत आरोपी को कम से कम 7 साल की सजा हो सकती है. अभी तक इस कानून के तहत कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है. यूएपीए का इस्तेमाल आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर, लश्कर-ए-तैय्यबा के मुखिया हाफिज सईद, आतंकी जकी-उर-रहमान लखवी और आतंकी दाउद इब्राहिम के खिलाफ किया जा चुका है.

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में इस कानून में बदलाव के लिए संशोधन विधेयक पेश किया था जो संसद के दोनों सदनों से पास हो गया. इस कानून में हुए संशोधन के बाद एनआईए को कई अधिकार मिल गए. इस कानून में अगस्त 2019 में हुए संशोधन के बाद अब इसके तहत संगठनों के साथ-साथ व्यक्तियों को भी आतंकवादी घोषित किया जा सकता है. साथ ही उस व्यक्ति की संपत्ति भी जब्त की जा सकती है.

इस कानून के तहत एनआईए के पास कार्रवाई करने के असीमित अधिकार हैं. यह कानून एनआईए को अधिकार देता है कि वो आतंकी गतिविधियों में शक के आधार पर लोगों को उठा सकती है और उन्हें गिरफ्तार कर सकती है. इसके अलावा संगठनों को आतंकी संगठन घोषित कर उन पर कार्रवाई कर सकती है. 

इस संशोधन से पहले किसी को व्यक्तिगत आतंकवादी ठहराने का कोई प्रावधान नहीं था. ऐसे में जब किसी आतंकवादी संगठन पर प्रतिबंध लगाया जाता था तो उसके सदस्य एक नया संगठन बना लेते थे. इस प्रक्रिया पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने यूएपीए कानून में संशोधन किया.

यही नहीं, इस कानून के आधार पर एनआईए को जांच के लिए पहले संबंधित राज्य की पुलिस से अनुमति लेनी पड़ती थी, लेकिन अब इसकी जरूरत नहीं है. हाल में हुए संशोधन के बाद एनआईए को ये अधिकार है कि वो बिना राज्य पुलिस की इजाजत के उस राज्य में कार्रवाई कर सकती है.

यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) चाहे तो वो आतंकवाद से जुड़े किसी भी मामले में सबूत के आधार पर व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकती है और उसे आतंकी घोषित कर संपत्ति सीज कर सकती है. पहले इसके लिए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से अनुमति लेनी होती थी, लेकिन 2019 में किए गए संशोधन के बाद अब यह विधेयक एनआईए को अधिकार देता है कि आतंकवाद से जुड़े किसी मामले की जांच के लिए एनआईए के अधिकारियों को सिर्फ NIA डायरेक्टर जनरल से अनुमति लेनी होगी.

यूएपीए बिल के तहत केंद्र सरकार किसी भी संगठन को आतंकी संगठन घोषित कर सकती है अगर निम्न 4 में से किसी एक में उसे शामिल पाया जाता है.

  • आतंक से जुड़े किसी भी मामले में उसकी सहभागिता या किसी तरह का कोई कमिटमेंट पाया जाता है.
  • आतंकवाद की तैयारी
  • आतंकवाद को बढ़ावा देना
  • आतंकी गतिविधियों में किसी अन्य तरह की संलिप्तता

जांच के संबंध में भी एनआईए (NIA) के पास अब ताकत और बढ़ गई है. कानून में हुए संशोधन के बाद अब एनआईए के अफसरों को ज्यादा अधिकार दिए गए हैं. अब इंस्पेक्टर रैंक या उससे ऊपर के अफसर आतंकवाद से जुड़े ऐसे किसी भी मामले की जांच कर सकते हैं.

साल 2020 के फरवरी महीने में संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के विरोधी और समर्थकों के बीच हिंसा के बाद 24 फरवरी को उत्तर पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे जिसमें कम से कम 53 लोगों की मौत हुई थी जबकि 200 के करीब घायल हुए थे. इस घटनाक्रम में कथित भूमिका के आरोप में पुलिस ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद को यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया है.

 

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