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स्वास्थ्य मंत्रालय ने चेताया- देश के 22 जिलों में बढ़ रहे हैं कोरोना के मामले, चिंता का विषय

स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Ministry) ने चिंता जताते हुए कहा कि गिरावट की दर घट रही है. और यह चिंता का विषय है. मंत्रालय ने कहा कि 62 जिलों में रोजाना 100 से ज्यादा नए केस सामने आ रहे हैं. कोरोना के अधिकांश मामले अब भारत के तटीय क्षेत्रों में केंद्रित हैं.

सांकेतिक तस्वीर (पीटीआई) सांकेतिक तस्वीर (पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • '4 हफ्ते में 22 जिलों में कोरोना के केस में देखी जा रही वृद्धि'
  • 62 जिलों में रोजाना 100 से ज्यादा मामले सामने आ रहे- लव अग्रवाल
  • वायरस के व्यवहार को हल्के में नहीं लिया जा सकताः डॉ. पॉल

देश में कोरोना का कहर कुछ शांत हुआ है, लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि कुछ जिलों में नए मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है. जिन 22 जिलों में कोरोना के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है, उनमें 7 जिले अकेले केरल से हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय ने आज मंगलवार को आयोजित पीसी में कहा कि हमने देखा है कि पिछले 4 हफ्ते में 22 जिलों में कोरोना के मामलों में ऊपर की ओर रुझान देखा जा रहा है.

इसमें केरल में 7 जिले शामिल हैं. महाराष्ट्र में शोलापुर जिले में भी वृद्धि देखी जा रही है. पूर्वोत्तर के राज्यों मणिपुर (5 जिले) और मेघालय (3 जिले) में कुछ जिलों में नए मामलों में ऊपर की ओर वृद्धि दिख रही है.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने गिरावट की दर घटने पर चिंता जताते हुए कहा कि गिरावट की दर घट रही है. और यह चिंता का विषय है. मंत्रालय ने कहा कि 62 जिलों में रोजाना 100 से ज्यादा नए केस सामने आ रहे हैं. कोरोना के अधिकांश मामले अब भारत के तटीय क्षेत्रों (तटीय और उत्तर पूर्व) में केंद्रित हैं.

अभी 3.9 लाख एक्टिव केसः लव अग्रवाल

स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि अभी देशभर में 3.9 लाख एक्टिव केस हैं. भारत में रिकवरी रेट 97.4% तक पहुंच गया है. मंत्रालय की ओर से कहा गया कि गृह मंत्रालय ने पॉजिटिविटी रेट के उच्च मामले में रोकथाम उपायों को सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं.

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उन्होंने कहा कि अब तक देशभर में कुल 44.19 करोड़ वैक्सीन के डोज दिए जा चुके हैं. हालांकि महामारी अभी खत्म नहीं हुई है. दुनिया देख रही है कि मामले बढ़ रहे हैं.

अनावश्यक यात्रा न करेंः डॉक्टर पॉल

नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल ने कहा कि वायरस के व्यवहार को हल्के में नहीं लिया जा सकता. वैक्सीन लगाने वालों की संख्या में वृद्धि के बावजूद अभी भी चिंता का विषय है क्योंकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी असुरक्षित हैं.

डॉक्टर पॉल ने लोगों को आगाह करते हुए कहा कि अनावश्यक यात्रा न करें. यह बड़े पैमाने के उत्सवों का समय नहीं है. उन्होंने कहा कि ऑर्म्ड फोर्सेस मेडिकल कॉलेज की स्टडी कहती है कि रिस्क में 93% की कमी का मतलब है कि टीकाकरण के बाद 93% सुरक्षा. यह डेल्टा वेरिएंट से सुरक्षा है. मृत्यु दर 98% कमी आई है.

स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि वैश्विक नजरिए से देखें तो महामारी अभी खत्म नहीं हुई है. दुनियाभर में मामलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो चिंता का विषय बना हुआ है. हमें सख्ती के साथ वायरस के प्रसार को रोकने पर काम करना होगा.

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