केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2024 के बजट में, विभिन्न प्रमुख सरकारी योजनाओं की फंडिंग में बदलाव की घोषणा की. इंडिया टुडे की डेटा इंटेलिजेंस यूनिट (DIU) ने ऐसी 140 योजनाओं का विश्लेषण किया है, इनमें 42 योजनाओं को केंद्र प्रायोजित और 98 को केंद्र की प्रमुख योजनाओं के रूप में वर्गीकृत किया गया है. इनमें से कुछ योजनाओं के बजट में वृद्धि तो कुछ के बजट में कटौती की गई है.
केंद्र की जिन योजनाओं के बजट में बढ़ोतरी की गई है उनमें पीएम-ईबस सेवा योजना प्रमुख है. इसका बजट 2023-24 में 20 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 1,300 करोड़ रुपये हो गया है, जो 6400 प्रतिशत की बढ़ोतरी है. अगस्त 2023 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य भारत के ग्रीन एनर्जी टारगेट को हासिल करने के लिए देश भर में इलेक्ट्रिक बस इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना है.
इसी तरह भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी लाने के उद्देश्य से FAME-India (Faster Adoption and Manufacturing of Electric Vehicles in India) योजना शुरू की गई थी. इसके लिए वित्त वर्ष 2023-24 में 4,807 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था, जो 2024-25 में घटकर 2,671 रुपये हो गया है. इस तरह FAME-India स्कीम के बजट में 44 प्रतिशत कटौती की गई है.
इसका मतलब है ईवी निर्माताओं के लिए कम सब्सिडी और कम कर छूट. FAME-India के बजट में यह कटौती मिनिस्ट्री ऑफ हेवी इंडस्ट्रीज की जांच के बाद आई है, जिसमें पाया गया था कि कई ईवी कंपनियों ने योजना के अंतर्गत मिलने वाली छूट का लाभ उठाने के लिए मानदंडों का उल्लंघन किया. हालांकि, इस बार के बजट में ईवी निर्माताओं के लिए सब कुछ नकारात्मक नहीं हुआ है. भारत में लिथियम-आयन बैटरी के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए, केंद्र सरकार ने लिथियम के आयात पर सीमा शुल्क (Customs Duty) हटा दिया है.
ईवी की कुल लागत में बैटरियों का हिस्सा लगभग 35-40 प्रतिशत होता है. बेशक, भारत में लिथियम-आयन बैटरी के लिए मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने की प्रक्रिया में समय लगेगा. इसलिए यहां बजट में किए गए प्रावधानों का लाभ दीर्घकालिक है. ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के लिए आवंटित धनराशि 484 करोड़ रुपये से बढ़कर 3,500 करोड़ रुपये हो गई, जो 623 प्रतिशत की वृद्धि है. सितंबर 2021 में स्वीकृत योजना ऑटोमोटिव क्षेत्र में डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है.
इसी तरह फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री डेवलपमेंट स्कीम का आवंटन 265 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,300 करोड़ रुपये हो गया है, जो 390.6 प्रतिशत की वृद्धि है. इसी तरह, कारीगरों और शिल्पकारों को समर्थन देने के लिए बनाई गई पीएम विश्वकर्मा योजना ने अपना बजट 990 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 4,824 करोड़ रुपये कर दिया है, जो 387.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है. अनुसूचित जाति के लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित करते हुए प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना का बजट 450 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2,140 करोड़ रुपये कर दिया गया, जो 375.6 प्रतिशत का बदलाव है.
अन्य योजनाएं जिनके बजट में वृद्धि की गई है, उनमें सेमीकंडक्टर्स एंड डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम प्रोग्राम, वायु सेना की परियोजनाएं, घरेलू उद्योग प्रोत्साहन योजना, प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA) और वाइब्रेंट गांव प्रोग्राम शामिल हैं. प्रधानमंत्री आवास योजना के बजट में 30,568 करोड़ रुपये की वृद्धि देखी गई. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय का बजट इस बार 6,573 करोड़ रुपये बढ़ा है. रेलवे के बजट में 5,893 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी देखी गई. विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए बजट में 5,452 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है. सेमीकंडक्टर्स प्रोग्राम के बजट में 5,400 करोड़ रुपये की वृद्धि देखी गई.
इन योजनाओं के बजट में की गई कटौती
कुछ प्रमुख योजनाओं के बजट आवंटन में कमी देखी गई. स्मार्ट सिटीज मिशन, जिसका उद्देश्य शहरी बुनियादी ढांचे को विकसित करना था, इस योजना के बजट में 70 प्रतिशत की कमी देखी गई, जो 8,000 करोड़ रुपये से घटकर 2,400 करोड़ रुपये हो गई. ब्याज दरों में सब्सिडी देकर निर्यातकों को समर्थन देने वाली इंटरेस्ट इक्वलाइजेशन स्कीम के बजट में 54.1 प्रतिशत की कटौती की गई है. शहरों के लिए जरूरी मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्टेशन प्रोजेक्ट के लिए फंडिंग को 46.9 प्रतिशत घटाकर 2,051 करोड़ रुपये से 1,090 करोड़ रुपये कर दिया गया है.
नेशनल इंवेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के बजट में 42.3 प्रतिशत की कटौती की गई है. इसके लिए 1,501 करोड़ रुपये का प्रावधान बजट में किया गया है. इस योजना के तहत बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश होता है. डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने वाली RuPay डेबिट कार्ड और BHIM-UPI इंसेंटिव स्कीम का बजट 42 प्रतिशत घटाकर 2,485 करोड़ रुपये से 1,441 करोड़ रुपये कर दिया गया है. छोटे और मध्यम उद्यमों को ऋण प्रदान करने वाली गारंटी इमरजेंसी क्रेडिट लाइन (GECL) के बजट में भी कमी देखी गई है.
उर्वरकों पर सब्सिडी देकर कृषि क्षेत्र का समर्थन करने वाली न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी, और नॉर्थ ईस्ट नैचुरल गैस पाइपलाइन ग्रिड का हिस्सा इंद्रधनुष गैस ग्रिड लिमिटेड (IGGL) के लिए बजट में भी कटौती देखी गई है. न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी में 15,300 करोड़ रुपये की कटौती की गई. यूरिया सब्सिडी के बजट में 9,594 करोड़ रुपये की कटौती की गई है. वहीं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना में 7,082 करोड़ रुपये की कटौती की गई.