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'शिक्षक भर्ती घोटाले के बारे में पार्टी के बड़े नेताओं को पहले से पता था', TMC के एक्शन के बाद कुणाल घोष का दावा

टीएमसी ने बुधवार को पार्टी लाइन से हटकर विचार रखने पर कुणाल घोष को महासचिव के पद से हटा दिया था. अब कुणाल घोष ने दावा किया है कि बंगाल के शिक्षक भर्ती घोटाले के बारे में पार्टी के बड़े नेताओं को पहले से ही पता था. उन्होंने दावा किया कि अगर पहले ही कार्रवाई की जाती, तो हालत ये नहीं होती.

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kunal ghosh
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तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने कुणाल घोष को पार्टी के महासचिव पद से हटा दिया है. उन पर ये कार्रवाई पार्टी लाइन से हटकर विचार रखने पर हुई है. इसके बाद अब कुणाल घोष भी बगावत करने के मूड में आ गए हैं. उनका दावा है कि पश्चिम बंगाल के शिक्षक भर्ती घोटाले के बारे में पार्टी के कई बड़े नेताओं को पहले से ही पता था.

कुणाल घोष ने दावा किया कि बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले के बारे में पार्टी के बड़े नेताओं को पहले से ही जानकारी थी. उन्होंने सवाल उठाया कि इतना बड़ा कांड हो गया और पार्टी को इसकी जानकारी न हो, ऐसा कैसे हो सकता है.

उन्होंने कहा कि पार्थ चटर्जी के नाम पर पैसा उठाया जा रहा था, इसकी जानकारी पार्टी को थी. अगर पहले ही इसके खिलाफ कोई कदम उठाया जाता, तो आज ये हालत नहीं होती. उन्होंने दावा किया कि पार्थ चटर्जी को भी इसकी जानकारी थी, इसलिए उन्हें मंत्री पद से हटाया गया था.

घोष ने कहा कि मैं अभी भी तृणमूल कांग्रेस में ही हूं और कहीं नहीं जा रहा. उन्होंने कहा कि सुदीप बनर्जी टीएमसी के लिए सही उम्मीदवार नहीं हैं.

इससे पहले बुधवार को कुणाल घोष ने दावा किया था कि उन्होंने पार्टी को पहले ही बता दिया था कि वो महासचिव और स्पीकर के पद पर नहीं रहना चाहते. इसके बावजूद पार्टी ने उन्हें ये जिम्मेदारी सौंपी थी.

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क्या है शिक्षक भर्ती घोटाला?

ये पूरा मामला एसएससी के जरिए शिक्षकों की भर्ती से जुड़ा है. 2014 में जब एसएससी ने इस भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया था, तब पार्थ चटर्जी शिक्षा मंत्री थे. 2016 में भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई. कई आवेदकों ने भर्ती प्रक्रिया में धांधली का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी.

पांच साल चली सुनवाई के बाद मई 2022 में हाईकोर्ट ने इसकी जांच सीबीआई को सौंपी. बाद में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से ईडी ने भी जांच की. सबूत हाथ लगने पर ईडी ने पार्थ चटर्जी और उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी को गिरफ्तार किया. 

याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि जिन उम्मीदवारों के नंबर कम थे, उन्हें मैरिट लिस्ट में ऊपर स्थान दिया गया. कुछ शिकायतें ऐसी भी थीं, जिनमें कहा गया था कि कुछ उम्मीदवारों का मैरिट लिस्ट में नाम न होने पर भी उन्हें नौकरी दी गई. याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि कुछ ऐसे उम्मीदवारों को भी नौकरी दी गई, जिन्होंने टीईटी परीक्षा भी पास नहीं की थी. जबकि राज्य में शिक्षक भर्ती के लिए टीईटी की परीक्षा पास होना अनिवार्य है.

पिछले महीने ही कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस पर फैसला देते हुए शिक्षक भर्ती को रद्द कर दिया है. इससे बंगाल के लगभग 26 हजार शिक्षकों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा है. इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन को नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के भी निर्देश दिए हैं.

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