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Corona 3.0 में दूसरी लहर से भी ज्यादा क्यों है खतरा? यूरोप-अमेरिका में जारी तबाही से ये 5 सबक ले सकता है भारत

कोरोना की नई लहर (Corona new wave) इस वक्त अमेरिका और यूरोप में तबाही मचा रही है. अमेरिका में बीते गुरुवार एक दिन में 10 लाख कोरोना मरीज सामने आए थे. भारत में भी सात महीने बाद एक दिन में एक लाख मरीज मिले हैं.

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कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अमेरिका और यूरोप में तबाही मचा रहा कोरोना
  • भारत को लेने होंगे सबक

ओमिक्रॉन (Omicron) की वजह से आई कोरोना की नई लहर से यूरोप और अमेरिका में कहर मचाया हुआ है. यूरोप में अभी एक दिन में 10 लाख नए कोरोना मामले आए थे. इसी तरह अमेरिका की स्थिति भी खराब है. भारत में भी स्थिति बिगड़ने लगी है. शुक्रवार को एक दिन में एक लाख से ज्यादा कोरोना केस आए. ऐसा 7 महीनों बाद हुआ है.

यूरोप की बात करें तो वहां ब्रिटेन में एक दिन में दो लाख वहीं इटली में एक दिन में 70 हजार से ज्यादा मामले सामने आए थे. अमेरिका में एक दिन में 10 लाख कोरोना केस आए थे, वहां एक दिन में 1800 से ज्यादा मौतें भी हो रही हैं. अगर भारत को ऐसी तबाही से बचना है तो वक्त पर पांच सबक लेने होंगे.

तेज संक्रमण रोकने के लिए टेस्टिंग ज्यादा

कोरोना का कोई भी वैरिएंट हो, उसे रोकने के तरीके मोटे तौर पर एक जैसे ही हैं. कोरोना संक्रमण का जल्द से जल्द पता लगाने कि लिए पहला कदम टेस्टिंग ही है. फिलहाल भारत में रोज करीब 15 लाख कोरोना टेस्ट हो रहे हैं. भारत में गुरुवार को कोरोना वायरस के लिए 15,13,377 सैंपल टेस्ट किए गए. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के मुताबिक, गुरुवार तक कुल 68,68,19,128 सैंपल टेस्ट किए जा चुके हैं.

ओमिक्रॉन को रोकना है तो टेस्टिंग को बढ़ाने की जरूरत है क्योंकि इसके लक्षण ना के बराबर दिखते हैं और टेस्टिंग नहीं होगी तो संक्रमित बिना जाने इसे दूसरों तक पहुंचा देगा. फिलहाल खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने गुरुवार को ही 9 राज्यों को टेस्टिंग बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. इसमें तमिलनाडु, पंजाब, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मिजोरम, मेघालय, जम्मू-कश्मीर और बिहार शामिल है.

भारत में लगे कितने कोरोना टीके (07 जनवरी तक)

भीड़ पर तुरंत काबू जरूरी

क्रिसमस, नया साल बीत चुका है. उस दौरान पाबंदियों के बावजूद लोग नहीं माने और जश्न के लिए घरों से बाहर निकले. हिल स्टेशन्स, धार्मिक स्थल, सड़कें सब इसकी गवाह बनीं. लेकिन लोग अब भी खतरे को भांप नहीं रहे. दिल्ली सरकार ने लोगों की सुविधा के लिए मेट्रो और बसों को 100 फीसदी क्षमता के साथ चलाने की छूट तो दी लेकिन इससे कोविड का खतरा बढ़ गया है. शुक्रवार को ही दिल्ली मेट्रो की ऐसी तस्वीरें आई हैं जिसमें कोच खचाखच भरे हैं. मनाही के बावजूद लोग खड़े होकर सफर कर रहे हैं. सार्वजनिक स्थल, सार्वजनिक वाहन, मार्केट कोरोना को दावत दे सकती हैं. सरकार की पाबंदियों के साथ-साथ लोगों को भी यह समझना होगा.

बच्चों का जल्दी से जल्दी वैक्सीनेशन 

देश में इस साल से 3 जनवरी को 15-18 साल के युवाओं को कोरोना टीका लगाया जा रहा है. एक हफ्ते में ही 1 करोड़ 68 लाख से ज्यादा युवाओं को टीका लगा दिया गया है. देश में 15 से 18 साल के कुल 10 करोड़ के करीब युवा हैं, इनको जल्द से जल्द वैक्सीन की दोनों खुराक देना हमारा लक्षय होना चाहिए. 

इसके अलावा कुछ चुनिंदा देशों ने 12 साल या उससे कम आयु के बच्चों को भी कोरोना टीका लगाना शुरू कर दिया है. सरकार को इसकी तैयारी भी जल्द पूरी कर लेनी चाहिए. भारत में भी अगले फेज में 15 से कम आयु के बच्चों के टीकाकरण की उम्मीद है. भारत में 15 साल से कम उम्र के 35 करोड़ बच्चे हैं.

अस्पतालों में इमरजेंसी तैयारी

कोरोना की दूसरी लहर में देखा गया था कि मेडिकल सुविधाओं का पूरा सिस्टम फ्लॉप हो गया था. ऑक्सीजन के साथ-साथ बेड और मेडिकल स्टाफ की भी भारी संख्या में कमी हो गई थी. दूसरी लहर से सीख लेते हुए केंद्र और राज्य सरकारों ने ऑक्सीजन संकट से निपटने के काफी इंतजाम किए हैं. दिल्ली और महाराष्ट्र जहां ज्यादा स्थिति खराब है वहां और ध्यान देने की जरूरत है. दिल्ली सरकार ने अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द करके हॉस्पिटल में बेड बढ़ाने के प्रबंध करने को कहा है. फिलहाल दिल्ली में 10 हजार के करीब ऑक्सीजन बेड खाली हैं. लेकिन दिल्ली में जिस तरह 15-17 हजार और महाराष्ट्र में 25 हजार से ज्यादा केस आ रहे हैं स्थिति कभी भी आउट ऑफ कंट्रोल जा सकती है.

जरूरी दवाओं का इंतजाम

कोरोना के इलाज के लिए हाल ही में Molnupiravir को मंजूरी मिली है. हालांकि, इसे कोविड प्रोटोकॉल में शामिल नहीं किया गया है. वहीं हल्के लक्षण होने पर पेरासिटामोल आदि भी लोग लेते हैं. लेकिन कोरोना की तीसरी लहर के संकट के बीच लोगों सामान की जमाखोरी करने लगते हैं, जिससे मार्केट में जरूरी सामान भी गायब हो जाता है. कोरोना की दूसरी लहर में देखा गया था कि जरूरी दवाओं के साथ-साथ सेनिटाइजर, मास्क और ऑक्सीजन सिलेंडर आदि की कीमतों में कितना उछाल आ गया था, जिसने लोगों की दिक्कतों को बढ़ा दिया था. इससे निपटने का प्लान भी तैयार करना होगा.

 

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