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खरीदे जाएंगे 83 तेजस विमान, कितनी पूरी होगी वायुसेना की जरूरत?

भारत सरकार ने मेक इन इंडिया कार्यक्रम को मजबूती देते हुए 83 तेजस लड़ाकू विमान खरीदने का करार किया है. HAL से खरीदे जाने वाले ये लड़ाकू विमान कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के तीन साल के भीतर ही वायुसेना को सौंप दिए जाएंगे.

तेजस बढ़ाएगा वायुसेना की ताकत (फाइल) तेजस बढ़ाएगा वायुसेना की ताकत (फाइल)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए बड़ा फैसला
  • HAL से खरीदे जाएंगे 83 तेजस लड़ाकू विमान

भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए बीते दिन केंद्र सरकार द्वारा एक बड़ा फैसला लिया गया. भारत सरकार ने मेक इन इंडिया कार्यक्रम को मजबूती देते हुए 83 तेजस लड़ाकू विमान खरीदने का करार किया है. HAL से खरीदे जाने वाले ये लड़ाकू विमान कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के तीन साल के भीतर ही वायुसेना को सौंप दिए जाएंगे.

आत्मनिर्भर भारत के तहत देश में रक्षा क्षेत्र के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है. ऐसे में वायुसेना से इतना बड़ा ऑर्डर मिलना एक अहम कदम है. सिर्फ इतना ही नहीं इस सौदे से भारतीय वायुसेना की जरूरतों को पूरा करने में भी आसानी होगी. HAL से 83 तेजस विमान खरीदने के मायनों पर ध्यान दीजिए... 

•    तेजस एक देसी लड़ाकू विमान है, जो वजन में हल्का लेकिन असरदार है. साल 2016 में भारतीय वायुसेना में इसकी पहली स्क्वाड्रन बनाई गई थी.

•    भारतीय वायुसेना के पास कुल 42 स्क्वाड्रन हैं, हालांकि अभी ये सभी पूरे नहीं हैं. एक स्क्वाड्रन में कुल 18 लड़ाकू विमान शामिल होते हैं.

•    HAL के साथ 83 लड़ाकू विमानों का सौदा होने से अब इन स्क्वाड्रन की संख्या बढ़ेगी. अभी वायुसेना के पास कुल 30 स्क्वाड्रन सैंक्शन हैं, यानी कुल से 12 कम हैं. 

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•    रक्षा मंत्रालय और हिन्दुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड के बीच पिछले तीन साल से तेजस के दाम को लेकर मंथन चल रहा था. जिसके बाद अब कुल 83 तेजस मार्क 1-A खरीदने को मंजूरी मिल गई है. 

•    जो नया तेजस भारतीय वायुसेना को मिलने जा रहा है, उसमें काफी अपग्रेड किया गया है. जैसे हवा में ही रिफ्यूलिंग करना, दुश्मन के रडार को जाम कर देना.

गौरतलब है कि मोदी सरकार की ओर से लगातार देश में ही रक्षा से जुड़े सामानों, हथियारों को बनाने पर जोर दिया जा रहा है. लंबे वक्त की कठिनाइयों के बाद किसी स्वदेशी कंपनी को इतना बड़ा ऑर्डर मिला है, ऐसे में माना जा रहा है कि इससे ना सिर्फ HAL को लाभ होगा बल्कि कई छोटी देसी कंपनियां इससे फायदा ले पाएंगी.  

 

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