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'इलाज पर कम ध्यान, रियल एस्टेट उद्योग बन गए अस्पताल', फायर सेफ्टी पर SC से गुजरात को फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अस्पताल संकट में मरीजों को सहायता प्रदान करने के लिए होते हैं, लेकिन यह व्यापक रूप से महसूस किया जाता है कि वे पैसे कमाने की मशीन बन गए हैं, जो मरीजों की परेशानी को बढ़ाते हैं. 

सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट
स्टोरी हाइलाइट्स
  • फायर सेफ्टी रिपोर्ट पर अदालत में हो रही थी सुनवाई
  • पैसे कमाने की मशीन बन गए हैं अस्पताल-SC
  • 'अस्पताल इलाज पर कम ध्यान देने वाले रियल एस्टेट उद्योग बन गए'

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के अस्पतालों में आग की घटनाओं को लेकर राज्य सरकार पर गहरी नाराजगी जताई है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अस्पतालों में आग लगने की कई घटनाएं मानवीय त्रासदी हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति नहीं हो सकती है कि छोटे-छोटे अस्पताल इमारतों से चलने लगें और जहां नियमों का पालन ही न होता हो. 

आग की घटनाओं पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने कहा कि राज्यों को स्टेडियम या फिर दूसरे स्थानों में कोविड केयर सेंटर खोलने चाहिए. 

अस्पतालों पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

इस मामले की सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस शाह की बेंच में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अस्पताल मरीजों के इलाज पर बहुत कम ध्यान देने वाला रियल एस्टेट उद्योग बन गया है. 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अस्पताल संकट में मरीजों को सहायता प्रदान करने के लिए होते हैं, लेकिन यह व्यापक रूप से महसूस किया जाता है कि वे पैसे कमाने की मशीन बन गए हैं, जो मरीजों को परेशानी को बढ़ाते हैं. 

गुजरात सरकार को खरी-खरी

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से अस्पतालों में आग से सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ नोटिफिकेशन जारी करने के मामले में जवाब मांगा. सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से कहा कि उसे उन अस्पतालों को छूट देने वाली 8 जुलाई 2021 की अधिसूचना को वापस लेने पर ध्यान देना चाहिए.

बता दें कि 8 जुलाई 2021 को गुजरात सरकार ने आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया था अस्पताल में आग से सुरक्षा के प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों के खिलाफ 30 जून 2022 तक  कोई कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए. इस पर कोर्ट ने आपत्ति जताई है.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सॉलिसिटर जनरल से संज्ञान लेने को कहा और कहा कि ऐसे कैसे कोई सरकार इस तरह का आदेश दे सकती है कि अस्पतालों के खिलाफ एक्शन ना लिया जाए?

गुजरात सरकार ऐसा आदेश कैसे जारी कर सकती है

जस्टिस शाह ने कहा कि हमने आदेश दिया था कि सभी कोविड अस्पताल में नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएं और महीने में आग से सुरक्षा को लेकर निरीक्षण किया जाए.  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिसंबर 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी अस्पतालों में नोडल अधिकारी की नियुक्ति का देश दिया था और आग से सुरक्षा के प्रोटोकॉल का पालन करने को कहा था. साथ ही, ऐसे कोविड अस्पताल जिनके पास फायर डिपार्टमेंट का NOC नहीं है उसके खिलाफ एक्शन लेने को कहा था. 

ऐसे आदेश न्यायालय की अवमानना

जस्टिस शाह ने कहा कि गुजरात में 40 अस्पताल ऐसे थे जहां अग्नि सुरक्षा का इंतज़ाम नहीं था. वह हाईकोर्ट पहुंच गए कि अग्नि सुरक्षा का नियमों का उल्लंघन करने के लिए अस्पतालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए.  ऐसा आदेश सीधे तौर पर इस न्यायालय की अवमानना है. 

वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि गुजरात में हमारे परिवार के सदस्य की अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति में मौत हुई, गुजरात का यह अस्पताल आवासीय भवनों में शुरू किया गया था, ICU ऐसी जगह था जहां फायर टेंडर तक पहुंचना असंभव था और आग से सुरक्षा के लिए कोई तंत्र नहीं था. 
 

 

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