सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) इन दिनों 9 राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा देने की मांग (Minority Status for Hindus) वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा है. सोमवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार (Central Government) से अपना रुख साफ न करने पर नाराजगी जताई है.
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार पर सात हजार पांच सौ (7500) रुपये का जुर्माना भी लगाया. दरअसल, इस मामले में केंद्र सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए 2 और सप्ताह का समय मांगा था. कोर्ट द्वारा वक्त दिए जाने के बावजूद केंद्र ने जवाब दाखिल नहीं किया. इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के पुराने फैसले का हवाला देते हुए केंद्र की बजाय राज्य स्तर पर अल्पसंख्यकों की पहचान कर आंकड़े तैयार करने और उसी मुताबिक दिशा-निर्देश बनाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है.
सभी होईकोर्ट के मामले किए गए ट्रांसफर
याचिका में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग एक्ट 1992 की वैधता को भी चुनौती दी गई है. देश की सर्वोच्च अदालत ने गुवाहाटी, मेघालय और दिल्ली हाईकोर्ट में अल्पसंख्यकों के शैक्षिक संस्थानों और योजनाओं को चुनौती देने वाले मामलों को भी अपने पास ट्रांसफर कर लिया है. क्योंकि इन याचिकाओं में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान आयोग अधिनियम 2004 के प्रावधानों को भी चुनौती दी गई है.
पिछली सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोविड संकट के समय सुप्रीम कोर्ट सहित अन्य संस्थानों पर पड़ रहे असर को देखते हुए जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा था. कोर्ट ने आखिरी मोहलत की ताकीद करते हुए केंद्र सरकार की ये अपील मंजूर की थी. लेकिन सरकार के पास आज भी जवाब नहीं था तो कोर्ट ने नाराज होकर फटकार और जुर्माना दोनों लगाया.
इन राज्यों में उठी हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा देने की मांग
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई इस याचिका में कहा गया है कि देश के 9 राज्य ऐसे हैं, जहां हिंदू अल्पसंख्यक हैं, लेकिन उन्हें इसका (अल्पसंख्यक होने का) लाभ नहीं मिल पा रहा. याचिका में लद्दाख, मिजोरम, लक्षद्वीप, कश्मीर, नागालैंड, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, पंजाब और मणिपुर राज्यों का जिक्र किया गया है, जहां पर हिंदू अल्पसंख्यक हैं.