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धोखे से धर्मांतरण मामले पर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से 4 हफ्तों में मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को धोखे से धार्मिक परिवर्तन और धर्मांतरण को लेकर दाखिल एक याचिका पर सुनवाई हुई. याचिका में धोखे से धार्मिक परिवर्तन और धर्मांतरण को नियंत्रित करने के लिए आईपीसी में कड़े प्रावधान शामिल करने की मांग की गई है. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर गृह मंत्रालय और कानून मंत्रालय को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है.

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सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को धोखे से धार्मिक परिवर्तन और धर्मांतरण को लेकर दाखिल एक याचिका पर सुनवाई हुई. याचिका में धोखे से धार्मिक परिवर्तन और धर्मांतरण को नियंत्रित करने के लिए आईपीसी में कड़े प्रावधान शामिल करने की मांग की गई है. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर गृह मंत्रालय और कानून मंत्रालय को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है. 

सीजेआई जस्टिस उदय उमेश ललित, जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस एस रविंद्र भट्ट की बेंच में इस मामले में सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि लोगों को धमकाकर, उपहारों के जरिए और पैसे का लाभ देकर धोखे से धार्मिक आस्था छोड़ने और धर्मांतरण देश में बड़े पैमाने पर कराया जा रहा है. 

याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय के वकील ने दलील दी कि इस गतिविधि को नियंत्रित करने के लिए आईपीसी में प्रावधान कड़े किए जाएं. सुप्रीम कोर्ट ने गृह मंत्रालय और कानून मंत्रालय को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट 14 नवंबर को मामले पर अगली सुनवाई करेगा. 

मार्च में सुनवाई से कर दिया था इनकार

सुप्रीम कोर्ट में जबरन धर्म परिवर्तन को लेकर इस साल मार्च में भी याचिका दाखिल की गई थी. लेकिन तब कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी. उस समय सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने जबरन धर्मांतरण को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई के इनकार कर दिया था. वह याचिका मद्रास हाई कोर्ट के एक आदेश को चुनौती देते हुए दाखिल की गई थी.

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस ए एस बोपन्ना की पीठ ने याचिका पर सख्त टिप्पणी करते हुए इसे खारिज करने की बात कही थी. पीठ ने कहा था कि इस तरह की याचिकाओं से सामाजिक सामंजस्य बिगड़ने का भय है. साथ ही यह याचिका जनहित के बजाय प्रचार हित के लिए अधिक समझ आ रही है. 

कोर्ट ने तब इस याचिका के लिए याचिकाकर्ता पर जुर्माना लगाने की बात भी कही थी, जिस पर याचिकाकर्ता के वकील सी आर जया सुकिन ने इसे वापस लेने की अनुमति मांगी. जिसके बाद कोर्ट ने इसे वापस लेने के रूप में खारिज करार दिया था. 
 


 

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