जम्मू कश्मीर से संविधान का अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद कश्मीर घाटी में आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े एक कथित बड़े आतंकवादी षडयंत्र मामले में आरोपी सुहैल अहमद ठाकोर को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है.
सुहैल पर नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने केस दर्ज किया था.
इसके अलावा, दूसरे आपराधिक कानूनों के साथ-साथ अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट यानी यूएपीए की भी अलग-अलग धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे.
यह मामला जम्मू और कश्मीर राज्य से संविधान के अनुच्छेद 370 के मुताबिक विशिष्ट प्रावधान शिथिल और निष्प्रभावी किए जाने के बाद कश्मीर घाटी में आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े एक कथित बड़े टेरर कॉन्सपिरेसी से जुड़ा हुआ था.
कोर्ट ने क्या कहा?
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने 5 अक्टूबर, 2021 को गिरफ्तारी के बाद से ठाकोर के जेल में बिताए समय को ध्यान में रखते हुए जमानत दी है. कोर्ट ने यह भी गौर किया कि ट्रायल खत्म होने में काफी वक्त लग सकता है. कोर्ट ने कहा कि सुहैल अहमद पर आरोपों की गंभीरता या आरोपी के खिलाफ लगाए गए अपराधों पर कोई राय नहीं दे रहा है.
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि ठाकोर को दिल्ली में तय NIA कोर्ट द्वारा लगाई जाने वाली शर्तों के तहत जमानत पर रिहा किया जाए. वे अपने अधिकार क्षेत्र वाले पुलिस स्टेशन में रेगुलर पेश हों और फिजिकल या इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग की शर्तों का पालन करें.
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एनआईए का आरोप है कि सुहैल ठाकोर उस साजिश में शामिल थे, जिसे कथित तौर पर लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिदीन जैसे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों ने रचा था. साजिश का मकसद भारत के संविधान के आर्टिकल 370 को हटाने के बाद स्थानीय युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों के लिए भर्ती करना था.