scorecardresearch
 

कोरोना संकट में ऑनलाइन सुनवाई- केंद्र से सुप्रीम कोर्ट बोला- अदालतों को फाइबर नेटवर्क कराएं मुहैया

कोविड-19 महामारी के दौर में अदालतों में सुनवाई को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि कोरोना संकट में ऑनलाइन सुनवाई के लिए अदालतों को फाइबर ऑप्टिकल नेटवर्क मुहैया कराएं.

Advertisement
X
केंद्र अदालतों को फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क मुहैया कराए
केंद्र अदालतों को फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क मुहैया कराए
स्टोरी हाइलाइट्स
  • वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुनवाई के लिए बनी कमेटी
  • 11 हाईकोर्ट वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुनवाई को तैयार
  • वकीलों को टैब मुहैया कराने पर विचार करे सरकार-CJI

कोविड-19 महामारी के दौर में अदालतों में सुनवाई को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि कोरोना संकट में ऑनलाइन सुनवाई के लिए अदालतों को फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क मुहैया कराएं.

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई

असल में, देश भर में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई के लिए नियम बनाने के लिए 5 उच्च न्यायालयों के जजों की एक समिति बनाई गई है. इसे लेकर एक मसौदा सभी उच्च न्यायालयों को भेजा गया था और उनसे इस मुद्दे पर सुझाव मांगा गया था. अब इससे संबंधित नियम जारी किए गए हैं. 11 हाई कोर्ट ने इन नियमों को अपना भी लिया है, और यहां तक कि साक्ष्यों को रिकॉर्ड करने की अनुमति भी दी है.

देखें: आजतक LIVE TV 

इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद अब ट्रायल कोर्ट के पीठासीन अधिकारी इस बात पर विचार कर सकते हैं कि क्या साक्ष्य वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दर्ज किए जा सकते हैं. साक्ष्यों को रिकॉर्ड करने के लिए दोनों पक्षों की सहमति जरूरी होगी.

कोरोना संकट के बीच वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई के मसले पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे ने कहा, 'हम उच्च न्यायालयों को अपने राज्यों में वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के लिए अपने नियमों को लागू करने की अनुमति देने का प्रस्ताव करते हैं. इस संबंध में प्रत्येक हाई कोर्ट के अपने नियम होंगे. '

Advertisement

फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क मुहैया करायें

उपकरण की उपलब्धता, वाईफाई की स्थिरता, इंटरनेट के बारे में वकीलों की जानकारी ये भी एक मसला है. मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि उच्च न्यायालयों को इस मामले में पूरी छूट देने की हमारी योजना है. हम चाहते हैं कि केंद्र सरकार हमें फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क की सुविधा मुहैया कराये.

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कुछ साल पहले सरकार ने किसी ऐसे व्यक्ति को चिन्हित किया था जो 4000-5000 रुपये में स्वदेशी टैबलेट बना रहा था. वे स्मार्टफ़ोन से बेहतर होंगे और लैपटॉप की तरह महंगे नहीं होंगे. यदि वे अभी भी उपलब्ध हैं, तो आप उन्हें मुहैया कराने पर विचार कर सकते हैं. बार काउंसिल के माध्यम से वकीलों के लिए बार वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा सकती है.

CJI सबकी शिकायत सुनता है
 
अटॉर्नी जनरल ने कहा कि आज से गुजरात हाई कोर्ट में यूट्यूब से लाइव स्ट्रीमिंग के जरिये सुनवाई शुरू हो गई है. इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मुझे पता है कि आप लाइवस्ट्रीमिंग के सभी पक्षधर हैं. लेकिन आपको CJI का पक्ष भी सुनना चाहिए क्योंकि वह सभी शिकायतों को सुनता है.

रिलायंस जियो का मिला सुझाव

वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा, मैं एक क्लाइंट के साथ काम करता हूं जो डिजिटल स्पेस में सबसे बड़ा नाम है- रिलायंस जियो. आज Jio सबसे बड़ा फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क है. जियो ग्राहकों को 100 एमबीपीएस स्पीड दे रही है. इस पर सीजेआई ने कहा कि अपने क्लाइंट से कहिए कि वो औपचारिक तौर पर ई- कमेटी से मिले और लिखित में सुझाव दें.

Advertisement

 

Advertisement
Advertisement