
मकर संक्रांति के दिन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दफ्तर का पता बदल रहा है. साउथ ब्लॉक में मौजूद पीएमओ पर 'सेवा तीर्थ’ परिसर में ट्रांसफर होने जा रहा है. पीएमओ की सिर्फ जगह नहीं बदलेगी, काम करने का अंदाज भी नया होगा. मतलब अब, देश का शीर्ष प्रशासनिक तंत्र एक नए और आधुनिक परिसर से काम करेगा. 'सेवा तीर्थ’ दारा शिकोह रोड (पहले डलहौजी रोड) पर बना है.
बता दें कि देश की आजादी के बाद से प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) साउथ ब्लॉक में ही मौजूद है. लेकिन अब ये वहां से हटाया जा रहा है. नया कार्यालय परिसर सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का हिस्सा है.
1,189 करोड़ रुपये की लागत से बना आधुनिक परिसर
‘सेवा तीर्थ’ एक आधुनिक प्रशासनिक परिसर है, जिसे करीब 1,189 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से तैयार किया गया है. यह करीब 2.26 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में फैला है. पूरे परिसर में तीन अलग-अलग इमारतें हैं, जिनकी भूमिका तय की गई है.
तीन इमारतें, तीन अहम और अलग जिम्मेदारियां
सेवा तीर्थ-1 वह मुख्य इमारत है, जहां प्रधानमंत्री कार्यालय यानी पीएमओ काम करेगा.
सेवा तीर्थ-2 कैबिनेट सचिवालय का नया मुख्यालय है, जो 2025 के आखिर से कार्यरत है.
सेवा तीर्थ-3 राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) के कार्यालय के लिए निर्धारित जगह होगी.
इस तरह एक ही परिसर में सरकार के शीर्ष प्रशासनिक और रणनीतिक संस्थान काम करेंगे.

ओपन फ्लोर मॉडल, बदली दफ्तर संस्कृति
नए पीएमओ में ‘ओपन फ्लोर’ मॉडल अपनाया गया है. साउथ ब्लॉक की बंद और ऊंची दीवारों वाली दफ्तर व्यवस्था से अलग यहां खुला कार्यस्थल बनाया गया है. इसका मकसद कामकाज को आसान बनाना और आपसी सहयोग को बढ़ाना है.
जहां सामान्य कार्यालय आधुनिक और सादे रखे गए हैं, वहीं प्रधानमंत्री का निजी कक्ष और सेरोमोनियल रूम्स अपेक्षाकृत भव्य बनाए गए हैं. इन कमरों में विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों से मुलाकात होगी. इनकी सजावट में भारत की सांस्कृतिक विरासत और 5,000 साल पुरानी सभ्यता की झलक दिखाई देती है.
‘इंडिया हाउस’, उच्चस्तरीय बैठकों के लिए
सेवा तीर्थ कॉम्पलेक्स के अंदर ‘इंडिया हाउस’ नाम से एक आधुनिक कॉन्फ्रेंस फेसेलिटी भी बनाई गई है. इसे खास तौर पर उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठकों और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के लिए तैयार किया गया है.
यह पूरा परिसर उच्चतम भूकंपीय और सुरक्षा मानकों के मुताबिक बनाया गया है. यहां टॉप की साइबर सुरक्षा व्यवस्था और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन लाइंस मौजूद हैं. कुल मिलाकर, मकर संक्रांति पर पीएमओ का ‘सेवा तीर्थ’ में जाना सत्ता और प्रशासन के कामकाज में एक नए दौर की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है.
नॉर्थ और साउथ ब्लॉक का क्या होगा?
पीएमओ 1947 से साउथ ब्लॉक से काम कर रहा है. लेकिन अब उसे वहां से ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट किया जाएगा. नॉर्थ ब्लॉक में पहले गृह मंत्रालय और वित्त मंत्रालय थे, ये मंत्रालय अब कर्तव्य भवन में चले गए हैं.
पूरी तरह खाली होने के बाद, साउथ और नॉर्थ ब्लॉक दोनों को 'युगे युगीन भारत संग्रहालय' नाम के एक पब्लिक म्यूजियम में बदल दिया जाएगा. म्यूजियम प्रोजेक्ट पर टेक्निकल सहयोग के लिए 19 दिसंबर, 2024 को फ्रांस की म्यूजियम डेवलपमेंट एजेंसी के साथ एक एग्रीमेंट साइन किया गया था.