7 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को केंद्र सरकार ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है. केंद्र ने इन्हें सीबीआई में डीआईजी नियुक्त किया है. वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुमेधा और गगनदीप सिंगला उन सात अधिकारियों में शामिल हैं जिन्हें गुरुवार को सीबीआई में उप महानिरीक्षक (डीआईजी) नियुक्त किया गया है.
कार्मिक मंत्रालय के एक आदेश में कहा गया है कि हिमाचल प्रदेश कैडर की 2005 बैच की आईपीएस अधिकारी सुमेधा को पांच साल के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में डीआइजी नियुक्त किया गया है.
एक अन्य आदेश में कहा गया, राजस्थान कैडर के 2010 बैच के आईपीएस अधिकारी गगनदीप सिंगला को 12 जनवरी, 2024 से 11 जनवरी, 2029 तक पांच साल के लिए डीआइजी के रूप में नामित किया गया है. उन्हें पिछले साल नवंबर में सीबीआई में पुलिस अधीक्षक के रूप में नामित किया गया था.
इनके अलावा, पांच आईपीएस अधिकारी - के शिव सुब्रमणि, धूरत सयाली सावलाराम, पी मुरुगन, राजवीर और जल सिंह मीना को भी अलग-अलग संयुक्त कार्यकाल के लिए डीआईजी के रूप में नियुक्त किया गया है.
बता दें कि सीबीआई की स्थापना 1963 में हुई थी. ये एक केंद्रीय जांच एजेंसी है. सीबीआई सुप्रीम कोर्ट या भारत सरकार के आदेश पर देश के किसी भी कोने में जांच कर सकती है. हालांकि, कुछ राज्यों में जैसे बंगाल आदि में इसे राज्य सरकार की अनुमति लेनी पड़ती है. ये जांच एजेंसी हत्या, घोटालों और भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करती है.
सीबीआई के लिए चयन सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से किया जाता है. सीबीआई में ग्रुप ए ऑफिसर बनने के लिए उम्मीदवार को इसे क्वालिफाई करना होगा और आईपीएस ऑफिसर बनना होगा. एसएससी सीजीएल परीक्षा पास करके उम्मीदवार सीबीआई में सब-इंस्पेक्टर भी बन सकता है.
क्या है CBI का काम?
- भ्रष्टाचार से निपटनाः केंद्रीय कर्मचारियों के भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के मामलों से निपटना.
- आर्थिक अपराध से निपटनाः बैंक धोखाधड़ी, विदेशी मुद्रा उल्लंघन और तस्करी से निपटना.
- विशेष अपराध से निपटनाः आतंकवाद, संवेदनात्मक हत्याएं और अन्य अपराध से निपटना.
CBI के पास कितनी ताकत?
- सीबीआई किसी भी पब्लिक सर्वेंट को गिरफ्तार कर सकती है, जब जांच के लिए उसे गिरफ्तार किया जाना जरूरी है या जब एजेंसी को लगे कि आरोपी भाग सकता है या सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है. सीबीआई बिना वारंट के भी गिरफ्तार कर सकती है.
- ये केंद्र के अधीन है, लेकिन ये किसी मामले की जांच तभी करती है जब केंद्र से या हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट से आदेश मिलता है. मामला किसी राज्य का है, तो जांच के लिए वहां की राज्य सरकार की अनुमति जरूरी होती है.