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Seedhi Baat: किसान आंदोलन पर बोले नवाजुद्दीन सिद्दीकी- जायज होती हैं मांगें

प्रभु चावला के साथ 'सीधी बात' में एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि मुझे लगता है कि किसानों और सरकार के बीच बातचीत होनी चाहिए. कोई न कोई समाधान जरुर निकलेगा. मुझे उम्मीद है सरकार के पास सोल्युशन है.

मशहूर फिल्म एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी मशहूर फिल्म एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 'मुझे उम्मीद कि सरकार के पास है किसानों को लेकर सोल्युशन'
  • 'ओटीटी से खूबसूरत प्लेटफॉर्म और कोई नहीं, यह बेहद डेमोक्रैटिक'
  • मैं जो भी हूं 10-12 साल के संघर्ष की बदौलतः नवाजुद्दीन सिद्दीकी

मशहूर फिल्म एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने आजतक के खास कार्यक्रम 'सीधी बात' में कई मुद्दों पर बात की. किसान आंदोलन समेत कई मुद्दों को लेकर भी अपनी राय जाहिर की.

किसान आंदोलन और किसानों की मांगें क्या जायज हैं, प्रभु चावला के साथ सीधी बात में नवाजुद्दीन सिद्दी ने कहा कि मांगें अमूमन जायज ही होती हैं. मुझे सरकार और किसानों दोनों से उम्मीद है कि आपस में जब बैठकर बातें होंगी तो जो भी समाधान निकलेगा अच्छा ही निकलेगा.

किसानों के आंदोलन के बारे में कहा कि मुझे लगता है कि किसानों और सरकार के बीच बातचीत होनी चाहिए. मुझे लगता है कि कोई न कोई समाधान जरुर निकलेगा. मुझे उम्मीद है सरकार के पास सोल्युशन है.

'यहां भी टैलेंट की बहुत कदर'

प्रभु चावला के साथ 'सीधी बात' में फिल्म इंडस्ट्री में इनसाइडर और आउटसाइडर को लेकर नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि ऐसी बात नहीं है कि यहां पर टैलेंट की बहुत कदर भी है. हजारों लोग आउटसाइडर ही थे जो आज इनसाइडर हो गए हैं. हम भी आज जाकर इनसाइडर ही हो गए. उन्होंने कहा कि यह तभी होता है जब आपके अंदर कुछ होता है.

नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि कई आउटसाइडर ऐसे होते हैं जो योग्य नहीं होते हैं और बड़ी संख्या में ऐसे इनसाइडर भी हैं जो बहुत अच्छे हैं और बहुत योग्य हैं. इन्हीं इनसाइडर में भी कई लोग होते हैं जो हम लोगों को काम भी देते हैं.

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शाहरुख और सलमान खान के बारे में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि दोनों की अलग-अलग खूबी है. इंसानी तौर पर दोनों का कोई जवाब नहीं है. जहां तक एक्टिंग की बात है. हर इंसान की एक्टिंग बहुत अलग-अलग होती है. हम अच्छा बुरा कहने वाले कुछ नहीं होते.

बाल ठाकरे से जुड़ी फिल्म में रोल के बारे में आलोचना को लेकर नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि मैं तो इन सब चीजों पर ध्यान नहीं देता. मैं तो एक्टर हूं. मैं हर तरह का रोल करना चाहता हूं. हर एक्टर की ख्वाहिश होती है कि वो अलग-अलग तरह के रोल करे. बाल ठाकरे का रोल करते हुए मैंने काफी मेहनत की थी. मेरे लिए यह रोल बेहद मुश्किल रहा था. जब आप किसी चीज के पीछे लग जाते हैं और कामयाबी मिलती है तो अच्छा लगता है. आलोचना तो हर इंसान की होती है. 

'ओटीटी ही अभी फ्यूचर'

गांव से सिनेमा तक के सफर के बारे में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि मुझे काफी संघर्ष करना पड़ा. आज मैं जो भी हूं उसमें 10-12 साल के संघर्ष की बदौलत ही है.

ओटीटी के बारे में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि महामारी की वजह से थिएटर बंद हैं. लेकिन उससे फायदा यह हुआ कि ओटीटी आगे बढ़ा. ओटीटी से खूबसूरत प्लेटफॉर्म और कोई नहीं हो सकता. वो बहुत ही डेमोक्रैटिक प्लेटफॉर्म है. इस प्लेटफॉर्म से बहुत सारे एक्टर्स निकलकर आए.

देश में सिनेमा का फ्यूचर थिएटर है या ओटीटी, के सवाल के जवाब में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि फिलहाल अभी जो हालात हैं और जब तक सभी लोगों का टीकाकरण नहीं हो जाता तब तक ओटीटी ही बेहतर है.

 

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