संसद भवन परिसर में सोमवार को अचानक सुरक्षा अलार्म बजने से कुछ समय के लिए स्थिति चिंताजनक बन गई. दरअसल, तेज हवाओं के कारण संसद परिसर के एक प्रवेश द्वार पर लगा बूम बैरियर अचानक नीचे गिर गया, जिससे सिक्योरिटी सेंसर एक्टिव हो गए और अलार्म बज उठा. अलार्म बजते ही संसद परिसर की सुरक्षा में तैनात केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की टीमें अलर्ट मोड में आ गईं और क्विक रिएक्शन टीम (QRT) तुरंत मौके पर पहुंची.
सूत्रों के अनुसार, घटना के तुरंत बाद CISF के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया. शुरुआती जांच में यह सामने आया कि यह सुरक्षा अलर्ट किसी वास्तविक खतरे के कारण नहीं, बल्कि तकनीकी गड़बड़ी और तेज हवा के चलते हुआ था. बूम बैरियर के अचानक गिरने से ऑटोमेटिक सिक्योरिटी सिस्टम को लगा कि कोई अज्ञात वस्तु या वाहन संसद भवन परिसर में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा है, जिसके चलते सिक्योरिटी अलार्म एक्टिव हो गए.
घटना संसद भवन परिसर के उस गेट पर हुई जो विजय चौक के पास स्थित है. कुछ समय के लिए वहां वाहनों की आवाजाही रोक दी गई थी. हालांकि सुरक्षा एजेंसियों द्वारा स्थिति स्पष्ट होने के बाद वाहनों की आवाजाही दोबारा सामान्य कर दी गई. सूत्रों ने बताया कि प्रारंभिक तौर पर माना जा रहा है कि तेज हवा के कारण बैरियर नीचे आ गया, लेकिन यह भी जांच की जा रही है कि कहीं ऐसा इसलिए तो नहीं हुआ कि उस समय प्रवेश कर रही किसी गाड़ी के स्टिकर को सुरक्षा प्रणाली पढ़ नहीं पाई.
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बता दें कि संसद भवन परिसर की सुरक्षा मई 2024 से केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जिम्मे है. दिसंबर 2023 में हुए सुरक्षा उल्लंघन के बाद यह जिम्मेदारी CISF को सौंपी गई थी. केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाली इस अर्धसैनिक बल के करीब 3,300 जवान संसद परिसर की सुरक्षा में तैनात हैं, जिनमें फायर फाइटर्स और डिजास्टर रिस्पॉन्स टीम भी शामिल हैं. यह सुरक्षा उल्लंघन 13 दिसंबर 2023 को हुआ था, जिस दिन 2001 के संसद हमले की 22वीं वर्षगांठ थी.
संसद भवन की सुरक्षा में 2023 में लगी थी सेंध
लोकसभा की विजिटर गैलरी से दो व्यक्ति- सागर शर्मा और मनोरंजन डी सदन के अंदर कूद गए. उन्होंने पीले रंग का धुआं फैलाने के लिए स्मोक कैन/स्मोक बम छोड़े. वे नारे लगाते हुए टेबलों पर चढ़े और सदन में अफरा-तफरी मचा दी. संसद भवन परिसर के बाहर भी उनके कुछ साथी स्मोक गन से धुआं फैलाने की कोशिश कर रहे थे. सुरक्षा बलों ने उन्हें तुरंत पकड़ लिया. 2001 के आंतकी हमले के बाद यह संसद की सुरक्षा में एक और बड़ी चूक थी.
इस घटना में कुल 6 मुख्य आरोपी थे- सागर शर्मा, मनोरंजन डी, अमोल धनराज शिंदे, नीलम आजाद (नीलम रानोलिया), ललित झा और महेश कुमावत. इन सभी पर यूएपीए (Unlawful Activities Prevention Act) जैसे कड़े आतंकवाद विरोधी कानून के तहत मुकदमा चला. दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट में इन पर आरोप लगाया कि वे भारतीय लोकतंत्र को बदनाम करना चाहते थे और यह एक सुनियोजित गैस अटैक था. कुछ आरोपियों (जैसे नीलम आजाद और महेश कुमावत) को बाद में जमानत मिल गई, लेकिन उनके खिलाफ भी कोर्ट में मामला अभी लंबित है.