133 दिनों तक संसद की सदस्यता गंवाए रखने के बाद आज राहुल गांधी का ये बयान आया तो कांग्रेसियों के मन में खूब लड्डू फूटे. फूटे ही नहीं चेन्नई में तो बंटे भी. दिल्ली में कांग्रेसियों ने आतिशबाज़ी की.
वायनाड से संसद पहुंचे राहुल इसी साल की 24 मार्च को अयोग्य घोषित हुए थे.. और आज वो फिर से योग्य हो गए. 4 साल पहले राहुल ने कर्नाटक में मोदी उपनाम को लेकर एक बयान दिया था.. तब खूब हंगामा मचा. बात कोर्ट में पहुंची. बयान को संपूर्ण मोदी उपनाम वाले 13 करोड़ लोगों की मानहानि मानते हुए लोवर कोर्ट ने राहुल को अधिकतम सज़ा सुन दी. इसी में उनकी संसद सदस्यता भी चली गई. आज देश की सबसे बड़ी अदालत ने जब इस सज़ा पर रोक लगाई तो राहुल गांधी की सदस्यता बहाली का रास्ता भी खुल गया. कोर्ट ने माना कि निचली अदालत और हाईकोर्ट फैसले में ये नहीं बता सके कि मानहानि मुकदमे में राहुल को अधिकतम सजा देने का कारण क्या था. कोर्ट ने राहुल को भी कहा कि उनका बयान गुड टेस्ट में नहीं था और उनको परहेज़ करना चाहिए था. सुनिए 'दिन भर' में
वहीं आज इलाहाबाद हाईकोर्ट से इजाजत मिलने के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद पहुंची. कड़ी सुरक्षा, पुलिस कर्मियों की मौजूदगी में करीब 8 बजे ASI टीम के 61 मेंबर्स ने साइंटिफिक सर्वे शुरू किया। लेकिन मुस्लिम पक्ष ने खुद को इस सर्वे से अलग रखा, उनकी ओर से वहां न कोई वकील मौजूद था, न ही मस्जिद कमेटी का कोई सदस्य। बकायदा मुस्लिम पक्ष ने शासन को चिट्ठी लिखकर बताया कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मामले में रोक लगाने की मांग की है और सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक वो इस सर्वे से अलग ही रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई भी और फैसला भी आ गया। जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की. मुस्लिम पक्ष की अपील ख़ारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि ज्ञानवापी में सर्वे जारी रहेगा। मुस्लिम पक्ष के पुरज़ोर विरोध और कंसर्नस के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला दिया तो इसके क्या आधार रहे? सुनिए 'दिन भर' में
2009 में G7 के बरक्स चार विकासशील देशों ने एक संगठन बनाया था. मकसद था इसका- फॉरन इन्वेस्टमेंट से जुड़ी स्ट्रैटजी तैयार करना था, इसमें ब्राज़ील, रूस, चीन और भारत शामिल था तो चारों देश के इनिशियल्स मिलाकर नामकरण हुआ- BRIC. साल 2010 में चीन का न्यौता मंज़ूर कर साउथ अफ्रीका इसमें शामिल हुआ तो पांचों ने मिलकर बनाया- BRICS. अब एक दशक बाद इस संगठन में विस्तार का दौर शुरू होने जा रहा है. 22 देशों ने इस संगठन का हिस्सा बनने के लिए अर्जी बढ़ा दी है, मगर कहा जा रहा है कि भारत-चीन के बीच इन्हें लेकर थोड़ी खींचतान है. दोनों ही इस ग्रुप में अपना दबदबा चाहते हैं तो नए मेंबर्स की एंट्री को लेकर सहमति नहीं है. इस साल का BRICS समिट साउथ अफ्रीका की राजधानी जोहान्सबर्ग में होना है, साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति ने भारतीय प्रधानमंत्री को इसमें हिस्सा लेने के लिए बुलाया है. प्रधानमंत्री मोदी का इस बारे में प्रोग्राम तय हो चुका है, वो 22 से 24 अगस्त तक दक्षिण अफ्रीका में रहेंगे. तो सवाल उठ रहा है कि जो दो दर्ज़न देश ब्रिक्स का हिस्सा बनना चाहते हैं इससे इन देशों को क्या फ़ायदा है और ब्रिक्स को क्या फ़ायदा है. सुनिए 'दिन भर' में
छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके से एक आंकड़ा आया है. आंकड़ा जारी हुआ है बस्तर संभाग शिक्षा विभाग से. परेशान करनेवाला है थोड़ा. 8 हज़ार से ज्यादा बच्चे दाखिले के बावजूद स्कूल नहीं जा रहे. सरकार दावा करती है कि सरकारी स्कूलों में हर गांव से हर बच्चा स्कूल जा रहा है. बच्चों को शिक्षा से जुडी तमाम सुविधाओं के अलावा प्रोत्साहित करने के उन्हें साईकिल भी बांटी गई हैं... इसके बावजूद 8000 से ज़्यादा बच्चे स्कूल क्यों नहीं जा रहे, सुनिए 'दिन भर' में