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कनाडा में सिख नेता रिपुदमन सिंह की गोली मारकर हत्‍या, क्या रहा विवाद, क्यों आए चर्चा में, जानिए

रिपुदमन सिंह (Ripudaman Singh) पर कभी खालिस्‍तानी होने का आरोप लगा था. रिपुदमन सिंह मलिक की जिंदगी का सबसे बड़ा विवाद 1985 का एयर इंडिया बम धमाका रहा.

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रिपुदमन सिंह मलिक (फोटो क्रेडिट: ट्विटर/आदित्य राज कौल)
रिपुदमन सिंह मलिक (फोटो क्रेडिट: ट्विटर/आदित्य राज कौल)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • खालिस्‍तानी होने का लगा आरोप
  • एयर इंडिया बम धमाके में आया नाम

बिजनेसमैन और सिख नेता रिपुदमन सिंह मलिक की कनाडा के वैंकूवर में गोली मारकर हत्‍या कर दी गई. मलिक की आज सुबह ऑफिस जाते समय हत्या की गई. घटनास्थल से एक जलती हुई कार बरामद की गई. 1985 के एयर इंडिया बम धमाकों में उनका नाम सामने आया था. लेकिन बाद में उन्हें बरी कर दिया गया था. बरी होने से पहले मलिक ने चार साल जेल में बिताए. फिर उन्होंने कानूनी शुल्क के रूप में $9.2 मिलियन डॉलर की मांग की, लेकिन ब्रिटिश कोलंबिया के एक न्यायाधीश ने मुआवजे के उनके दावों को खारिज कर दिया.

PM मोदी की कर चुके हैं तारीफ

रिपुदमन सिंह ने 2022 के जनवरी महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की थी. उन्‍होंने सिख समुदाय के लिए मोदी सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों के लिए पत्र लिखकर आभार जताया था. 

खालिस्‍तानी होने का लगा आरोप

पंजाबी मूल के कनाडाई सिख रिपुदमन सिंह पर कभी खालिस्‍तानी होने का आरोप लगा था. बताया जा रहा है कि रिपुदमन सिंह ने खालसा क्रेडिट यूनियन की स्‍थापना की थी. रिपुदमन सिंह मलिक एक दशक तक इंडियन ब्लैक लिस्ट में थे. उन्हें 2020 में सिंगल एंट्री वीजा और हाल ही में 2022 में मल्टीपल वीजा दिया गया था. उन्होंने हाल ही में मई के महीने में आंध्र प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और महाराष्ट्र की तीर्थ यात्रा की. रिपुदमन सिंह मलिक श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की छपाई कर चर्चा में आए थे.

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एयर इंडिया बम धमाके में आया नाम

रिपुदमन सिंह मलिक की जिंदगी का सबसे बड़ा विवाद 1985 का एयर इंडिया बम धमाका रहा. उस हमले में 331 यात्रियों की जान चली गई थी. विमान कनाडा से दिल्ली के लिए रवाना हुआ था. लेकिन आयरिश हवाई क्षेत्र में आसमान में विमान में ब्लास्ट हुआ और मौके पर ही 331 यात्रियों की जान चली गई. कुछ यात्रियों के शव की जांच और मेडिकल चेकअप से मालूम चला कि उनकी मौत विस्‍फोट नहीं बल्कि समुद्र में डूबने के कारण हुई. क्योंकि वे जहां बैठे थे वहां तक ब्‍लास्‍ट का असर नहीं हुआ.

क्या रहा कनाडा कनेक्शन

मलिक 1972 में कनाडा आए. मलिक ने कनाडा में खालसा स्कूल चलाया. स्कूल वैंकूवर शिक्षा बोर्ड पाठ्यक्रम के अलावा पंजाबी भाषा और संस्कृति पढ़ाता था. वह खालसा क्रेडिट यूनियन के संस्थापक भी थे. उन्होंने कैब ड्राइवर के रूप में भी कुछ दिन काम किया. मलिक कथित तौर पर आतंकवादी संगठन बब्बर खालसा से जुड़े थे. मलिक बीसी, कनाडा के सतनाम एजुकेशन सोसाइटी के अध्यक्ष थे.
 

 

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