भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर सेना ने नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर अपना शौर्य दिखाया. कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड में सेना ने कई ऐसी सैन्य क्षमताएं भी प्रदर्शित कीं, जिनका दीदार पहली बार हुआ. गणतंत्र दिवस परेड में नवगठित भैरव लाइट कमांडो बटालियन और शक्तिबाण रेजिमेंट ने अपनी ताकत दिखाई. वहीं, डीप स्ट्राइक की क्षमता वाले रॉकेट लॉन्चर सिस्टम 'सूर्यास्त्र' के साथ ही फेज्ड बैटर एरे फॉर्मेशन भी कर्तव्य पथ से गुजरे.
गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा दो कूबड़ वाले बैक्ट्रियन ऊंट और जांस्कर नस्ल के पोनी भी बने. घुड़सवार 61 कैवेलरी के सैनिक भी परेड में पहली बार कॉम्बैट गियर में दिखाई दिए. 61 कैवेलरी आम तौर पर अपनी पारंपरिक औपचारिक वर्दी और आकर्षक हेडगियर के लिए जानी जाती है और परेड में सशस्त्र बलों की अग्रिम टुकड़ी रहती है. तीसरी पीढ़ी के सैन्य अधिकारी 26 साल के कैप्टन अहान कुमार ने परेड में इस प्रतिष्ठित टुकड़ी की अगुवाई की.
अहान कुमार ने 2025 की परेड में भी इस टुकड़ी का नेतृत्व किया था. इस बार की परेड में कैप्टन अहान हैनोवरियन नस्ल के अपने घोड़े रणवीर के साथ फिर कर्तव्य पथ पर लौटे. हालांकि, इस बार वे औपचारिक वर्दी की बजाय कॉम्बैट गियर में थे. परेड के बाद उन्होंने कहा कि मेरे लिए इस ऐतिहासिक टुकड़ी का औपचारिक वर्दी में नेतृत्व करना ज्यादा खुशी देता है, लेकिन इस साल कॉम्बैट गियर में अनुभव बिल्कुल अलग था.
थर्मल गियर में नजर आई स्काउट्स टुकड़ी
कर्तव्य पथ पर इस बार की गणतंत्र दिवस परेड में मिक्स स्काउट्स टुकड़ी ने भी पहली बार ऑपरेशनल रोल में हिस्सा लिया. स्काउट्स टुकड़ी भी हैवी थर्मल गियर में नजर आई. इस टुकड़ी की अगुवाई दूसरी पीढ़ी के सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट अमित चौधरी ने की. लेफ्टिनेंट अमित के पिता भी 1990 की गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा रहे थे.
यह भी पढ़ें: 'कानून का पालन ही सबसे बड़ा नागरिक कर्तव्य', गणतंत्र दिवस पर RSS प्रमुख मोहन भागवत का संदेश
कठिन मौसम के लिए डिजाइन की गई खास ड्रेस, विशेष जूतों और चश्मों से सुसज्जित इस टुकड़ी ने कर्तव्य पथ पर मार्च करते हुए खूब वाहवाही बटोरी. जम्मू कश्मीर के निवासी लेफ्टिनेंट अमित चौधरी इस समय असम रेजिमेंड की दो, अरुणाचल स्काउट्स में तैनात हैं. इस मिक्स टुकड़ी में लद्दाख स्काउट्स, डोगरा स्काउट्स, अरुणाचल स्काउट्स, कुमाऊं स्काउट्स, गढ़वाल स्काउट्स और सिक्किम स्काउट्स के जवान भी शामिल थे.
शक्तिबाण रेजिमेंट और भैरव बटालियन
तोपखाने में तैनात शक्तिबाण रेजिमेंट ने पहली बार परेड में हिस्सा लिया. यह रेजिमेंट सेना की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए बनाई गई है और इसे ड्रोन, काउंटर-ड्रोन से लैस किया जाना है. भैरव कमांडो बटालियन का गठन भी अभी पिछले ही वर्ष हुआ था और इस बटालियन ने चंद रोज पहले जयपुर में सेना दिवस की परेड से पदार्पण किया था. सिख लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट की भैरव बटालियन ने भी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार हिस्सा लिया. यह ए विशेष तरह की पैदल सेना है.
यह भी पढ़ें: 'भारत-चीन अच्छे पड़ोसी, मित्र और साझीदार', गणतंत्र दिवस पर शी जिनपिंग ने दी बधाई
परेड में ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल के साथ ही सतह से हवा में मार करने वाली मध्यम दूरी की मिसाइल MRSAM, एडवांस्ड टोएड आर्टिलरी गन सिस्टम, धनुष तोप और कुछ ड्रोन का भी प्रदर्शन किया गया. डीआरडीओ ने लॉन्ग रेंज एंटी शिप हाइपरसोनिक मिसाइल भी प्रदर्शित की, जो हाइपरसोनिक ग्लाइड तकनीक से लैस है.
पशु भी बने आकर्षण का केंद्र
रिमाउंट वेटरनरी कॉर्प्स टुकड़ी की अगुवाई कैप्टन हर्षिता राघव ने की. कैप्टन हर्षिता ने कहा कि उनकी टुकड़ी में शिकारी पक्षी चील और सेना के कु्ते भी शामिल थे. उन्होंने कहा कि ये पशु भी भारतीय सेना के सैनिक हैं. ये मूक योद्धा हैं. इन्हें ऑपरेशन के लिए तैयार करना और उनकी जरूरतों को समझना बेहद महत्वपूर्ण है. ये सेना के लिए वास्तविक फोर्स मल्टीप्लायर हैं. कर्तव्यपथ पर करीब 90 मिनट चली इस परेड में 18 मार्चिंग टुकड़ियों, 13 बैंड्स ने भाग लिया. परेड की थीम इस बार 'वंदे मातरम् के 150 वर्ष' रहा.