scorecardresearch
 

100 साल में कितना बदला देश का क्रिमिनल लॉ... गणतंत्र दिवस परेड में दिखेगी झलक

केंद्रीय गृह मंत्रालय 77वें गणतंत्र दिवस परेड की झांकी में देश के आपराधिक कानूनों में पिछले सौ साल का सबसे बड़ा बदलाव दिखाएगा. झांकी में साल 2024 में लागू किए गए तीन नए कानूनों भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम को केंद्र में रखा जाएगा, जो पुराने इंडियन पीनल कोड, कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर और इंडियन एविडेंस एक्ट की जगह ले चुके हैं.

Advertisement
X
झांकी में देश के आपराधिक कानूनों में पिछले 100 साल का सबसे बड़ा बदलाव दिखाया जाएगा. (File Photo: ITG)
झांकी में देश के आपराधिक कानूनों में पिछले 100 साल का सबसे बड़ा बदलाव दिखाया जाएगा. (File Photo: ITG)

केंद्रीय गृह मंत्रालय 77वें गणतंत्र दिवस परेड की झांकी में देश के आपराधिक कानूनों में पिछले सौ साल का सबसे बड़ा बदलाव दिखाएगा. ये बदलाव तेज, तकनीक आधारित और नागरिक केंद्रित न्याय व्यवस्था पर आधारित होगा. यह जानकारी शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान में दी गई.

इस झांकी का विषय तीन नए कानून होंगे. भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम. इन कानूनों को गृह मंत्रालय ने साल 2024 में लागू किया था. इनके जरिए अंग्रेजों के जमाने के इंडियन पीनल कोड, कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर और इंडियन एविडेंस एक्ट को बदला गया है.

झांकी में दिखाया जाएगा नया संसद भवन

बयान के मुताबिक, झांकी में नए संसद भवन को दिखाया जाएगा. इसके ऊपर किताबों के रूप में तीनों नए कानून प्रदर्शित होंगे. झांकी के जरिए यह बताया जाएगा कि नए कानून पूरे देश में लागू हो चुके हैं और भारत अब एक आधुनिक, तकनीक आधारित, समयबद्ध और नागरिक केंद्रित न्याय व्यवस्था की ओर बढ़ चुका है.

कानून की किताबों को कई भाषाओं में दिखाया जाएगा. इससे सरकार की यह मंशा सामने आती है कि कानून सभी के लिए सुलभ, समावेशी और पारदर्शी हो. ताकि देश के हर नागरिक के लिए नई कानूनी व्यवस्था को समझना आसान हो.

Advertisement

नई व्यवस्था का मूल विचार- सजा से न्याय की ओर बढ़ना

बयान में कहा गया है कि यह प्रदर्शनी न्याय व्यवस्था में हुए व्यापक बदलाव को दिखाने का प्रयास करेगी. एक ऐसी व्यवस्था जो आधुनिक हो, मानवीय हो और आम नागरिक की समझ में आने वाली हो. यह भारत को विकसित भारत बनाने की दिशा में एक अहम कदम है. इसका मूल विचार है 'सजा से न्याय की ओर बढ़ना'.

दिखाए जाएंगे नए कानूनों के प्रावधान

झांकी में नए कानूनों के कई प्रावधान भी दिखाए जाएंगे. जैसे सबूत इकट्ठा करने की नई व्यवस्था. डिजिटल सबूत के लिए ई-साक्ष्य. पहचान के लिए नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम. अदालतों की ओर से डिजिटल साइन वाले समन भेजने की सुविधा. वर्चुअल सुनवाई जैसी तकनीक आधारित अदालत प्रक्रियाएं भी इसमें शामिल होंगी. बयान में कहा गया है कि झांकी में दिखाई जाने वाली मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट अपराध स्थल पर जल्दी पहुंच और बेहतर जांच क्षमता का प्रतीक होंगी.

इसके साथ ही तेज प्रतिक्रिया प्रणाली भी दिखाई जाएगी. जैसे इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम व्यवस्था. सीसीटीवी कैमरों जैसी बेहतर निगरानी व्यवस्था. साथ ही फील्ड ऑपरेशन और त्वरित कार्रवाई इकाइयों में प्रशिक्षित महिला पुलिसकर्मियों की बढ़ती भूमिका को भी प्रमुखता से दिखाया जाएगा. बयान में कहा गया है कि नए कानूनों में सुधारात्मक सजा के रूप में सामुदायिक सेवा को शामिल करना न्याय के प्रति एक प्रगतिशील और मानवीय सोच को दर्शाता है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement