डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर से पैरोल मिलने पर चौतरफा विरोध हो रहा है. इसी बीच जब हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से इस मुद्दे के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने इस सवाल को टाल दिया और अचानक प्रेस कॉन्फ्रेंस को खत्म कर दिया.
दरअसल, गुरमीत राम रहीम को सोमवार सुबह रोहतक की सुनारिया जेल से 40 दिन की पैरोल पर रिहा कर दिया गया. ये उसकी सजा के बाद 15वीं पैरोल है. राम रहीम साध्वी यौन शोषण और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में 20 साल और उम्रकैद की सजा काट रहा है. पैरोल मिलने के बाद वे सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय के लिए रवाना हो गया.
'ये कोर्ट का मामला'
राम रहीम को पैरोल मिलने पर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठन सवाल उठा रहे हैं. इसी को लेकर जब मुख्यमंत्री नायब सैनी से प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल पूछा गया तो उन्होंने सवाल को नजरअंदाज कर दिया और कहा कि ये अदालत का मामला है. इसके बाद सीएम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को अचानक खत्म कर दिया और वहां से चले गए.
इसी दौरान जब उनसे अरवली के बारे में पूछा तो उन्होंने इस सवाल को भी टाल दिया. इससे पहले भी पैरोल के मुद्दों पर सीएम सैनी और बीजेपी नेताओं ने कहा है कि इसमें किसी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है.
विपक्ष का आरोप है कि डेरा प्रमुख के अनुयायियों का राजनीतिक प्रभाव हरियाणा और पड़ोसी राज्यों में काफी है, जिस वजह से पैरोल के फैसले पर सवाल उठते रहे हैं. हालांकि, सरकार का कहना है कि पैरोल जेल नियमों के तहत दी जाती है.
2020 से जारी है पैरोल का सिलसिला
राम रहीम की पैरोल का सिलसिला 2020 से जारी है. सजा के शुरुआती 8 सालों में वह 405 दिनों से ज्यादा जेल से बाहर रह चुका है. इस बार की पैरोल डेरा के पूर्व प्रमुख शाह सतनाम महाराज की जयंती की तैयारियों से जुड़ी बताई जा रही है.